झालावाड़/कोटा, 13 अक्टूबर 2026 | राजस्थान पुलिस में पदस्थापित एक कांस्टेबल के मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े कथित सौदे में शामिल होने का मामला सामने आया है। झालावाड़ जिले के घाटोली थाने में तैनात कांस्टेबल मनोज मालव को कोटा सिटी पुलिस ने विज्ञान नगर क्षेत्र से डिटेन करने के बाद गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान कांस्टेबल के पास से करीब 14 लाख रुपए नकद बरामद किए गए। इसके अलावा उसके पास से कुछ संदिग्ध तकनीकी साक्ष्य मिलने का भी दावा किया गया है। हालांकि, बरामद नकदी और तकनीकी साक्ष्यों का किसी तस्करी के सौदे से संबंध अभी पुलिस जांच का विषय है।
झालावाड़ डीएसटी को मिली थी सूचना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झालावाड़ जिले के घाटोली थाने में पदस्थापित कांस्टेबल मनोज मालव के मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े कथित सौदे में शामिल होने की सूचना जिला विशेष टीम को मिली थी।
झालावाड़ डीएसटी प्रभारी विष्णु सिंह ने सूचना के आधार पर संबंधित जानकारी जुटाई। इसी दौरान कांस्टेबल की लोकेशन कोटा शहर में सामने आई। इसके बाद डीएसटी प्रभारी ने यह जानकारी कोटा पुलिस के साथ साझा की।
विज्ञान नगर क्षेत्र में हुई कार्रवाई
झालावाड़ पुलिस से सूचना मिलने के बाद कोटा सिटी पुलिस ने विज्ञान नगर क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए कांस्टेबल मनोज मालव को डिटेन किया। तलाशी के दौरान पुलिस को उसके पास से करीब 14 लाख रुपए नकद मिले।
पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान कुछ ऐसे तकनीकी साक्ष्य भी सामने आए हैं, जिनका संबंध मादक पदार्थों की कथित खरीद-फरोख्त अथवा सौदे से होने की आशंका है। पुलिस इन साक्ष्यों की सत्यता और संदर्भ की जांच कर रही है।
एनडीपीएस एक्ट की धारा 30 में मामला दर्ज
कोटा पुलिस ने मामले में स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम यानी एनडीपीएस एक्ट की धारा 30 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इसके बाद कांस्टेबल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद नकदी कहां से आई और इसे किसे दिया जाना था। तकनीकी साक्ष्यों में सामने आए संपर्कों एवं कथित बातचीत की भी जांच की जा रही है।
नकदी के स्रोत और कथित नेटवर्क की जांच
जांच एजेंसी के सामने प्रमुख सवाल यह है कि कांस्टेबल के पास मिली नकदी का स्रोत क्या था और इसका कथित तस्करी के सौदे से कोई संबंध था या नहीं। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं है।
पुलिस कांस्टेबल के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, संदेशों, डिजिटल लेन-देन और हाल की गतिविधियों का परीक्षण कर सकती है। इन साक्ष्यों के आधार पर कथित सप्लायर, खरीदार और अन्य संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
पुलिस कर्मचारी की गिरफ्तारी से विभाग में चर्चा
पुलिस विभाग में पदस्थ कर्मचारी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज होने और गिरफ्तारी की कार्रवाई सामने आने के बाद यह प्रकरण चर्चा में है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नोट: कांस्टेबल पर लगे आरोप पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। बरामद नकदी अथवा तकनीकी सामग्री का कथित तस्करी से संबंध अभी अंतिम रूप से सिद्ध नहीं हुआ है। न्यायालय से दोष सिद्ध होने तक आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता।