राजनीति

गहलोत vs किरोड़ी: गहलोत की 'छापेमारी' सलाह पर किरोड़ी का पलटवार, बोले- AC में नहीं बैठूंगा

बलजीत सिंह शेखावत · 13 जून 2026, 10:52 दोपहर
पूर्व सीएम गहलोत ने मंत्री किरोड़ी लाल मीणा को खुद छापे न डालने की सलाह दी, जिस पर मीणा ने तीखा जवाब दिया।

जयपुर | राजस्थान की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। गहलोत द्वारा दी गई छापों को लेकर 'निजी सलाह' पर मीणा ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा कि वह एसी में बैठने वाले नेता नहीं हैं।

गहलोत की सलाह पर मीणा का पलटवार

कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अन्य नेताओं की तरह एयर कंडीशनर (एसी) कमरों में बैठकर राजनीति नहीं करते।

मीणा ने कहा, "मैं जमीन पर खड़ा होकर किसानों की मदद करना चाहता हूं।" उन्होंने गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 5 साल भी उन्होंने सरकार को चैन से नहीं बैठने दिया था।

मीणा ने कहा कि गहलोत राज में खूब पेपर लीक हुए और जल जीवन मिशन में भी बड़ा घोटाला हुआ। उन्होंने कहा कि वह इन मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं, इसलिए गहलोत उन पर आरोप लगाते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इन आरोपों की परवाह नहीं करते और किसानों की सेवा का काम जारी रखेंगे। वह रुकने वाले नहीं हैं।

क्या थी पूर्व सीएम गहलोत की सलाह?

इससे पहले, अशोक गहलोत ने मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के छापों को 'अवैध' बताया था। उन्होंने कहा था कि मंत्री को खुद जाकर छापे नहीं डालने चाहिए।

गहलोत ने सलाह दी थी कि अगर छापेमारी के दौरान कोई अप्रिय घटना या झगड़ा हो जाए तो यह मंत्री पद की गरिमा के लिए उचित नहीं है।

उन्होंने कहा था कि अधिकारियों को छापेमारी करनी चाहिए और मंत्री को केवल इसकी निगरानी करनी चाहिए कि कार्रवाई ईमानदारी से हो रही है या नहीं।

नकली खाद-बीज के खिलाफ अभियान

गौरतलब है कि कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा इन दिनों नकली खाद-बीज और कृषि उत्पादों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

इसी अभियान के तहत उन्होंने हाल ही में जयपुर के कानोता स्थित एक बायो-फर्टिलाइजर फैक्ट्री पर छापा मारा था। वहां उन्होंने उत्पादों की वैधता में गड़बड़ी पाई थी।

इस राजनीतिक बयानबाजी ने राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई और दो प्रमुख नेताओं के बीच टकराव को उजागर कर दिया है। यह देखना होगा कि यह मामला आगे क्या मोड़ लेता है और इसका प्रशासनिक कार्रवाइयों पर क्या असर पड़ता है।

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