जोधपुर | राजस्थान के जोधपुर में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। डीसीपी (ईस्ट) मनीष कुमार चौधरी के नेतृत्व में 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' के तहत पुलिस ने ऐसे गिरोहों को पकड़ा है जो मासूम दिखने वाले युवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। जोधपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने पूरे देश में फैले साइबर ठगी के एक भयानक मकड़जाल का पर्दाफाश किया है।
चाय की थड़ी पर रची गई साजिश
पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि साइबर ठगों ने जोधपुर की मशहूर चाय की थड़ियों को अपना अड्डा बना रखा था। ये ठग थड़ियों पर बैठने वाले बेरोजगार या कम पढ़े-लिखे युवाओं को अपना निशाना बनाते थे। उन्हें महज 5 से 10 हजार रुपये के कमीशन का लालच दिया जाता था। इस मामूली रकम के बदले में ठग उन युवाओं के बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और यहां तक कि बैंक पासबुक भी अपने कब्जे में ले लेते थे।
8 राज्यों के पीड़ितों से 9 करोड़ की ठगी
इन किराए के खातों का इस्तेमाल देशभर में ठगी गई रकम को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, इन खातों के जरिए पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और बिहार जैसे राज्यों के लोगों को लूटा गया। कुल मिलाकर 9 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई, जिसमें से 72 लाख रुपये सीधे जोधपुर के इन खातों से घुमाए गए।
केस 1: हिम्मत सिंह का 66 लाख का खेल
उदयमंदिर थाना पुलिस ने सबसे बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसका मुख्य मोहरा हिम्मत सिंह चौहान था। हिम्मत सिंह के इंडियन ओवरसीज बैंक खाते में मात्र 3 महीने के भीतर 66 लाख 939 रुपये का लेन-देन हुआ। जांच में पता चला कि संगीता चौधरी उर्फ सावी चौधरी और सुभाष ने मिलकर उसे मजदूरी का झांसा देकर फंसाया था। हिम्मत सिंह को खींवसर के पास एक गांव में ले जाया गया था, जहाँ मेडिकल स्टोर की आड़ में साइबर फ्रॉड का अड्डा चल रहा था।
देशभर के 11 पीड़ितों का पैसा एक खाते में
हिम्मत सिंह के खाते में पश्चिम बंगाल के अरुण कुमार गरई से हुई 1 करोड़ की ठगी के 5 लाख रुपये आए थे। इसी तरह महाराष्ट्र के अशोक कृष्णा सराफ की 81 लाख की ठगी में से 35 लाख रुपये इसी खाते में क्रेडिट हुए। जम्मू-कश्मीर की कुसुम लता सप्रू, गुजरात की सरिता बेन और तमिलनाडु के उस्मान सेठ जैसे कई लोग इस जाल का शिकार बने।
केस 2: माता का थान थाने की कार्रवाई
माता का थान थाने के उपनिरीक्षक हरखाराम ने यूको बैंक के दो संदिग्ध खातों का पता लगाया। इसमें से एक खाता प्रशांत नामक युवक का था, जिसमें तमिलनाडु, केरल और कोलकाता के पीड़ितों का पैसा जमा था। दूसरा खाता मोनू बंजारा का था, जिसने अपनी पुरानी सिम और खाता कुलदीप पटेल को किराए पर दे दिया था। मोनू को यह सौदा प्याऊ की चाय की थड़ी पर बैठकर किया गया था।
केस 3: लक्ष्मण सिंह और 47 लाख की ठगी
तीसरे मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के खाताधारक लक्ष्मण सिंह को पकड़ा गया है। लक्ष्मण ने बताया कि उसे चाय की थड़ी पर अभिमन्यु उर्फ पप्सा मिला था, जिसने 5 हजार रुपये देकर उसका एटीएम ले लिया था। इस खाते के जरिए तमिलनाडु की आयशा बानो से हुई 47 लाख की ठगी का हिस्सा इधर-उधर किया गया।
साइबर पोर्टल से खुला राज
इन सभी संदिग्ध खातों की जानकारी राष्ट्रीय साइबर पोर्टल और 'समन्वय' पोर्टल के जरिए जुटाई गई। पुलिस ने देखा कि इन खातों में होने वाला लेन-देन खाताधारकों की आय से हजारों गुना अधिक था। इसके बाद डीसीपी ईस्ट ने विशेष टीमों का गठन कर इन 'म्यूल' यानी खच्चर खातों की पहचान की।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
साइबर अपराध की दुनिया में 'म्यूल अकाउंट' उन खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल ठगी का पैसा घुमाने के लिए होता है। मुख्य अपराधी कभी भी अपने असली खाते का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे गरीब या लालची लोगों के खातों को 'किराए' पर लेकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।
युवाओं के लिए चेतावनी
जोधपुर पुलिस ने आम जनता और खासकर युवाओं को आगाह किया है कि वे किसी के झांसे में न आएं। अपना बैंक खाता, पासवर्ड या सिम कार्ड किसी अजनबी को देना आपको जेल पहुंचा सकता है। भले ही आपने ठगी न की हो, लेकिन आपका खाता इस्तेमाल होने पर आप मुख्य आरोपी बन सकते हैं।
पुलिस की आगे की रणनीति
डीसीपी मनीष कुमार चौधरी ने बताया कि 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' अभी जारी रहेगा। पुलिस अब उन मुख्य सरगनाओं की तलाश कर रही है जो इन युवाओं को मोहरा बना रहे थे। जोधपुर के कई अन्य इलाकों में भी इसी तरह के संदिग्ध खातों की स्क्रूटनी की जा रही है।
कैसे बचें साइबर ठगी से?
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति से बैंकिंग जानकारी साझा न करें। अगर कोई आपको खाता खोलने के बदले पैसे देने का वादा करता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपको अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा बना सकती है।
तकनीकी जांच और डेटा विश्लेषण
पुलिस अब इन खातों के आईपी एड्रेस और ट्रांजैक्शन लॉग्स की बारीकी से जांच कर रही है। इससे यह पता चलेगा कि इन खातों को ऑपरेट करने वाले मास्टरमाइंड किस शहर या देश से काम कर रहे थे। जोधपुर पुलिस की यह कार्रवाई देशभर की पुलिस के लिए एक मॉडल बन सकती है।
कानूनी कार्रवाई का शिकंजा
पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी (420), आपराधिक षड्यंत्र (120B) और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।
निष्कर्ष
साइबर अपराध का यह नया चेहरा बेहद डरावना है जहाँ चाय की चुस्कियों के साथ अपराध की डील हो रही है। जोधपुर पुलिस की मुस्तैदी ने फिलहाल एक बड़े खतरे को टाल दिया है। लेकिन जनता की जागरूकता ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। सावधान रहें, सुरक्षित रहें और अपने डिजिटल फुटप्रिंट्स की सुरक्षा स्वयं करें।