जालोर | राजस्थान के जालोर जिले में एक मां की ममता और न्याय के लिए उसके अटूट संघर्ष ने आखिरकार प्रशासन को झुकने और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने पर मजबूर कर दिया। माण्डोली के बहुचर्चित गणपत सिंह हत्याकांड में जालोर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह खुलासा मृतक की मां द्वारा किए गए 18 दिनों के कड़े अनशन के बाद हुआ है, जिसने पूरे क्षेत्र में न्याय की गूंज पैदा कर दी थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि इस हत्याकांड की असली वजह अवैध संबंधों से जुड़ी ब्लैकमेलिंग थी।
मां का अनशन लाया रंग, हत्या का खुलासा: जालोर: मां के 18 दिन के अनशन की जीत, गणपत सिंह हत्याकांड का पर्दाफाश, 3 गिरफ्तार
जालोर पुलिस ने बहुचर्चित गणपत सिंह हत्याकांड को सुलझाते हुए एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मृतक की मां ने न्याय के लिए 18 दिनों तक अनशन किया था, जिसके बाद पुलिस ने अवैध संबंधों और ब्लैकमेलिंग से जुड़े इस मामले का खुलासा किया।
HIGHLIGHTS
- गणपत सिंह हत्याकांड में एक महिला समेत 3 आरोपी गिरफ्तार। न्याय के लिए मृतक की मां ने किया था 18 दिनों का अनशन। अवैध संबंधों और ब्लैकमेलिंग के चलते की गई थी हत्या। एएसपी भूपेन्द्र सिंह की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों से सुलझाई गुत्थी।
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लापता होने से शव मिलने तक का घटनाक्रम
इस सनसनीखेज वारदात की शुरुआत 27 अगस्त 2024 को हुई थी। गणपत सिंह शाम करीब 7:30 बजे अपनी दुकान से मोटरसाइकिल लेकर निकला था, लेकिन वह रात भर घर नहीं लौटा। चिंतित परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन, 28 अगस्त को माण्डोली सरहद में कोलाया नाडा की ओर जाने वाली ग्रेवल सड़क पर गणपत सिंह का शव बरामद हुआ। उसकी मोटरसाइकिल भी पास ही पड़ी थी। शव को देखकर साफ पता चल रहा था कि उस पर धारदार हथियारों और भारी वस्तु से हमला कर बेरहमी से हत्या की गई थी। इस मामले में मृतक के भाई कल्याण सिंह ने रामसीन थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मां का 18 दिन का अनशन और जन आक्रोश
हत्याकांड के कई दिनों बाद भी जब पुलिस के हाथ खाली रहे, तो मृतक की बूढ़ी मां ने न्याय के लिए अनशन शुरू कर दिया। 18 दिनों तक अन्न-जल त्याग कर बैठी मां की हालत बिगड़ने लगी, जिससे स्थानीय लोगों और समाज में भारी आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता और बढ़ते दबाव को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह इन्दोलिया ने जांच की कमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेन्द्र सिंह को सौंपी। इसके बाद पुलिस ने अपनी जांच की दिशा बदली और तकनीकी साक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया।
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अवैध संबंध और ब्लैकमेलिंग का खेल
पुलिस की गहन पूछताछ और कॉल डिटेल के विश्लेषण से चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि इस हत्या के पीछे अवैध संबंध और ब्लैकमेलिंग मुख्य कारण थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गजेन्द्र सिंह, वागाराम और श्रीमती लच्छु देवी शामिल हैं। इन तीनों ने मिलकर गणपत सिंह को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी। पुलिस के अनुसार, गणपत सिंह आरोपियों को ब्लैकमेल कर रहा था, जिससे तंग आकर उन्होंने उसकी हत्या कर दी।
पुलिस की रणनीति और सफलता
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेन्द्र सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने संदिग्धों पर गोपनीय निगरानी रखी और उनके मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल का गहराई से विश्लेषण किया। इन्हीं प्रयासों से पुलिस असली गुनहगारों तक पहुंचने में सफल रही। इस खुलासे के बाद ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। मां का अटूट विश्वास और पुलिस की मेहनत ने अंततः सत्य की जीत सुनिश्चित की है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही है।
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