रांची | झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य के महागठबंधन में सियासी भूचाल ला दिया है। कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद अब सहयोगी दलों, RJD और भाकपा माले पर ही क्रॉस वोटिंग के गंभीर आरोप लग रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम को बिहार का बदला माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार को मतदान हुआ। नतीजों में एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम ने जीत हासिल की।
वहीं, दूसरी सीट पर NDA समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी विजयी रहे। इस चुनाव में महागठबंधन के दूसरे उम्मीदवार और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा।
इस हार के बाद से ही महागठबंधन के भीतर दरारें साफ दिखने लगी हैं। कांग्रेस ने अपनी हार का ठीकरा सीधे तौर पर सहयोगी दलों पर फोड़ा है।
वोटों का गणित बिगड़ा
झारखंड विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं। यहां राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 28 वोटों की जरूरत होती है।
महागठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन था, जिससे उनकी दोनों सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही थी। वहीं, NDA के पास सिर्फ 24 विधायक थे।
लेकिन नतीजों ने सबको चौंका दिया। JMM प्रत्याशी बैद्यनाथ राम को 30 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को सिर्फ 21 वोट ही मिल सके। इनमें से भी एक वोट अवैध हो गया, जिससे उनके खाते में 20 वोट ही रह गए।
दूसरी ओर, NDA समर्थित परिमल नाथवानी को 30 वोट मिले, जो उनके संख्याबल से 6 ज्यादा थे। यहीं से क्रॉस वोटिंग का खेल सामने आया।
बिहार का बदला झारखंड में?
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को बिहार राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां RJD को हार का सामना करना पड़ा था।
मार्च में बिहार की पांच सीटों पर हुए चुनाव में RJD प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह हार गए थे। उस चुनाव में कांग्रेस के तीन और RJD का एक विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुआ था।
उस वक्त तेजस्वी यादव ने सहयोगी दलों पर धोखा देने का आरोप लगाया था।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि उनके गठबंधन के विधायकों ने धोखा दिया और कहा कि अगर सभी विधायक मतदान करते तो आरजेडी उम्मीदवार जीत सकते थे।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड में जो हुआ, वह बिहार की घटना की ही एक प्रतिक्रिया हो सकती है।
कांग्रेस विधायकों की बिहार में अनुपस्थिति का बदला RJD ने झारखंड में लिया है। कांग्रेस के आरोपों ने इस बात को और हवा दे दी है।
इस हार ने न केवल कांग्रेस को झटका दिया है, बल्कि महागठबंधन के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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