जालोर | जालोर जिले में इन दिनों स्कूली बच्चों को भविष्य के खतरों से बचाने के लिए एक अनूठी पहल की जा रही है। मंगलवार को जिले की विभिन्न अदालतों के न्यायाधीश खुद शिक्षक बनकर स्कूलों में पहुंचे।
विधिक जागरूकता अभियान के तहत जिले के कुल 8 प्रमुख स्कूलों में विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को साइबर सुरक्षा की बारीकियां समझाना और उन्हें ऑनलाइन दुनिया के खतरों के प्रति सतर्क करना था।
जालोर: स्कूलों में साइबर सुरक्षा अभियान: जालोर में जजों ने संभाली क्लास: स्कूली बच्चों को सिखाए साइबर सुरक्षा के गुर, सोशल मीडिया के खतरों से रहने को कहा सावधान
जालोर के 8 स्कूलों में न्यायाधीशों ने छात्रों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए।
HIGHLIGHTS
- जालोर के 8 स्कूलों में जजों ने बच्चों को साइबर सुरक्षा की बारीकियां समझाईं।
- जजों ने सोशल मीडिया के खतरों, डिजिटल अरेस्ट और साइबर बुलिंग पर विस्तार से चर्चा की।
- डिलीट किया गया डेटा भी सर्वर पर मौजूद रहता है, जिससे भविष्य में खतरा हो सकता है।
- साइबर फ्रॉड होने पर डरे नहीं, तुरंत पुलिस और परिजनों को सूचित करने की सलाह दी गई।
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जजों ने सिखाया सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग
फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश अमर वर्मा सुबह-सुबह शांतिनगर स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने बच्चों को मोबाइल की लत से होने वाले नुकसानों के बारे में विस्तार से बताया।
जज वर्मा ने बच्चों को चेताया कि सोशल मीडिया पर अजनबियों से बात करना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने साइबर बुलिंग और हाल ही में चर्चा में आए 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे गंभीर विषयों पर छात्रों को जानकारी दी।
उन्होंने बच्चों से कहा कि वे तकनीक का उपयोग अपनी पढ़ाई और ज्ञान बढ़ाने के लिए करें, न कि केवल मनोरंजन के लिए। इस दौरान स्कूल के प्रधानाचार्य और पूरा स्टाफ भी जजों की बातों को ध्यान से सुनता नजर आया।
डिलीट किया हुआ डेटा भी बन सकता है मुसीबत
राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल (गौडिजी) में एसीजेएम-1 राजेन्द्र सिंह चारण ने छात्राओं के बीच पहुंचकर संवाद किया। उन्होंने आजकल के युवाओं में रील बनाने और देखने की बढ़ती लत पर चिंता व्यक्त की।
न्यायाधीश चारण ने एक बहुत महत्वपूर्ण तकनीकी तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर एक बार जो डेटा डाल दिया जाता है, वह हमेशा के लिए वहां रह जाता है।
अगर आप अपने फोन से कोई तस्वीर या वीडियो डिलीट भी कर देते हैं, तो भी वह सर्वर पर मौजूद रह सकता है। भविष्य में इसका दुरुपयोग किया जा सकता है, इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कुछ भी साझा करने से पहले सावधानी बरतें।
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डरें नहीं, तुरंत पुलिस को दें सूचना
विद्या भारती उच्च माध्यमिक विद्यालय में न्यायाधीश गजेन्द्र कुमार ने बच्चों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने छात्रों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि यदि वे या उनके परिवार का कोई सदस्य साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो घबराएं नहीं। डरने के बजाय तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराएं।
साइबर अपराधियों का मुकाबला सूचना और जागरूकता से ही किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे अपने घर जाकर अपने माता-पिता और भाई-बहनों को भी इन बातों के बारे में जरूर बताएं।
इन स्कूलों में भी गूंजी जागरूकता की गूंज
जिले के अन्य स्कूलों में भी यह अभियान पूरी सक्रियता के साथ चलाया गया। पॉक्सो कोर्ट की न्यायाधीश सीमा जुनेजा ने प्रताप चौक स्थित राजकीय बालिका विद्यालय में छात्राओं को संबोधित किया।
विधिक सेवा प्राधिकरण के जिला सचिव अहसान अहमद ने राजेंद्र नगर स्कूल में अपनी सेवाएं दीं। सीजेएम प्रिया टावरी ने ईम्मानुअल स्कूल में बच्चों को कानून और डिजिटल सुरक्षा की जानकारी दी।
वहीं, एसीजेएम-2 अंकित दवे ने सेफ फोर्ड स्कूल में छात्र-छात्राओं के साथ संवाद किया। जजों की इस पहल से स्कूली बच्चों में साइबर सुरक्षा को लेकर एक नई चेतना देखने को मिली है।
साइबर सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी टिप्स:
- सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी जैसे पता या फोन नंबर साझा न करें।
- किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, यह हैकिंग का जरिया हो सकता है।
- अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मजबूत पासवर्ड लगाएं और समय-समय पर बदलते रहें।
- अगर कोई ऑनलाइन परेशान करे, तो तुरंत अपने शिक्षकों या माता-पिता को बताएं।
इस प्रकार के अभियान जालोर में बच्चों को डिजिटल युग के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।