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भारत का पहला FDRE प्रोजेक्ट शुरू: जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने रचा इतिहास: भारत का पहला FDRE प्रोजेक्ट राजस्थान और गुजरात में शुरू, हरियाणा को मिलेगी 24 घंटे क्लीन बिजली

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 21 अप्रैल 2026, 04:10 दोपहर
जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने देश का पहला फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट सोलर, विंड और बैटरी स्टोरेज को मिलाकर हरियाणा को पीक डिमांड के दौरान स्थिर बिजली देगा।

बीकानेर | भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने वह कर दिखाया है जो अब तक केवल कागजों पर था। कंपनी ने देश का पहला फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) प्रोजेक्ट कमीशनिंग फेज में पहुँचा दिया है। यह भारतीय पॉवर सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह प्रोजेक्ट राजस्थान और गुजरात के विशाल भू-भाग में फैला हुआ है। इसमें तकनीक और प्रकृति का बेजोड़ संगम देखने को मिलता है।

ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव

जूनिपर ग्रीन एनर्जी का यह प्रोजेक्ट 259 मेगावॉट पी सोलर और 280 मेगावॉट विंड एनर्जी को जोड़ता है। इसमें 200 मेगावॉट आवर की बैटरी स्टोरेज क्षमता भी शामिल है। इस प्रोजेक्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह ग्रिड की जरूरत के अनुसार बिजली दे सके। यह पारंपरिक रिन्यूएबल एनर्जी की सीमाओं को तोड़ता है। आमतौर पर सोलर बिजली केवल दिन में मिलती है। लेकिन इस FDRE प्रोजेक्ट के जरिए रात में भी स्वच्छ बिजली की आपूर्ति संभव हो पाएगी।

सीईओ अंकुश मलिक का विजन

जूनिपर ग्रीन एनर्जी के सीईओ अंकुश मलिक ने इस मौके पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे कंपनी की कार्यक्षमता और तकनीकी समझ का प्रमाण बताया। मलिक ने कहा कि यह प्रोजेक्ट हमारे उस विचार का हिस्सा है जिसमें हम भरोसेमंद ऊर्जा देना चाहते हैं। हम सिर्फ बिजली नहीं बना रहे, बल्कि भविष्य संवार रहे हैं। सोलर, विंड और बैटरी स्टोरेज को एक साथ लाना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन जूनिपर की टीम ने इसे मुमकिन कर दिखाया और नए मानक स्थापित किए।

क्या है FDRE फ्रेमवर्क?

भारत में रिन्यूएबल एनर्जी का विस्तार तेजी से हो रहा है। लेकिन ग्रिड को संतुलित रखना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। सोलर और विंड एनर्जी मौसम पर निर्भर करती है। इसी कमी को दूर करने के लिए जून 2023 में विद्युत मंत्रालय ने FDRE गाइडलाइंस जारी की थीं। इन गाइडलाइंस का मकसद डिस्कॉम की मांग के अनुसार बिजली उपलब्ध कराना है। यह कोयला आधारित बिजली का एक मजबूत और स्वच्छ विकल्प बनकर उभरा है।

प्रोजेक्ट के महत्वपूर्ण पड़ाव

इस प्रोजेक्ट की सोलर क्षमता ने मार्च 2026 में ही अपना कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया था। यह एक बड़ी उपलब्धि थी। इसके बाद अप्रैल 2026 में 200 मेगावॉट आवर की बैटरी स्टोरेज क्षमता ने भी काम करना शुरू कर दिया। अब यह पूरी तरह सक्रिय है। राजस्थान के बीकानेर में मर्चेंट बीईएसएस स्थापित करने के बाद जूनिपर का यह दूसरा बड़ा धमाका है। कंपनी लगातार नवाचार कर रही है।

हरियाणा को मिलेगी बड़ी राहत

उत्तर भारत में गर्मी के मौसम में बिजली की मांग चरम पर होती है। हरियाणा जैसे राज्यों में पीक डिमांड को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में जूनिपर का यह प्रोजेक्ट हरियाणा के लिए वरदान साबित होगा। यह राज्य को स्थिर और स्वच्छ बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। तय समय से पहले कमीशनिंग शुरू करना हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। इससे लोड शेडिंग की समस्या कम होगी।

एसजेवीएन के साथ साझेदारी

यह प्रोजेक्ट एसजेवीएन लिमिटेड द्वारा निकाली गई एक प्रतिस्पर्धी निविदा का हिस्सा है। जूनिपर ने इसमें रिवर्स ऑक्शन के जरिए जीत हासिल की थी। कंपनी ने एसजेवीएन के साथ 200 मेगावॉट का पॉवर परचेस एग्रीमेंट (PPA) साइन किया है। यह एक लंबी अवधि का समझौता है। इसके बदले एसजेवीएन ने हरियाणा पॉवर परचेस सेंटर (HPPC) के साथ करार किया है। इससे बिजली सीधे हरियाणा के ग्रिड तक पहुँचेगी।

बाजार में जूनिपर की बढ़त

एसजेवीएन के इस टेंडर में कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था। लेकिन जूनिपर ग्रीन एनर्जी पहली कंपनी बनी जिसने कमीशनिंग शुरू की। यह कंपनी की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट क्षमताओं को दर्शाता है। जूनिपर ने साबित किया है कि वह बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर सकती है। एफडीआरई प्रोजेक्ट्स का भविष्य भारत में बहुत उज्ज्वल है। वर्तमान में देश में करीब 10 गीगावॉट के ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।

भविष्य की ऊर्जा रणनीति

जूनिपर ग्रीन एनर्जी के लिए एफडीआरई उसकी लंबी अवधि की रणनीति का केंद्र है। कंपनी स्टोरेज सिस्टम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। जैसे-जैसे नए टेंडर सामने आ रहे हैं, जूनिपर अपनी क्षमता विस्तार पर ध्यान दे रही है। कंपनी का लक्ष्य भारत को नेट-जीरो की ओर ले जाना है। सोलर और विंड के साथ बैटरी का तालमेल ही भविष्य की ऊर्जा जरूरत है। जूनिपर इस बदलाव की अगुवाई कर रहा है।

निष्कर्ष और प्रभाव

भारत के ऊर्जा बदलाव में यह प्रोजेक्ट एक मील का पत्थर है। यह दिखाता है कि हम तकनीक के दम पर कोयले पर निर्भरता कम कर सकते हैं। डिस्कॉम अब अपनी जरूरत के हिसाब से स्वच्छ बिजली खरीद सकेंगे। इससे बैटरी स्टोरेज क्षेत्र में निवेश के नए रास्ते भी खुलेंगे। आने वाले समय में ऐसे और भी प्रोजेक्ट्स देखने को मिलेंगे। लेकिन जूनिपर ग्रीन एनर्जी का नाम हमेशा 'पहले' के रूप में याद रखा जाएगा।

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