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'वतन को जानो' से जगी नई उम्मीद: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से मिले जम्मू-कश्मीर के युवा, 'वतन को जानो' पहल ने भरी राष्ट्रीय एकता की नई उड़ान

मानवेन्द्र जैतावत · 10 अप्रैल 2026, 09:37 सुबह
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने जम्मू-कश्मीर के 250 सदस्यीय युवा प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने 'वतन को जानो' कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और युवाओं की प्रगति की सराहना की।

नई दिल्ली | गृह मंत्रालय के 'वतन को जानो' कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर के 250 युवाओं के एक दल ने आज उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन से भेंट की। यह मुलाकात नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में गरिमामय माहौल में आयोजित की गई।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने 'वतन को जानो' पहल को राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम बताया।

राष्ट्रीय एकता और 'वतन को जानो' पहल

'वतन को जानो' कार्यक्रम गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार की एक विशेष पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को भारत की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक विरासत से रूबरू कराना है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर के युवाओं को भारत के विभिन्न हिस्सों को जानने का अवसर प्रदान करता है। इससे युवाओं के मन में एक साझा राष्ट्रीय पहचान और गौरव की भावना जागृत होती है।

उन्होंने जोर दिया कि ऐसी पहल न केवल युवाओं को आपस में जोड़ती है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी पैदा करती है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के विजन को धरातल पर उतार रहा है।

महिलाओं का नेतृत्व और सामाजिक बदलाव

उपराष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर में हो रहे सकारात्मक सामाजिक परिवर्तनों की जमकर सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा और सामाजिक विकास के कार्यों में महिलाओं की बढ़ती अग्रणी भूमिका का उल्लेख किया।

उन्होंने पिछले महीने श्रीनगर में कश्मीर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अपनी यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा कि वहां की महिलाओं का सशक्तिकरण राज्य की बदलती तस्वीर का सबसे बड़ा और प्रभावी प्रमाण है।

राधाकृष्णन के अनुसार, शिक्षा में महिलाओं का नेतृत्व और युवाओं की उपलब्धियां मिलकर एक प्रगतिशील दिशा तय कर रही हैं। जम्मू-कश्मीर की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का लोहा मनवा रही हैं।

खेलों में ऐतिहासिक उपलब्धि और प्रगति

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम की पहली रणजी ट्रॉफी जीत का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे युवा शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह जीत राज्य की खेल प्रतिभा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

खेलों के क्षेत्र में युवाओं की यह ऐतिहासिक उपलब्धि दर्शाती है कि जम्मू-कश्मीर का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। सही अवसर मिलने पर यहां के युवा किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा फहरा सकते हैं।

पर्यटन और आर्थिक विकास की संभावनाएं

श्री राधाकृष्णन ने जम्मू-कश्मीर को असाधारण प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति की भूमि बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन स्थल बनने की अपार और अनूठी क्षमता मौजूद है।

शिक्षा, तकनीक, पर्यटन और उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार हो रहा है। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहने और एक शांतिपूर्ण भविष्य के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।

शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर गहरी प्रसन्नता जताई कि जम्मू-कश्मीर के छात्र सिविल सेवा, आईआईटी और आईआईएम जैसी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। यह राज्य के बौद्धिक विकास का संकेत है।

उन्होंने युवाओं से नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से पूरी तरह दूर रहने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक स्वस्थ और नशा मुक्त युवा ही एक सशक्त और आधुनिक राष्ट्र की मजबूत नींव रख सकता है।

विकसित भारत का संकल्प और नेतृत्व

इस विशेष अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में हुए बुनियादी और ढांचागत बदलावों पर प्रकाश डाला।

डॉ. सिंह ने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर के युवाओं की आकांक्षाएं और सपने बहुत ऊंचे हो चुके हैं। वे अब विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बनकर देश के निर्माण में अपनी सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने अंत में युवाओं से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में गर्व के साथ योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब देश का प्रत्येक राज्य विकसित होगा, तभी 'विकसित भारत' का सपना साकार होगा।

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