झालावाड़ | राजस्थान का झालावाड़ मेडिकल कॉलेज अब चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग में ब्रेकियल प्लेक्सस और नर्व ट्रांसफर जैसी बेहद जटिल और महंगी सर्जरी अब पूरी तरह से निःशुल्क की जा रही है।
आयुष्मान भारत से मिल रहा नया जीवन
सड़क दुर्घटनाओं में अक्सर कंधे और गर्दन के बीच की नसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसे चिकित्सा विज्ञान में ब्रेकियल प्लेक्सस इंजरी कहा जाता है। निजी अस्पतालों में इस जटिल सर्जरी का खर्च लाखों में आता है।
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान भारत योजना के तहत यह सुविधा मुफ्त उपलब्ध है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को स्थायी अपंगता से बचने का एक बड़ा अवसर मिला है। अब वे बिना किसी कर्ज के अपना इलाज करा पा रहे हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी ने करीब एक वर्ष पहले इस मिशन की शुरुआत की थी। तब से अब तक उन्होंने कई गंभीर रूप से घायल मरीजों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने में मदद की है।
देशभर से पहुंच रहे हैं जरूरतमंद मरीज
इस अस्पताल की सफलता की गूंज अब राजस्थान की सीमाओं के पार पहुंच चुकी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के मरीज भी यहां आधुनिक चिकित्सा सुविधा का लाभ लेने पहुंच रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के अनपरा निवासी 18 वर्षीय अजय इसका बड़ा उदाहरण हैं। एक सड़क दुर्घटना के बाद वे कई अस्पतालों में भटके, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए झालावाड़ की जानकारी मिलने पर यहां आए।
अजय का सफल ऑपरेशन किया गया और अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसी तरह भरतपुर के विष्णु कुमार और बारां के आसाराम जैसे कई मरीजों ने भी यहां से नई जिंदगी पाई है।
विशेषज्ञों की टीम ने पेश की मिसाल
डॉ. योगी के साथ डॉक्टरों की एक समर्पित टीम इस मिशन में जुटी है। इसमें डॉ. रामावतार मालव, डॉ. अक्षय चोपड़ा, डॉ. साहिल रजा अंसारी और डॉ. असद जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं।
"हमारा उद्देश्य है कि कोई भी मरीज पैसों के अभाव में अपंग न रहे। सरकारी संसाधनों का सही उपयोग कर हम जटिल सर्जरी कर रहे हैं ताकि हर किसी को बेहतर इलाज मिले।" - डॉ. रामसेवक योगी
पिछले एक साल में टीम ने 15 से 20 अत्यंत जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। इसमें नर्सिंग स्टाफ कन्हैया का भी विशेष योगदान रहा है, जो मरीजों की देखभाल में दिन-रात जुटे रहते हैं।
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ने यह साबित कर दिया है कि समर्पण और सही नेतृत्व से छोटे शहरों के सरकारी अस्पताल भी विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा प्रदान कर सकते हैं। यह सफलता हजारों परिवारों के लिए खुशियां लेकर आई है।
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