जोधपुर | सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अनिता बिश्नोई को 17 दिनों के इलाज के बाद जोधपुर के मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उन्होंने ऑनलाइन ट्रोलिंग से तंग आकर 3 जून को आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था।
17 दिन बाद अस्पताल से घर वापसी
जोधपुर के बनाड़ थाना क्षेत्र के शिकारगढ़ में रहने वाली अनिता बिश्नोई ने 3 जून को सुबह करीब 11 बजे अपने घर पर विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया था।
इसके बाद उन्हें तुरंत एमडीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां वे 17 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझती रहीं। शनिवार को उनकी हालत में सुधार होने पर डॉक्टरों ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया।
हालांकि, डॉक्टरों ने अनिता को अभी पूरी तरह से बेड रेस्ट करने की सलाह दी है ताकि वे जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ हो सकें।
ट्रोलिंग के खिलाफ पुलिस में शिकायत
अनिता मारवाड़ क्षेत्र में एक चर्चित सोशल मीडिया चेहरा हैं। उनके फेसबुक पर 13 लाख और इंस्टाग्राम पर 6.45 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
यह कदम उन्होंने लगातार हो रही ऑनलाइन ट्रोलिंग और अभद्र टिप्पणियों से परेशान होकर उठाया था। इस मामले में उनके पति ने बनाड़ पुलिस थाने में ट्रोलर्स के खिलाफ केस भी दर्ज करवाया है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल की मदद से आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
अनिता ने जताया डॉक्टरों और फैंस का आभार
अस्पताल से घर लौटने के बाद अनिता बिश्नोई ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए अपने शुभचिंतकों और इलाज करने वाली टीम को धन्यवाद दिया।
अनिता ने लिखा, "मेरे भाई और डॉक्टर साहब सभी बोल रहे हैं कि तुम्हें हॉस्पिटल लेकर आए, तब कम से कम 250 से 300 आदमी खड़े थे और वह सब एक ही बात कर रहे थे कि किसी हालत में अनीता को बचाना है। उनकी कोशिश सफल रही।"
उन्होंने डॉक्टर अमित सागर की टीम और आईसीयू स्टाफ का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया और कहा कि वह आज अपने प्रशंसकों की दुआओं की वजह से ही जीवित हैं।
फैंस ने दी हिम्मत, कहा- 'जिंदा रहकर लड़ेंगे'
अनिता के डिस्चार्ज होने की खबर पर उनके लाखों फॉलोअर्स ने खुशी जाहिर की। कई यूजर्स ने लिखा कि लाखों लोगों की दुआएं काम आईं और उनकी जान बच गई।
एक यूजर ने लिखा, "सभी भाई-बहनों से निवेदन है कि कभी भी आत्महत्या का प्रयास न करें, जिंदा रहकर दुश्मनों से लड़ेंगे।" यह घटना सोशल मीडिया के स्याह पक्ष और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को उजागर करती है।
यह मामला दिखाता है कि ऑनलाइन दुनिया में नफरत और ट्रोलिंग किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से किस हद तक तोड़ सकती है। समाज को इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
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