राजस्थान

मथानिया में चुनावी धांधली का आरोप: दिव्या मदेरणा का धरना सफल, प्रशासन झुका, जांच के आदेश

बलजीत सिंह शेखावत · 01 सितम्बर 2026, 01:43 दोपहर
जोधपुर के मथानिया में नामांकन प्रक्रिया में धांधली के आरोपों पर पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा के धरने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। CI और RO की भूमिका की जांच होगी।

जोधपुर |राजस्थान के जोधपुर जिले में मथानिया नगरपालिका चुनाव 2026 की नामांकन प्रक्रिया के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगे हैं। इसके विरोध में पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा रातभर रिटर्निंग ऑफिसर (RO) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी रहीं। मंगलवार सुबह प्रशासन और मदेरणा के बीच सहमति बनने के बाद यह धरना समाप्त हुआ।

 

क्यों शुरू हुआ यह पूरा विवाद?

विवाद की मुख्य वजह नामांकन के आखिरी दिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कुछ लोगों को कार्यालय में प्रवेश देना माना जा रहा है। दिव्या मदेरणा ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और इसे लोकतंत्र का अपमान बताया।

समय सीमा के बाद भाजपा प्रत्याशी को प्रवेश!

दिव्या मदेरणा ने आरोप लगाया कि मथानिया में नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा दोपहर 3 बजे समाप्त हो गई थी।

इसके बावजूद, क्षेत्रीय विधायक और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी को आरओ कार्यालय के भीतर जाने की अनुमति दी गई, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

पुलिस पर पक्षपात का गंभीर आरोप

मदेरणा ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय थानाधिकारी (CI) खुद गेट पर जाकर भाजपा नेताओं को रिसीव करके अंदर लेकर आए।

उन्होंने कहा कि उसी समय कार्यालय के भीतर पहले से मौजूद कांग्रेस प्रत्याशी के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें जबरन बाहर निकाल दिया गया।

RO दफ्तर के बाहर रातभर चला धरना

प्रशासनिक कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाते हुए पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा अपने समर्थकों के साथ रातभर मथानिया RO कार्यालय के बाहर ही जमीन पर बैठी रहीं।

जब दोपहर 3 बजे के बाद किसी भी व्यक्ति को नामांकन प्रक्रिया में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती, तो फिर भाजपा के लोगों को अंदर जाने कैसे दिया गया? बंद गेट के बाद पुलिस अधिकारी उन्हें अंदर लेकर कैसे पहुंचे? क्या लोकतंत्र और संविधान में सत्ता पक्ष के लिए अलग और विपक्ष के लिए अलग नियम हैं? यह सिर्फ हमारी प्रत्याशी के साथ बदसलूकी नहीं, बल्कि चुनाव निष्पक्षता का सीधा अपमान है।

प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता और सहमति

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे और मदेरणा से बातचीत का प्रयास किया।

देर रात की वार्ता रही विफल

रात करीब 3 बजे अधिकारियों की एक टीम धरना स्थल पर पहुंची और दिव्या मदेरणा से वार्ता की। हालांकि, उस समय अधिकारियों के रुख से असंतोष जताते हुए मदेरणा ने धरना समाप्त करने से इनकार कर दिया।

सुबह इन मांगों पर बनी सहमति

मंगलवार सुबह प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दोबारा उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में मदेरणा द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर गंभीर मंथन किया गया, जिसके बाद प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया।

इस लिखित आश्वासन के बाद दिव्या मदेरणा ने अपना धरना समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए अलग-अलग नियम किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

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