दिल्ली | जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की दीवारों पर 'फ्री कश्मीर' के नारे लिखे जाने पर सियासत गरमा गई है। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस पूरे मामले पर कड़ी आपत्ति जताई है।
संजय सरावगी ने स्पष्ट रूप से कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा।
जामिया में नारों पर बीजेपी का कड़ा रुख
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की दीवारों पर 'फ्री कश्मीर' लिखना देश विरोधी तत्वों की मंशा को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि दंगा आरोपी शरजील इमाम के समर्थन में नारेबाजी करना छात्रों की आड़ में अलगाववाद को बढ़ावा देने की कोशिश है।
उन्होंने आगे कहा कि देश में किसी भी प्रकार की अलगाववादी सोच को कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राहुल गांधी की रैली पर उठाए गंभीर सवाल
इस दौरान संजय सरावगी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) द्वारा राहुल गांधी की रैली स्थगित करने की मांग पूरी तरह जायज है।
बीजेपी अध्यक्ष ने दावा किया कि यह मांग व्यापारियों की वाजिब चिंताओं को दर्शाती है।
- जंतर-मंतर पर पूर्व में हुए प्रदर्शन से व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
- त्योहारों के मौसम में व्यापारी साल भर के नुकसान की भरपाई की उम्मीद करते हैं।
- रामलीला मैदान में रैली के कारण करीब 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है।
सरावगी ने रैली के फैसले को कांग्रेस पार्टी की जनविरोधी मानसिकता का परिचायक करार दिया है।
सिवान हादसे पर जताया गहरा दुख
बिहार बीजेपी अध्यक्ष ने सिवान में पटाखा बनाने के दौरान हुए भीषण विस्फोट में चार लोगों की मौत की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया।
उन्होंने इस दर्दनाक हादसे में घायल हुए लोगों के इलाज की व्यवस्था सरकार द्वारा किए जाने की जानकारी दी।
उन्होंने आश्वासन दिया कि इस घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
एमएलसी चुनाव में एनडीए की जीत का दावा
विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों को लेकर संजय सरावगी ने एनडीए गठबंधन की प्रचंड जीत का भरोसा जताया है।
उन्होंने कहा कि एनडीए गठबंधन सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज करने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।
सरावगी के अनुसार, एनडीए पहले ही तीन सीटें जीत चुका है और निर्दलीय उम्मीदवार को शामिल करने पर यह आंकड़ा चार पहुंच जाता है।
उन्होंने रेखांकित किया कि इन चुनावों में शिक्षक और स्नातक मतदाता बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एनडीए ने इन मतदाताओं की चिंताओं को दूर करने के लिए पूरी गंभीरता से काम किया है, जिसके आधार पर बेहतर परिणाम तय हैं।
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