जोधपुर | राजस्थान के जोधपुर जिले में पाल रोड स्थित श्रीराम हॉस्पिटल में एक महिला की मौत के बाद भारी हंगामा खड़ा हो गया है। परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया।
मृतक महिला के परिजनों का गुस्सा इस कदर फूटा कि स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और आरएसी (RAC) के जवानों को तैनात करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने जानबूझकर जोखिम लिया।
जोधपुर के पाल रोड स्थित श्रीराम हॉस्पिटल में सोमवार शाम करीब 8 बजे 45 वर्षीय कंचन कंवर की मौत हो गई। महिला की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
परिजनों और समाज के लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि अस्पताल ने केवल पैसे कमाने के चक्कर में मरीज की जान को खतरे में डाला और उचित इलाज नहीं दिया।
डॉक्टरों पर लापरवाही और पैसे मांगने के आरोप
मृतक महिला के बेटे गोविंद सिंह ने बताया कि वे बनाड़ के पास देवलिया गांव के रहने वाले हैं। उनकी मां को बच्चेदानी में गांठ की समस्या के कारण शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
गोविंद का आरोप है कि डॉक्टरों को पहले ही बता दिया गया था कि उनकी माताजी हार्ट की मरीज हैं और उनका ब्लड प्रेशर (BP) भी हमेशा हाई रहता है। इसके बावजूद डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जिद की।
गोविंद सिंह ने कहा कि, डॉक्टर चेतना अग्रवाल ने हमें पूरा विश्वास दिलाया था कि ऑपरेशन सफल होगा। लेकिन ऑपरेशन के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और सोमवार रात उनकी मौत हो गई।
परिजनों का यह भी आरोप है कि मौत के बाद शव सौंपने के बदले भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा रुपयों की मांग की गई। इस बात ने प्रदर्शनकारियों के गुस्से को और अधिक भड़काने का काम किया है।
राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तेजपाल सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि पूर्व में अन्य डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन न करने की सलाह दी थी क्योंकि उनकी स्थिति नाजुक थी।
भारी पुलिस बल और RAC की तैनाती
घटना की गंभीरता को देखते हुए देवनगर पुलिस थाना और आरएसी के जवानों को तुरंत मौके पर बुलाया गया। अस्पताल के बाहर कालीका पेट्रोलियम यूनिट को भी सुरक्षा के मद्देनजर तैनात किया गया है।
पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन परिजन दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। परिजनों ने पुलिस थाने में मामले की लिखित रिपोर्ट भी दर्ज कराई है।
अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि निजी अस्पताल मरीजों की जान से ज्यादा अपने मुनाफे को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस घटना ने शहर के चिकित्सा जगत में एक नई बहस छेड़ दी है और लोगों में डर का माहौल है।
चिकित्सा नैतिकता पर उठते सवाल
यह पहली बार नहीं है जब किसी निजी अस्पताल पर इस तरह के आरोप लगे हों। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने मरीज की मेडिकल हिस्ट्री को नजरअंदाज किया, जो एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा और आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
जोधपुर की इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा हादसा न हो।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। तब तक अस्पताल परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को टाला जा सके और शांति बनी रहे।
*Edit with Google AI Studio