जालोर | राजस्थान के जालोर में शिवसेना और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। दोनों दलों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर अलग-अलग ज्ञापन सौंपे और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
शिवसेना का हल्ला बोल: हत्या से लेकर खनन तक के मुद्दे
शिवसेना ने जिला अध्यक्ष रूपराज पुरोहित के नेतृत्व में कई गंभीर मामलों पर प्रशासन का ध्यान खींचा। इसमें प्रमुख रूप से अमृत देवासी हत्या प्रकरण, भूमि पर अवैध कब्जा और जवाई नदी में अवैध बजरी खनन के मुद्दे शामिल थे।
न्याय के लिए मां की गुहार
मृतक अमृत देवासी की मां रतीदेवी ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे का शव मिले लगभग तीन साल हो गए हैं, लेकिन पुलिस अब तक मामले का खुलासा नहीं कर पाई है।
मृतक की मां ने कहा, "27 जून 2023 को मेरा बेटा लापता हुआ था और अगले दिन उसका शव मिला। आज तक हमें न्याय नहीं मिला है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि शव के पास मिले मोबाइल की फॉरेंसिक रिपोर्ट तक आज तक नहीं आई है, जो जांच में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
फर्जी दस्तावेजों से जमीन पर कब्जा
एक अन्य मामले में, बैरठ गांव की नेहा राजपुरोहित ने बताया कि उनके नाम से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर उनकी जमीन और प्लॉट हड़प लिए गए।
उन्होंने बताया कि बागरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराए 9 महीने बीत चुके हैं, लेकिन कोई प्रभावी जांच नहीं हुई। शिवसेना ने इस मामले में दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
जवाई नदी में अवैध खनन
शिवसेना जिला प्रमुख रूपराज पुरोहित ने जवाई नदी में हो रहे अवैध बजरी खनन का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजरी माफिया 3 मीटर की लीज सीमा के बजाय 17 से 20 फीट तक गहरी खुदाई कर रहे हैं, जिससे नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है और किसानों के कुओं का जलस्तर गिर रहा है।
बसपा ने भी बुलंद की आवाज
दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी ने भी जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश मेघवाल के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। बसपा ने बढ़ती महंगाई और शहर की मूलभूत समस्याओं पर सरकार को घेरा।
शहर की बदहाली पर प्रशासन को घेरा
बसपा कार्यकर्ताओं ने सुन्देलाव तालाब में जा रहे सीवरेज के गंदे पानी, खराब सीवरेज व्यवस्था, जर्जर सड़कों और अनियमित पेयजल आपूर्ति जैसे मुद्दों पर जालोर सीओ को ज्ञापन सौंपा।
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे।
दोनों दलों के प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर शिकायतों पर कब और क्या कार्रवाई करता है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और शहरवासियों को राहत।
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