जालोर | शहर के वीर-वीरमदेव महाविद्यालय में सुबह 8 बजे से चल रही 40 वार्डों की मतगणना पूरी हो चुकी है। इन नतीजों ने जालोर में सत्ता की तस्वीर तो काफी हद तक साफ कर दी है, लेकिन अंतिम 'खेल' अब भी निर्दलीयों के हाथ में है।
जालोर निकाय चुनाव: नतीजों का पूरा विश्लेषण
अंतिम नतीजों में कांग्रेस ने 19 वार्डों में जीत हासिल की है, जबकि भाजपा को 14 वार्डों में संतोष करना पड़ा है।
वहीं, 7 वार्डों में अन्य (निर्दलीय) उम्मीदवारों ने बाजी मारी है, जो अब शहर की सत्ता में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
किसके सिर सजेगा ताज? निर्दलीय तय करेंगे
जालोर नगर परिषद में बहुमत का जादुई आंकड़ा 21 है। कांग्रेस, जो 19 सीटें जीत चुकी है, इस आंकड़े से मात्र 2 कदम दूर है।
कांग्रेस को अपना बोर्ड बनाने के लिए सिर्फ 2 निर्दलीयों के समर्थन की आवश्यकता है। इसे देखते हुए पार्टी की राह थोड़ी आसान लग रही है।
भाजपा के लिए मुश्किल डगर
दूसरी ओर, 14 सीटें जीतने वाली भाजपा के लिए राह बेहद मुश्किल है। भाजपा को सत्ता में आने के लिए सभी सातों निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करना होगा।
इन निर्दलीय पार्षदों में से ज्यादातर बागी उम्मीदवार हैं, जिन्हें अपने पाले में लाना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
आगे की रणनीति
कांग्रेस बहुमत के बेहद करीब होने के कारण उत्साह में है। पार्टी ने बाड़ेबंदी या निर्दलीयों से संपर्क साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
वहीं, भाजपा भी अंदरखाने समीकरण बिठाने की कोशिशों में जुटी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ये 7 निर्दलीय पार्षद किस करवट बैठते हैं और जालोर की सत्ता की चाबी किसे सौंपते हैं।
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