जालोर

पति की दूसरी शादी, न्याय को भटकती पत्नी: जालोर: जीवित पत्नी के रहते पति ने रचाई दूसरी शादी

गणपत सिंह मांडोली · 26 अप्रैल 2026, 04:59 दोपहर
जालोर की महिला न्याय के लिए भटकती रही और पति ने सिरोही में रचा ली दूसरी शादी।

जालोर | जालोर जिले के बाकरा गांव की एक विवाहिता अपने अधिकार और सुहाग को बचाने के लिए अधिकारियों की चौखट पर न्याय की गुहार लगाती रही।

पीड़िता का आरोप है कि पुलिस की कथित लेट-लतीफी के कारण उसके पति ने उसकी मौजूदगी में ही दूसरी शादी रचा ली।

यह मामला अब सोशल मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक परिवार बिखरने की कगार पर है।

15 साल का रिश्ता और टूटी उम्मीदें

तस्वीरों में अपनी व्यथा सुना रही यह महिला संतोष कंवर है, जिसकी शादी वर्ष 2011 में रमेश सिंह रावणा राजपूत के साथ हुई थी।

पिछले 15 वर्षों के वैवाहिक जीवन में इस दंपत्ति के दो बच्चे भी हुए, लेकिन आज संतोष अपने घर के बजाय दफ्तरों में भटक रही है।

पीड़िता ने बताया कि उसका पति चेन्नई में काम करने गया था, जहां से पैसे आने के बाद उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आ गया।

जैसे-जैसे आर्थिक स्थिति सुधरी, रमेश सिंह के लिए पुराने रिश्तों की अहमियत कम होती गई और उसने संतोष को दरकिनार करना शुरू कर दिया।

संतोष का आरोप है कि उसके जीवित रहते और कानूनी रूप से पत्नी होने के बावजूद पति ने दूसरी शादी की योजना बनानी शुरू की।

उसने समय रहते पुलिस को सूचित किया था कि उसका पति दूसरी शादी करने जा रहा है, लेकिन उसकी शिकायतों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई।

कानूनी आदेश और पुलिस की कार्यप्रणाली

जब स्थानीय थाने से मदद नहीं मिली, तो पीड़िता ने विधिक सेवा प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया, जहां से उसे न्याय की उम्मीद जगी थी।

प्राधिकरण की सचिव सावित्री आनंद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जालोर एसपी और रेवदर सीओ को कार्रवाई के निर्देश दिए।

सचिव ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि इस अवैध विवाह को रोका जाए और पीड़िता को उसका कानूनी अधिकार और सुरक्षा प्रदान की जाए।

हालांकि, पीड़िता का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया और कार्रवाई करने में काफी समय लगा दिया।

इसी देरी का फायदा उठाकर आरोपी पति रमेश सिंह ने सिरोही जिले के रेवदर क्षेत्र के डाक गांव में दूसरी शादी रचा ली।

संतोष का कहना है कि वह सब कुछ अपनी आंखों से देखती रही, लेकिन कानून के रखवालों की सुस्ती ने उसका घर उजाड़ दिया।

आटा-साटा प्रथा और बिखरते परिवार

यह मामला केवल एक पति-पत्नी के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक कुरीतियों का भी एक गहरा पहलू शामिल है।

पीड़िता के अनुसार, उनके परिवार में 'आटा-साटा' प्रथा के तहत रमेश की बहन की शादी संतोष के भाई के साथ की गई थी।

अब इस विवाद के कारण वह लड़की भी अपने ससुराल से अलग होकर अपने पीहर में बैठ गई है, जिससे दो घर बर्बाद हो रहे हैं।

इस स्थिति में दोनों परिवारों के मासूम बच्चे अपने माता-पिता के प्यार और साये से दूर होने को मजबूर हो गए हैं।

"मैंने पुलिस से बार-बार गुहार लगाई कि मेरे पति दूसरी शादी करने जा रहे हैं, लेकिन मेरी बात को अनसुना कर दिया गया।" - संतोष कंवर

पीड़िता के भाई ने भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय पर कार्रवाई होती तो आज यह नौबत नहीं आती।

पड़ोसी गांव के निवासी विक्रम सिंह ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए इसे पुलिस और प्रशासन की बड़ी विफलता करार दिया है।

न्याय की मांग और प्रशासनिक सवाल

फिलहाल पीड़िता न्याय की मांग को लेकर अडिग है और उसने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की अपील की है।

इस मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब जिले के उच्च अधिकारियों को देना होगा।

क्या समय रहते उठाए गए कदम एक परिवार को टूटने से बचा सकते थे? यह सवाल अब पूरे क्षेत्र में गूंज रहा है।

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