रामसीन | जालोर जिले के छोटे से गांव रामसीन के दो सगे भाइयों ने अपनी मेहनत और अटूट लगन से पूरे प्रदेश में सफलता की एक नई मिसाल पेश की है। सुरेश कुमार और जयंतीलाल राजपुरोहित ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) 2024 की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है। सुरेश कुमार ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में 141वीं रैंक प्राप्त की है, जबकि उनके छोटे भाई जयंतीलाल राजपुरोहित को 327वीं रैंक मिली है। इस दोहरी कामयाबी की खबर मिलते ही पूरे गांव में जश्न का माहौल है और बधाइयों का तांता लगा हुआ है।
संघर्षों की भट्टी में तपकर मिली सफलता
इन दोनों भाइयों की सफलता के पीछे एक लंबा और कठिन संघर्ष छिपा है। उनके पिता कालूजी पुरोहित ने केवल नौवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है। वे सूरत में एक साधारण रेस्टोरेंट चलाकर अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करते हैं। सुरेश कुमार का सफर युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है। साल 2009 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी। घर चलाने के लिए उन्होंने सूरत के टेक्सटाइल मार्केट में नौकरी भी की।
नौकरी के साथ पूरा किया सपना
काम के बोझ के बीच भी सुरेश ने अपने अफसर बनने के सपने को जीवित रखा। उन्होंने नौकरी करते हुए ही साल 2013 में प्राइवेट माध्यम से अपनी स्नातक (BA) की डिग्री पूरी की। इसके बाद 2014 में वे सिविल सेवा की तैयारी के लिए जयपुर और दिल्ली चले गए। सुरेश की निरंतरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने लगातार चार बार RAS परीक्षा उत्तीर्ण की है। वे साल 2018, 2021, 2023 और अब 2024 में भी चयनित हुए हैं। वर्तमान में वे असिस्टेंट कमिश्नर (GST) के पद पर प्रशिक्षण ले रहे हैं।
पूरे परिवार में खुशी की लहर
छोटे भाई जयंतीलाल ने भी अपनी कड़ी मेहनत से 327वीं रैंक हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया है। इस सफलता में उनकी माता विद्या देवी, बहनों मंजू व टीना, और सुरेश की पत्नी आशा पुरोहित का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके मामा और पूर्व सरपंच उकाराम तवाव ने भी हमेशा दोनों भाइयों का मार्गदर्शन किया। आज रामसीन के ये दोनों बेटे उन सभी के लिए प्रेरणा हैं, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं और उन्हें पूरा करने का दम रखते हैं।