राजस्थान

जेकेके का 33वां स्थापना दिवस: जयपुर: जवाहर कला केन्द्र के 33वें स्थापना दिवस पर बाल कलाकारों ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग, दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 09 अप्रैल 2026, 04:50 दोपहर
जयपुर के जवाहर कला केन्द्र के 33वें स्थापना दिवस समारोह का शानदार आगाज हुआ। पहले दिन गुरु-शिष्य परंपरा के तहत बाल लोक कलाकारों ने अपनी अद्भुत कला से दर्शकों का दिल जीत लिया।

जयपुर | गुलाबी नगरी जयपुर की धड़कन कहे जाने वाले जवाहर कला केन्द्र (JKK) ने अपने गौरवशाली 33 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का बुधवार को भव्य आगाज हुआ। समारोह के पहले दिन राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले। इस बार का आकर्षण 'गुरु-शिष्य परंपरा' के अंतर्गत प्रशिक्षण ले रहे प्रदेश के नन्हे लोक कलाकार रहे, जिन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

नवाचार और बाल कलाकारों का उत्साह

कला एवं संस्कृति विभाग की संयुक्त सचिव और जेकेके की अतिरिक्त महानिदेशक अनुराधा गोगीया ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पहली बार बाल लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए विशेष मंच प्रदान किया गया है। रंगायन सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। दर्शकों ने भी इन नन्हे सितारों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया। पूरा हॉल राजस्थान की खुशबू और सुरों से सराबोर हो उठा।

सुरीली लंगा गायकी से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत सादिक खान लंगा और उनके दल की सुमधुर गायकी से हुई। उन्होंने पारंपरिक अंदाज में “गजानंद जी आवो” गाकर गणेश वंदना की। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई लोकगीत सुनाए। उनके दल ने “चैरा री माखी”, “चरखो”, “जीवडो” और “धोरा वालो देश” जैसे गीतों से दर्शकों को मरुधरा की संस्कृति से जोड़ दिया। इन बच्चों की गायकी में वही गहराई और मिठास थी, जो अनुभवी कलाकारों में होती है।

चरी और चंग नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति

गायन के बाद मंच पर राजस्थान का पारंपरिक मांगलिक चरी नृत्य पेश किया गया। सुश्री कृष्णा मालीकर के नेतृत्व में बाल कलाकारों ने सिर पर जलती हुई चरी (मटकी) रखकर नृत्य किया। उनका संतुलन और सौंदर्य देख दर्शक चकित रह गए। अगली कड़ी में शेखावाटी का प्रसिद्ध चंग नृत्य पेश किया गया। बनवारी और उनके समूह ने चंग और ढप की थाप पर बांसुरी की मधुर धुन के साथ ऊर्जावान प्रस्तुति दी। इस नृत्य ने पूरे वातावरण में एक अलग ही जोश भर दिया।

मारवाड़ी घूमर और भव्य समापन

समारोह के पहले दिन का समापन बालोतरा के दिनेश और उनके समूह की प्रस्तुति के साथ हुआ। ढोल-थाली की थाप पर उन्होंने पहले “घेरा” और फिर “सठिया” की सधी हुई लय पर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में मनमोहक मारवाड़ी घूमर नृत्य ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। इन बाल कलाकारों की प्रतिभा ने यह साबित कर दिया कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित हाथों में है और अगली पीढ़ी इसे बखूबी आगे बढ़ा रही है।

अगले दिन के कार्यक्रम का आकर्षण

स्थापना दिवस समारोह के दूसरे दिन, यानी 09 अप्रैल को मुजफ्फर रहमान और उनके समूह की विशेष प्रस्तुति होगी। इसमें कुल 14 कलाकार एक साथ मंच पर गायन और वादन का अनूठा संगम पेश करेंगे। जवाहर कला केन्द्र द्वारा आयोजित यह समारोह प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। शहरवासी इस तीन दिवसीय उत्सव का भरपूर आनंद उठा रहे हैं।

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