जालोर

जालोर के दो शेर!: जालोर के दो भाई बने अफसर, एक लेफ्टिनेंट दूसरा GST इंस्पेक्टर

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 14 जून 2026, 10:53 दोपहर
एक ही घर के दो सपूतों ने बढ़ाया मान, प्रीतम सिंह बने लेफ्टिनेंट तो संजय सिंह हैं GST ऑफिसर। पूरा जिला करेगा भव्य स्वागत।

जालोर | जब एक ही कोख से जन्मे दो सपूत देश की सेवा में अफसर बन जाएं, तो यह सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए गौरव का क्षण होता है। जालोर की धरती आज ऐसे ही एक ऐतिहासिक पल की गवाह बन रही है, जहाँ दो सगे भाइयों ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता की नई इबारत लिखी है। यह कहानी है बगेड़िया परिवार के दो शेरों की, जिन्होंने जालोर से निकलकर देश की सुरक्षा और प्रशासन में अपना परचम लहराया है।

एक ही घर के दो सितारे: जालोर का गौरव

वरिष्ठ बैंक प्रबंधक राव महेन्द्र सिंह बगेड़िया और श्रीमती मंजू कंवर के घर आज उत्सव का माहौल है। उनके दोनों बेटों ने वो कर दिखाया है, जो मारवाड़ के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। एक भाई सेना की वर्दी में देश की सरहदों की रक्षा करेगा, तो दूसरा प्रशासनिक सेवा में देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूती देगा।

लेफ्टिनेंट प्रीतम सिंह: 41वीं रैंक का पराक्रम

छोटे बेटे प्रीतम सिंह ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए ऑल इंडिया स्तर पर 41वीं रैंक हासिल की है। यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं है।

इसके लिए प्रीतम ने 18 महीनों की बेहद कठिन और अनुशासित ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस ट्रेनिंग में शारीरिक और मानसिक endurance की हर सीमा को परखा जाता है, जिसे पार कर प्रीतम अब एक जांबाज अफसर के रूप में देश सेवा के लिए तैयार हैं।

बड़े भाई संजय सिंह: GST इंस्पेक्टर का रुतबा

वहीं, उनके बड़े भाई संजय सिंह भी किसी से कम नहीं हैं। वह वर्तमान में भारत सरकार के अधीन CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) में कस्टम इंस्पेक्टर / GST ऑफिसर के प्रतिष्ठित पद पर कार्यरत हैं।

देश की आर्थिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस तरह, बगेड़िया परिवार का एक बेटा देश की बाहरी सुरक्षा और दूसरा आंतरिक आर्थिक सुरक्षा की कमान संभाल रहा है।

संघर्ष से शिखर तक: जब सपनों को मिली उड़ान

यह शानदार सफलता रातों-रात नहीं मिली। इसके पीछे सालों का कड़ा संघर्ष, त्याग और अनुशासन छिपा है। दोनों भाइयों की कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।

सिंहों की गोदी में सोए, वो सपूत नहीं डरे,
देश की खातिर जिसने अपने प्राण हथेली पर धरे।
धन्य है वो जालोर की माटी, धन्य बगेड़िया परिवार,
जहाँ एक ही मां की कोख से जनम ले, दो-दो वीर हुए तैयार!

जालोर की गलियों से जयपुर की तपस्या तक

दोनों होनहार भाइयों ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जालोर हाई स्कूल से पूरी की, जहाँ उनके अनुशासित जीवन की नींव पड़ी। स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए जयपुर का रुख किया।

जयपुर में उन्होंने लगभग 4 साल तक एक तपस्वी की तरह जीवन बिताया। सुख-सुविधाओं और ऐशो-आराम से दूर रहकर, उन्होंने दिन-रात सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। यह वही कठोर तपस्या थी, जिसका फल आज पूरा देश देख रहा है।

ननिहाल और परिवार का अटूट समर्थन

इस सफलता में उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान है। पिता राव महेन्द्र सिंह और माता श्रीमती मंजू कंवर ने अपने बच्चों के सपनों पर भरोसा किया और उन्हें हर कदम पर प्रोत्साहित किया। दादी सा श्रीमती इन्द्रा कंवर का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहा।

दोनों भाइयों का ननिहाल भीनमाल के प्रतिष्ठित ओपावत परिवार में है। उनके मामा थान सिंह ओपावत और दशरथ सिंह ओपावत भी अपने भांजों की इस कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे हैं। वहीं, चाचा गणपत सिंह बगेड़िया (मंडल अध्यक्ष, भाजपा) और शंकर सिंह बगेड़िया के लिए भी यह दोहरी खुशी का अवसर है।

राव सिरदार समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण

यह उपलब्धि सिर्फ बगेड़िया परिवार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राव सिरदार समाज के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। प्रीतम सिंह अपने समाज से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने वाले पहले व्यक्ति हैं।

इसी तरह, उनके बड़े भाई संजय सिंह भी समाज के पहले GST ऑफिसर हैं। एक ही परिवार से दो-दो प्रथम श्रेणी के अधिकारियों का निकलना, समाज के युवाओं को नई दिशा और प्रेरणा देगा। यह साबित करता है कि छोटे शहरों और समुदायों के युवा भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं।

जालोर में होगा ऐतिहासिक स्वागत

अब पूरा जालोर शहर अपने वीर सपूत के स्वागत के लिए पलकें बिछाए इंतजार कर रहा है। 18 महीने की कठोर ट्रेनिंग के बाद लेफ्टिनेंट प्रीतम सिंह पहली बार अपनी जन्मभूमि पर कदम रखेंगे। इस पल को यादगार बनाने के लिए भव्य तैयारी की जा रही है।

18 महीने बाद घर वापसी

एक सैनिक के लिए उसकी जन्मभूमि का महत्व सबसे बढ़कर होता है। 18 महीने तक परिवार और घर से दूर रहकर देश सेवा की कठिन ट्रेनिंग लेना किसी तपस्या से कम नहीं। अब जब प्रीतम घर लौट रहे हैं, तो यह क्षण पूरे परिवार और शहर के लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण होगा।

स्वागत समारोह का पूरा कार्यक्रम

लेफ्टिनेंट प्रीतम सिंह के स्वागत के लिए एक भव्य शौर्य रैली का आयोजन किया गया है।

दिनांक: 16 जून 2026

समय: प्रातः 8:00 बजे

स्थान: जालोर रेलवे स्टेशन से एक भव्य रैली के रूप में स्वागत शुरू होगा, जो शुभ स्थल तक जाएगी।

इसके बाद, दोपहर 12:00 बजे से आशीर्वाद समारोह और प्रीतिभोज का आयोजन किया गया है, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिक और परिवारजन शामिल होंगे।

जालोर के इन शेरों को सलाम!

संजय सिंह और प्रीतम सिंह की यह कहानी सिर्फ एक सफलता की दास्तां नहीं, बल्कि यह दृढ़ संकल्प, त्याग और देशभक्ति की मिसाल है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर जुनून और जज्बा हो, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। जालोर के इन दोनों सपूतों को हमारा सलाम, जिन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का मान बढ़ाया है।

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