राजस्थान

जालोर नगर परिषद फर्जीवाड़ा गिरफ्तार: जालोर नगर परिषद में फर्जी नियुक्तियों का बड़ा खुलासा: संस्थापन प्रभारी गिरफ्तार, आयुक्त की मोहर का किया गलत इस्तेमाल

thinQ360 · 08 अप्रैल 2026, 12:40 दोपहर
जालोर नगर परिषद में सरकारी नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने संस्थापन प्रभारी हीरालाल को गिरफ्तार किया है, जो ठग राकेश के साथ मिलकर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करता था।

जालोर | राजस्थान के जालोर जिले से भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जालोर नगर परिषद में फर्जी नियुक्तियां जारी करने के बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में पुलिस ने नगर परिषद के संस्थापन प्रभारी हीरालाल को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

जांच में यह सामने आया है कि हीरालाल ने एक शातिर ठग राकेश के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। हीरालाल ने राकेश के कहने पर करीब 7 से 8 लोगों को परिषद में फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए थे। यह नियुक्तियां पूरी तरह से अवैध थीं और इनका नगर परिषद के रिकॉर्ड में कोई वजूद नहीं था।

लाखों की वसूली का खेल

पुलिस की पूछताछ में एक पीड़ित लालाराम ने इस पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली का खुलासा किया है। लालाराम ने बताया कि राकेश ने उसे सरकारी नौकरी का झांसा देकर उसके नाम का एक नियुक्ति पत्र दिया था। इस फर्जी नियुक्ति पत्र के बदले राकेश ने लालाराम से 3.50 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली थी।

आयुक्त की मोहर का दुरुपयोग

जांच में यह भी पता चला है कि राकेश यह फर्जी नियुक्ति पत्र सीधे हीरालाल से प्राप्त करता था। हीरालाल के पास परिषद के आयुक्त की आधिकारिक मोहर रहती थी, जिसका उसने गलत फायदा उठाया। वह खाली पत्रों पर आयुक्त की मोहर लगाकर उन्हें राकेश को सौंप देता था, जिसे बाद में राकेश भरता था।

फर्जी हस्ताक्षर और ठगी का तरीका

मोहर लगने के बाद राकेश उन पत्रों पर खुद ही हस्ताक्षर कर देता था और भोले-भले लोगों को सौंप देता था। हीरालाल ने पुलिस के सामने स्वीकार किया है कि उसने अब तक 7 से 8 ऐसे फर्जी लेटर जारी किए हैं। पुलिस अब उन सभी लोगों की तलाश कर रही है जिन्हें ये फर्जी पत्र दिए गए थे।

सरकारी भवन बना ठगी का अड्डा

हैरानी की बात यह है कि जिस नगर परिषद भवन में राकेश अपना अवैध कार्यालय चला रहा था, उसका चार्ज हीरालाल के पास था। नगर परिषद प्रशासन ने दो बार इस पुराने भवन पर ताले भी लगवाए थे ताकि कोई अवैध गतिविधि न हो। लेकिन शातिर ठग राकेश ने हर बार ताले तोड़ दिए और दोबारा वहां बैठकर अपना काम शुरू कर दिया।

संस्थापन प्रभारी की संदिग्ध चुप्पी

भवन के ताले टूटने के बावजूद हीरालाल ने न तो अपने उच्च अधिकारियों को इसकी कोई लिखित सूचना दी। न ही उसने पुलिस थाने में इस अवैध घुसपैठ और तोड़फोड़ की कोई रिपोर्ट दर्ज करवाई। उसकी यह चुप्पी साफ तौर पर उसकी संलिप्तता और ठग राकेश के साथ उसकी मिलीभगत को दर्शाती है।

दिखावे की शिकायतें और असली खेल

हीरालाल ने तत्कालीन आयुक्त दिलीप माथुर से थानाधिकारी के नाम दो बार शिकायत पत्र जरूर लिखवाए थे। लेकिन जांच में पाया गया कि उसने ये पत्र कभी पुलिस थाने में जमा ही नहीं कराए। यह केवल अधिकारियों को गुमराह करने और खुद को बचाने के लिए रची गई एक सोची-समझी साजिश थी।

पुलिस की भूमिका पर भी सवाल

इस पूरे प्रकरण में कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों की भूमिका भी अब संदेह के घेरे में आ गई है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अब इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या किसी पुलिसकर्मी ने इन्हें संरक्षण दिया था। यदि किसी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बेरोजगार युवाओं के साथ खिलवाड़

राजस्थान में सरकारी नौकरियों के नाम पर होने वाली यह ठगी युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है। जालोर का यह मामला बताता है कि कैसे विभाग के अंदर बैठे लोग ही सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपनी जमा-पूंजी इन ठगों के हवाले कर देते हैं और अंत में उनके हाथ कुछ नहीं आता।

कानूनी कार्रवाई और कोर्ट पेशी

पुलिस ने हीरालाल को गिरफ्तार करने के बाद उसके पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए हैं। उसे बुधवार को स्थानीय न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी रिमांड की मांग करेगी। रिमांड के दौरान इस गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की कुल राशि के बारे में और भी खुलासे होने की उम्मीद है।

नगर परिषद में हड़कंप का माहौल

संस्थापन प्रभारी की गिरफ्तारी के बाद नगर परिषद जालोर के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। आयुक्त ने इस मामले में आंतरिक जांच के भी आदेश दिए हैं ताकि अन्य फाइलों की भी पड़ताल की जा सके। यह भी देखा जा रहा है कि क्या हीरालाल ने अन्य विभागों या टेंडरों में भी इसी तरह की हेराफेरी की है।

जनता के लिए पुलिस की अपील

जालोर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के झांसे में आकर सरकारी नौकरी के लिए पैसे न दें। सरकारी नियुक्तियां केवल आधिकारिक चयन प्रक्रियाओं और विज्ञापनों के माध्यम से ही की जाती हैं। यदि किसी व्यक्ति को ऐसे फर्जी नियुक्ति पत्र मिले हैं, तो वह तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में संपर्क करे।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हीरालाल जैसे कर्मचारी प्रशासनिक व्यवस्था पर एक धब्बा हैं और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। जालोर नगर परिषद का यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

भविष्य की जांच की दिशा

पुलिस अब राकेश की तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही है जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है। राकेश की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस ठगी का जाल कितने जिलों तक फैला हुआ था। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह के तार राजस्थान के अन्य नगर निकायों से भी जुड़े हो सकते हैं।

निष्कर्ष और चेतावनी

यह घटना प्रशासन के लिए एक सबक है कि उसे अपने अंदरूनी सिस्टम और मोहरों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। आम नागरिक भी सतर्क रहें और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के बजाय इसकी सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। जालोर पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से जनता में कानून के प्रति विश्वास फिर से बहाल हुआ है।

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