राजस्थान

खाटूश्यामजी मंदिर 19 घंटे बंद: खाटूश्यामजी में 19 घंटे बंद रहेंगे पट, जानें दर्शन का समय

desk · 19 मई 2026, 09:56 रात
खाटूश्यामजी मंदिर में विशेष तिलक सेवा के कारण 20 मई शाम 5 बजे तक दर्शन बंद रहेंगे।

खाटूश्यामजी | राजस्थान के प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में बाबा श्याम की विशेष पारंपरिक तिलक सेवा के कारण श्रद्धालुओं के लिए 19 घंटे तक कपाट बंद रहेंगे। मंदिर प्रशासन ने इस संबंध में आधिकारिक सूचना जारी कर भक्तों से सहयोग मांगा है।

दर्शन का नया समय और शेड्यूल

खाटूश्याम मंदिर कमेटी के अनुसार, 19 मई की रात 10:00 बजे से मंदिर के पट आम जनता के लिए बंद कर दिए जाएंगे। यह पाबंदी अगले दिन यानी 20 मई की शाम 5:00 बजे तक प्रभावी रहेगी।

इस निर्धारित अवधि के दौरान बाबा श्याम की विशेष सेवा-पूजा और दिव्य श्रृंगार की प्रक्रिया निभाई जाएगी। इस समय के दौरान श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के बाहर से ही शीश नवाकर संतोष करना होगा।

मंदिर कमेटी ने स्पष्ट किया है कि 20 मई को शाम 5 बजे के बाद ही दर्शन सुचारू रूप से शुरू हो पाएंगे। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले भक्तों को अपनी यात्रा इसी अनुसार प्लान करने की सलाह दी गई है।

क्या है विशेष तिलक सेवा?

खाटूश्यामजी में हर महीने बाबा के विग्रह पर एक विशेष लेप लगाया जाता है। इसे पारंपरिक तिलक सेवा कहा जाता है। यह प्रक्रिया सदियों पुरानी परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार संपन्न की जाती है।

इस सेवा के दौरान बाबा के शीश को गंगाजल, दूध और विशेष जड़ी-बूटियों से शाही स्नान कराया जाता है। इसके पश्चात मुख्य पुजारी गर्भगृह की पूरी तरह से शुद्धि करते हैं।

तिलक के लिए केसर, कस्तूरी, चंदन और कई प्रकार के प्राकृतिक इत्रों का मिश्रण तैयार किया जाता है। इस लेप को बाबा के मुख मंडल पर लगाने में कई घंटों का समय लगता है।

"बाबा श्याम की विशेष सेवा और दिव्य श्रृंगार के कारण दर्शन का समय बदला गया है। श्रद्धालु सहयोग करें और भीषण गर्मी को देखते हुए अपनी यात्रा का समय निर्धारित करें।" - रवि सिंह चौहान, कोषाध्यक्ष

श्रृंगार के पीछे का गहरा महत्व

मान्यता है कि तिलक सेवा के बाद बाबा का स्वरूप और भी अधिक चमकीला और दिव्य हो जाता है। इस लेप को एक बार लगाने के बाद अगली अमावस्या तक मुख्य विग्रह में कोई बदलाव नहीं किया जाता।

इस प्रक्रिया की वजह से भक्तों को महीने में बाबा के दो अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन मिलते हैं। एक स्वरूप तिलक से पहले का 'कृष्ण स्वरूप' होता है और दूसरा तिलक के बाद का 'सजीला स्वरूप' होता है।

श्रृंगार के दौरान गर्भगृह में केवल प्रधान पुजारी और उनके सहायक ही प्रवेश कर सकते हैं। यह एक अत्यंत गोपनीय और पवित्र प्रक्रिया मानी जाती है, जिसे पूरी निष्ठा के साथ निभाया जाता है।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष सलाह

मई के महीने में राजस्थान में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप चरम पर है। मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दोपहर की धूप में कतारों में खड़े होने से बचें।

पट खुलने के बाद मंदिर में अचानक भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए अपने साथ पानी की बोतल, ओआरएस का घोल और छाता अवश्य रखें ताकि स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

यदि आपका प्लान 20 मई की सुबह दर्शन करने का है, तो उसे बदलकर शाम या अगले दिन का करें। इससे आपको न केवल दर्शन आसानी से मिलेंगे, बल्कि भीड़भाड़ से भी राहत मिलेगी।

निष्कर्ष और प्रभाव

खाटूश्यामजी मंदिर में होने वाली यह तिलक सेवा भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। 19 घंटे के इस अंतराल के बाद जब बाबा के पट खुलेंगे, तो भक्त उनके नए और अलौकिक स्वरूप का दीदार कर सकेंगे।

मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती भी की है। भक्तों से अनुरोध है कि वे व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का पूर्ण सहयोग करें और धैर्य रखें।

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