जयपुर | जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब आवेदक अपनी लंबित फाइलों की पूरी स्थिति और अधिकारियों द्वारा की गई नोटिंग को घर बैठे ऑनलाइन देख सकेंगे।
जेडीए फाइल ट्रैकिंग अब ऑनलाइन: जेडीए में अब ऑनलाइन दिखेगी फाइल की नोटिंग और कमियां
जयपुर विकास प्राधिकरण में अब आवेदकों को फाइलों की स्थिति और कमियों की जानकारी ऑनलाइन मिलेगी।
HIGHLIGHTS
- जेडीए में अब फाइलों पर होने वाली हर अधिकारी की टिप्पणी ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक होगी।
- ई-पट्टा, नाम ट्रांसफर और उपविभाजन सहित छह प्रमुख सेवाओं के लिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
- अधिकारियों को अब किसी भी फाइल को रोकने या आपत्ति लगाने का ठोस कारण और नियम बताना अनिवार्य होगा।
- आवेदक अपनी एसएसओ आईडी के माध्यम से जेडीए सर्विस पोर्टल के डैशबोर्ड पर फाइल का रीयल-टाइम स्टेटस देख सकेंगे।
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प्रशासनिक पारदर्शिता की नई पहल
जेडीए सचिव ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इसके तहत अब अधिकारियों और कर्मचारियों को हर फाइल पर की जाने वाली टिप्पणी (नोटिंग) को ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दिखाना होगा।
यह व्यवस्था इसलिए लागू की जा रही है ताकि फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके। इससे आमजन को जेडीए के दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।
अब आवेदक यह जान सकेंगे कि उनकी फाइल में वास्तव में क्या कमी है। किन नियमों की पालना नहीं होने के कारण उनका काम अटका हुआ है, इसकी स्पष्ट जानकारी डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी।
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इन छह सेवाओं के लिए लागू हुए नियम
जेडीए सचिव द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, फिलहाल छह प्रकार की महत्वपूर्ण सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन किया गया है। इसमें जमीन या मकान का ई-पट्टा (फ्री होल्ड या लीज डीड) मुख्य है।
इसके अलावा नाम ट्रांसफर, भूखंडों का उपविभाजन (सब डिविजन) और पुनर्गठन (रिकॉन्स्टीट्यूशन) की प्रक्रिया भी ऑनलाइन होगी। वन टाइम लीज सर्टिफिकेट (OTLC) के आवेदनों को भी इसमें शामिल किया गया है।
इन सभी सेवाओं से संबंधित फाइलों को आवेदक की एसएसओ आईडी (SSO ID) के जरिए जेडीए के सर्विस पोर्टल के डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाएगा। इससे फाइल की ट्रैकिंग आसान हो जाएगी।
नोटिंग में स्पष्टता और जवाबदेही
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी फाइल पर कोई आपत्ति लगाता है, तो उसे उस टिप्पणी के पीछे का ठोस कारण बताना होगा। यह नोटिंग अब गोपनीय नहीं रहेगी।
अधिकारी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि किन विशिष्ट नियमों के तहत यह टिप्पणी की गई है। इससे अधिकारियों की मनमानी पर लगाम लगेगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी।
नोटिंग की भाषा को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। सचिव ने कहा है कि टिप्पणी की भाषा अत्यंत सरल और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि एक आम नागरिक भी उसे समझ सके।
जब आवेदक को अपनी कमी का स्पष्ट पता होगा, तो वह उसे तुरंत सुधार सकेगा। इससे फाइलों के निस्तारण की गति में तेजी आएगी और जेडीए की कार्यप्रणाली में सुधार होगा।
भ्रष्टाचार और देरी पर लगेगा अंकुश
अब तक जेडीए में ऑनलाइन के साथ-साथ फाइलें ऑफलाइन भी चलती थीं। इस दोहरी व्यवस्था के कारण कई बार अनावश्यक आपत्तियां लगाकर फाइलें हफ्तों तक रोक दी जाती थीं।
आवेदकों को यह पता ही नहीं चलता था कि उनकी फाइल किस मेज पर और क्यों रुकी है। लेकिन अब फाइल के हर मूवमेंट और नोटिंग को पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।
जेडीए सचिव के अनुसार, "आवेदकों को अब जेडीए के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हर फाइल की स्थिति और उस पर की गई टिप्पणी डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी ताकि जवाबदेही तय हो सके।"
इस डिजिटल बदलाव से न केवल काम में तेजी आएगी, बल्कि जेडीए की छवि भी जनता के बीच सुधरेगी। अधिकारियों को अब अपनी हर कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड रखना होगा।
डिजिटल राजस्थान की ओर बढ़ते कदम
जेडीए की यह पहल राजस्थान सरकार के डिजिटल गवर्नेंस के विजन के अनुरूप है। तकनीक के उपयोग से सरकारी सेवाओं को जनता के द्वार तक पहुंचाने का यह एक सफल प्रयास है।
आने वाले समय में अन्य सेवाओं को भी इस पोर्टल से जोड़ने की योजना है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि फाइलों के गुम होने या उनमें हेरफेर की संभावनाएं भी खत्म हो जाएंगी।
निष्कर्षतः, जेडीए का यह निर्णय जयपुर के नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अब आपकी फाइल की किस्मत किसी अधिकारी की अलमारी में नहीं, बल्कि आपके कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी।
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