जोधपुर | राजस्थान के जोधपुर शहर से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां नगर निगम प्रशासन ने जनगणना के काम के लिए ऐसी सूची जारी की है, जिसे देखकर हर कोई दंग है। सरकारी आदेश के मुताबिक, अब वे लोग भी शहर की जनगणना करेंगे जो इस दुनिया में ही नहीं हैं। जी हां, नगर निगम ने मृत और रिटायर हो चुके कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना में लगा दी है।
2084 लोगों की लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी
दरअसल, 27 मार्च को कार्यालय प्रमुख जनगणना अधिकारी और निगम कमिश्नर सिद्धार्थ पालानीचामी ने एक सूची जारी की। इस लिस्ट में कुल 2084 लोगों के नाम शामिल किए गए थे। हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट को बिना जांचे-परखे ही जारी कर दिया गया। इसमें उन लोगों के नाम भी डाल दिए गए जिनका निधन महीनों पहले हो चुका है।
मृत अब्दुल वाहिद की लगी ड्यूटी
लिस्ट में एक नाम अब्दुल वाहिद का है, जो जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी में यूडीसी (UDC) के पद पर तैनात थे। अब्दुल वाहिद का निधन 10 मई 2024 को ही हो चुका है। उनकी पत्नी नसीम बानो ने बताया कि उनके पति का मृत्यु प्रमाण-पत्र भी जारी हो चुका है। यह प्रमाण-पत्र खुद नगर निगम ने 15 मई 2024 को जारी किया था। नसीम बानो ने रोष जताते हुए कहा कि जब निगम को पता है कि व्यक्ति मर चुका है, तो ड्यूटी कैसे लगाई? उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
रिटायर कर्मचारियों को भी नहीं बख्शा
सिर्फ मृत ही नहीं, बल्कि डेढ़ साल पहले रिटायर हो चुके कर्मचारियों के नाम भी इस लिस्ट में धड़ल्ले से शामिल किए गए हैं। इससे प्रशासनिक लापरवाही साफ झलकती है। जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी की पेंशनर्स कमेटी के संयोजक अशोक व्यास ने इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि वे अगस्त 2024 में ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अशोक व्यास ने कहा, "नगर निगम के अधिकारियों ने शायद आंखें बंद करके यह लिस्ट तैयार की है। वीरम राम और मुनाराम जैसे साथी भी रिटायर हो चुके हैं, फिर भी उनकी ड्यूटी लगा दी गई।"
फरवरी में दुनिया छोड़ चुके दीपक भी लिस्ट में
लापरवाही का आलम यहीं खत्म नहीं होता। रामापीर कॉलोनी के रहने वाले दीपक अवस्थी का नाम लिस्ट में 1136 नंबर पर दर्ज है। दीपक का निधन इसी साल 13 फरवरी को हुआ था। दीपक के साथियों ने बताया कि उनके निधन का शोक संदेश तक अखबारों में छपा था। प्रशासन ने बिना किसी वेरिफिकेशन के उनका नाम जनगणना ड्यूटी में शामिल कर लिया।
अधिकारियों की चुप्पी और तबादला
जब इस बड़ी गड़बड़ी को लेकर नगर निगम के आयुक्त सिद्धार्थ पालानीचामी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। अगले ही दिन उनका तबादला हो गया। दूसरी ओर, निगम की अधिकारी पुष्पा सिसोदिया से भी संपर्क का प्रयास किया गया। रिपोर्टर ने तीन बार उनके कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन वह हर बार किसी काम में व्यस्त बताकर नहीं मिलीं। नगर निगम के इस रवैये से जनता और कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब स्वर्ग से आकर लोग जनगणना का काम पूरा करेंगे?