जालोर | नगर परिषद चुनाव को लेकर जालोर शहर में माहौल काफी चर्चाओं से भरा हुआ है। नामांकन वापसी के अंतिम दिन के बाद अब चुनावी तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है, लेकिन कई वार्डों में समीकरण उलझ गए हैं।
दोनों प्रमुख पार्टियां, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), वोटों का नुकसान करने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने समर्थन में लाने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं। जालोर शहर के कई वार्डों में मुकाबले काफी रोचक होने की उम्मीद है, क्योंकि कहीं भाजपा की स्थिति कमजोर है तो कहीं कांग्रेस के लिए सीट निकालना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रमुख वार्डों के चुनावी समीकरण
जालोर नगर परिषद के कुछ वार्ड ऐसे हैं, जहां के चुनावी समीकरणों को लेकर शहर में चर्चाएं तेज हैं। इन वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार और भितरघात की आशंका ने दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है।
वार्ड संख्या 37: भाजपा प्रत्याशी का बहिष्कार
वार्ड संख्या 37 में निर्दलीय प्रत्याशी कमलेश कुमार का नामांकन खारिज होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अब यहां की कुछ गलियों में भाजपा प्रत्याशी दिनेश महावर का बहिष्कार किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर बाकायदा पोस्टर वायरल करके गलत तरीके से नामांकन खारिज करवाने का आरोप लगाया जा रहा है। यह उल्लेखनीय है कि दिनेश महावर को विधायक जोगेश्वर गर्ग का करीबी माना जाता है।
इस वार्ड से कांग्रेस ने मोहनलाल माली को अपना उम्मीदवार बनाया है। कमलेश कुमार एक समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं और वार्ड समेत शहर की समस्याओं को लेकर नगर परिषद और विधायक गर्ग का विरोध करते रहे हैं। माना जा रहा है कि कमलेश कुमार का नामांकन खारिज होने का नुकसान भाजपा प्रत्याशी महावर को होगा, जिससे कांग्रेस को सीधा फायदा मिल सकता है।
वार्ड संख्या 33: सभापति पद के उम्मीदवार मैदान में
वार्ड संख्या 33 में भाजपा ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी जयसिंह नाहरनाड़ी को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने एडवोकेट पवन दवे पर अपना दांव खेला है।
यहां से भाजपा के पूर्व उप सभापति अंबालाल व्यास का टिकट काटा गया है, जिससे ब्राह्मण समाज में भाजपा के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। हालांकि, अंतिम समय में समीकरण क्या बनते हैं, यह आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा।
इस वार्ड में कांटे की टक्कर की उम्मीद है। यदि भाजपा के जयसिंह यहां से जीतते हैं, तो यह लगभग तय है कि उन्हें सभापति पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा।
वार्ड नंबर 34: विधायक के वार्ड में भितरघात का खतरा
जालोर नगर परिषद का वार्ड संख्या 34 विधायक जोगेश्वर गर्ग का अपना वार्ड है। यहां से विधायक गर्ग, जिला महामंत्री गजेंद्रसिंह सिसोदिया को टिकट देने पर अड़े हुए थे।
लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी के नेता रामकुमार भूतड़ा के बेटे श्रीकांत भूतड़ा उन पर भारी पड़े और आखिरकार टिकट श्रीकांत भूतड़ा को ही मिला। यहां कांग्रेस के पुखराज माली उनके सामने हैं।
इस क्षेत्र में माली वोटों की अधिकता के कारण भाजपा को थोड़ी मुश्किल हो सकती है। इसके साथ ही, श्रीकांत भूतड़ा को भाजपा की भितरघात का भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। यदि भूतड़ा जीतते हैं, तो वे भी सभापति पद के एक प्रमुख दावेदार होंगे।
वार्ड 4: नागरिक बैंक के पूर्व अध्यक्ष की साख दांव पर
भाजपा ने वार्ड संख्या 4 से नागरिक बैंक के पूर्व अध्यक्ष नितिन सोलंकी को टिकट दिया है। हालांकि, कहा जा रहा है कि इस वार्ड में नितिन की न तो मजबूत पकड़ है और न ही कोई विशेष पहचान। ऐसे में नितिन के लिए यहां अपनी साख दांव पर लगी है।
वहीं, कांग्रेस ने स्थानीय निवासी दिलीप सुंदेशा को टिकट दिया है, जिससे उन्हें स्थानीय होने का लाभ मिल सकता है। नितिन भी भाजपा से सभापति पद के प्रबल दावेदारों की सूची में शामिल हैं, लेकिन उनके लिए यह सीट निकालना एक बड़ी चुनौती बन गया है। यहां मौजूद निर्दलीय उम्मीदवार भी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
वार्ड संख्या 7: कांग्रेस-बीजेपी दोनों के लिए चुनौती
वार्ड संख्या 7 से कांग्रेस ने विनोद कुमार को टिकट दिया है, जबकि भाजपा ने अचलसिंह परिहार को मैदान में उतारा है। यहां पिछले चुनाव में निर्दलीय के तौर पर कड़ी टक्कर देने वाले किशोर बोराणा इस बार भी मैदान में हैं।
यहां कांग्रेस के गलत टिकट वितरण की भी चर्चाएं हैं। वहीं, एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार पप्पु देवी भी समीकरण बिगाड़ने की क्षमता रखती हैं। भाजपा के अचलसिंह परिहार वार्ड में अपनी पकड़ बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने कई चुनौतियां हैं।
वार्ड संख्या 15: युवा चेहरों में टक्कर, निर्दलीय बिगाड़ेंगे खेल
वार्ड संख्या 15 से भाजपा ने मनीष कुमार को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने लक्ष्मीकांत दवे को मैदान में उतारा है। दोनों ही युवा चेहरे हैं, लेकिन यहां निर्दलीय उम्मीदवार मामले को उलझा रहे हैं।
इस वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने से मुकाबला काफी रोचक हो गया है। यदि भाजपा के मनीष कुमार यहां से जीतते हैं, तो वे भी सभापति पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं।
आगे की राह
कुल मिलाकर, जालोर में ऐसे कई वार्ड हैं जहां भाजपा कमजोर है, तो कहीं कांग्रेस। कहीं निर्दलीय भारी पड़ रहे हैं, तो कहीं सीधी टक्कर है। नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन के बाद अब स्थितियां दिन-ब-दिन स्पष्ट होती जाएंगी। अब देखना यह है कि मतदान से पहले तक कौन सा प्रत्याशी कितनी पकड़ बना पाता है और कितना डैमेज कंट्रोल कर पाता है। अंत में जनता किस पर विश्वास जताएगी, यह तो भविष्य ही बताएगा।
*Edit with Google AI Studio