राजस्थान

जालोर: म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के?—झाक की बेटियों ने हॉकी में रचा इतिहास

गणपत सिंह मांडोली · 07 अक्टूबर 2026, 10:39 दोपहर
‘दंगल’ का डायलॉग सुना होगा, झाक की बेटियों ने हॉकी के मैदान में कर दिखाया; जिला स्तर पर लगातार 11वीं बार चैंपियन, जीत पर डीजे के साथ निकला जुलूस, बेटियों संग नाचीं मांएं

जालोर। “म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के?”—यह डायलॉग फिल्म ‘दंगल’ का तो सुना ही होगा, लेकिन राजस्थान के जालोर जिले के झाक गांव की बेटियों ने इसे हॉकी के मैदान में सच कर दिखाया है। कभी गांव की एक भी बेटी हॉकी नहीं खेलती थी, आज यही बेटियां जिला स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता में लगातार 11वीं बार चैंपियन बनकर लौटी हैं। बेटियों की इस उपलब्धि पर मंगलवार को पूरे गांव में जश्न का माहौल रहा। ग्रामीणों ने डीजे के साथ विजय जुलूस निकाला, वहीं खिलाड़ियों की मांएं भी अपनी बेटियों के साथ खुशी से नाचती नजर आईं।

करीब 400 घरों वाले झाक गांव की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय झाक की बालिका टीम ने 70वीं जिला स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता में 11वां खिताब अपने नाम किया। वहीं छात्र वर्ग की टीम भी जिला स्तर पर प्रथम रही और सातवीं बार विजेता बनी। जीत के बाद खिलाड़ियों के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। खिलाड़ियों को सम्मानित कर पुरस्कार दिए गए और उनके हौसले को बढ़ाया गया।

2012 में पहली बार थामी हॉकी स्टिक, 2016 से लगातार जीत

झाक गांव में हॉकी की यह कहानी करीब 14 साल पहले शुरू हुई। वर्ष 2012 से पहले गांव की किसी बेटी ने हॉकी नहीं खेली थी। इसी दौरान शिक्षक राजेंद्र सिंह मांडोली ने शारीरिक शिक्षक की जिम्मेदारी संभालते हुए बालिकाओं को हॉकी का अभ्यास करवाना शुरू किया।

शुरुआत में संसाधन सीमित थे, लेकिन बेटियों की मेहनत और शिक्षक के प्रयासों से धीरे-धीरे गांव में हॉकी की पहचान बनती गई। वर्ष 2016 से 2026 तक झाक की बालिका टीम जिला स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता में लगातार विजेता रही। इस दौरान जिले की कोई भी टीम झाक की बेटियों को खिताब से दूर नहीं कर सकी।

200 से ज्यादा बेटियां जिला स्तर पर खेलीं, 100 से अधिक राज्य स्तर तक पहुंचीं

शिक्षक राजेंद्र सिंह मांडोली के अनुसार झाक स्कूल की 200 से अधिक बालिकाएं जिला स्तर पर हॉकी खेल चुकी हैं, जबकि 100 से अधिक बालिकाएं राज्य स्तर तक पहुंच चुकी हैं।

इस वर्ष केकड़ी-अजमेर में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में झाक के 14 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इनमें 8 छात्राएं और 6 छात्र शामिल रहे। लगातार मिल रही सफलता के बाद अब गांव की बेटियों का लक्ष्य राज्य स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना है।

बेटियों की जीत पर मांएं भी नाचीं

झाक में बेटियों की जीत का जश्न सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहा। जब खिलाड़ी जीत के बाद गांव पहुंचीं तो उनके स्वागत में ग्रामीणों ने डीजे के साथ विजय जुलूस निकाला। इस दौरान खिलाड़ियों की मांएं भी अपनी बेटियों की उपलब्धि पर भावुक नजर आईं और डीजे की धुन पर उनके साथ नृत्य करने लगीं।

मांओं के चेहरे पर खुशी और बेटियों के हाथों में हॉकी स्टिक गांव में बदलती सोच की तस्वीर दिखा रही थी। जिन बेटियों ने कभी हॉकी का नाम तक नहीं सुना था, उन्हीं बेटियों ने अब लगातार 11 जिला खिताब जीतकर गांव को हॉकी की पहचान दिला दी है।

अब राष्ट्रीय स्तर की तैयारी, लेकिन सुविधाओं की कमी चुनौती

लगातार जिला स्तर पर सफलता हासिल करने के बाद झाक की बेटियों के सामने अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की चुनौती है। हालांकि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाओं के लिए अभी भी सीमित संसाधनों में अभ्यास करना पड़ रहा है।

जिले में हॉकी के लिए बेहतर सुविधाओं और एकेडमी की कमी खिलाड़ियों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके बावजूद खिलाड़ी मैदान पर लगातार पसीना बहा रही हैं।
यद्यपि 2020 में शा. शि. का पद भर गया और श्रीमती नीलम की शा. शि. की नियुक्ति इस विद्यालय में हुई परंतु अभी भी अध्यापक राजेंद्र सिंह शा. शि. नीलम के साथ छात्रों को हॉकी का अभ्यास करवाते है विद्यालय समय और विद्यालय समय के बाद दोनों खेल मैदान में उपस्थित रहते है l

पिछले वर्ष विधायक डॉ. समरजीत सिंह ने स्कूल में हॉकी किट उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। खिलाड़ियों और ग्रामीणों को उम्मीद है कि उन्हें बेहतर खेल सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध होगा, जिससे झाक की बेटियां जिला और राज्य स्तर की सफलता के बाद राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना परचम लहरा सकेंगी।

14 साल पहले जिस गांव में एक भी बेटी हॉकी नहीं खेलती थी, आज उसी गांव की बेटियां लगातार 11 बार जिला चैंपियन हैं। झाक की बेटियों की यह कहानी सिर्फ खेल की जीत नहीं, बल्कि गांव की बेटियों के बदलते हौसले और सपनों की कहानी भी है।

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