जालोर | जिले में बिजली कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। भारतीय मजदूर विद्युत श्रमिक संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे।
क्या हैं बिजली कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
विद्युत श्रमिक संघ ने विभागीय अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कार्यप्रणाली और सुविधाओं में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
शिफ्ट और ड्यूटी से जुड़ी समस्याएं
संघ की एक प्रमुख मांग 'फीडर इंचार्ज' जैसे काल्पनिक पदनाम को खत्म कर शिफ्ट के अनुसार ड्यूटी लगाने की है। उन्होंने कहा कि देबावास सब-स्टेशन पर कर्मचारियों के लिए ठहरने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है, जिसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि विभिन्न कार्यालयों में काम कर रहे तकनीकी कर्मचारियों को फील्ड और सब-स्टेशनों पर तैनात किया जाए ताकि जमीनी स्तर पर काम सुचारू रूप से चल सके।
स्मार्ट मीटर और बिलिंग की चुनौतियां
कर्मचारियों ने बताया कि स्मार्ट मीटर समय पर अपडेट नहीं हो रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के साथ उनके संबंध खराब हो रहे हैं। उन्हें अक्सर लोगों के गुस्से और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ता है।
संघ ने मांग की है कि स्मार्ट मीटर के काम में लगे कर्मचारियों को फील्ड में लगाया जाए और रीडिंग लेने वाले कर्मचारियों को उपभोक्ताओं की संख्या के आधार पर समान काम दिया जाए।
इसके अलावा, खराब गुणवत्ता वाले बिलिंग प्रिंटर के कारण बिलिंग का काम भी प्रभावित हो रहा है, जिसके लिए बेहतर प्रिंटर उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप
कर्मचारियों ने सहायक अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब भी कोई कर्मचारी अपनी समस्याएं उठाता है, तो उसका तबादला कर दिया जाता है ताकि उस पर दबाव बनाया जा सके।
संघ ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर 24 घंटे ड्यूटी करने का दबाव डाला जाता है और अतिरिक्त काम के बदले ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं किया जाता।
संघ ने कहा, "दीपावली पर पिछले दो वर्षों से लंबित ओवरटाइम का भुगतान तुरंत किया जाए। अगर तीन दिनों में हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हम सहायक अभियंता कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।"
कर्मचारियों ने सूरजपोल पावर हाउस का भी मुद्दा उठाया, जहां दो कर्मचारियों से 12-12 घंटे की ड्यूटी कराई जा रही है, जो नियमों के खिलाफ है। वहां अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग की गई है।
संघ के इस कड़े रुख के बाद अब गेंद विभागीय अधिकारियों के पाले में है। देखना यह होगा कि प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाता है, या फिर शहर को एक बड़े विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ेगा।
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