जयपुर | जयपुर के प्रसिद्ध गोविंददेवजी मंदिर परिसर में बुधवार से कथावाचक जया किशोरी की तीन दिवसीय 'नानी बाई रो मायरा' कथा का शुभारंभ हुआ। पहले ही दिन कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
भजन से हुई कथा की शुरुआत
जया किशोरी ने कथा की शुरुआत 'श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरि का प्यारा नाम है' भजन से की। उनके भजन पर वहां मौजूद सभी श्रद्धालु झूम उठे। कथा का समय पहले दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक था, लेकिन बाद में इसे बदलकर 12 से 3 बजे कर दिया गया।
कथा शुरू करते हुए जया किशोरी ने कहा कि वह बिना किसी भूमिका के सीधे प्रसंग पर आ रही हैं। इसके बाद उन्होंने नरसी जी के जन्म प्रसंग से कथा का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कई भजन भी गाए।
बच्चों को दें धार्मिक संस्कार
जया किशोरी ने कथा के दौरान माता-पिता को बच्चों के प्रति उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही भगवान और उनकी लीलाओं के बारे में बताना चाहिए, ताकि वे अपनी संस्कृति से जुड़े रहें।
जया किशोरी ने चिंता जताते हुए कहा, "ऐसे दिन मत लेकर आइएगा कि आपके बच्चे पूछें कि राधे कृष्णा कौन हैं। दुर्भाग्य से हम इस दिन तक पहुंच ही चुके हैं।"
उन्होंने कहा कि आजकल के बच्चों को यह नहीं पता कि भगवान के माता-पिता कौन थे या उन्होंने कौन-सी लीलाएं की हैं। उन्होंने माता-पिता से बच्चों को इधर-उधर की कहानियों की जगह भगवान की कथाएं सुनाने का आग्रह किया।
बेटियों की खुशियों को न बांधें
जया किशोरी ने बेटियों के विषय पर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता अक्सर अपनी बेटियों की इच्छाओं को यह कहकर टाल देते हैं कि 'यह काम शादी के बाद करना'।
उन्होंने कहा, "किसको क्या पता शादी के बाद क्या होगा। क्या पता बेटी को ऐसा घर मिले कि वह और नियमों वाला हो। जब तक बेटी आपके पास है, उसे जीवन जीने दो। उसकी सारी इच्छाएं पूरी करिए।"
जया किशोरी ने समझाया कि आजकल पढ़े-लिखे व्यक्ति का भी भरोसा नहीं किया जा सकता। इसलिए बेटियों की खुशियों को भविष्य के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि उन्हें वर्तमान में खुश रखना चाहिए।
तीन दिवसीय आयोजन
गोविंददेवजी मंदिर में यह कथा तीन दिनों तक चलेगी। कथा के लिए मंदिर परिसर में विशेष इंतजाम किए गए हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर जया किशोरी के मुख से कथा और भजन का आनंद ले रहे हैं।
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