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भारत

किउल-झाझा तीसरी रेल लाइन को मंजूरी: किउल-झाझा तीसरी रेल लाइन को मंजूरी, ₹962 करोड़ होंगे खर्च

मानवेन्द्र जैतावत

भारतीय रेलवे ने हावड़ा-दिल्ली मार्ग पर क्षमता बढ़ाने के लिए ₹962 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी।

HIGHLIGHTS

  • किउल-झाझा के बीच 54 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन के निर्माण को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है।
  • इस पूरी रेल परियोजना पर भारतीय रेलवे लगभग 962 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
  • यह परियोजना हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर ट्रेनों की आवाजाही को सुगम और समयबद्ध बनाएगी।
  • परियोजना से पटना और कोलकाता के बीच व्यापारिक और औद्योगिक संपर्क को नया विस्तार मिलेगा।
kiul jhajha third rail line project approval

नई दिल्ली | भारतीय रेलवे ने हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर रेल परिचालन को अधिक सुगम बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 962 करोड़ रुपये की लागत वाली 54 किलोमीटर लंबी किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना को हरी झंडी दे दी है।

यह परियोजना भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त नेटवर्क का हिस्सा है। इससे पूर्वी और उत्तरी भारत के बीच यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई की क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जताई खुशी

रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना के महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि यह तीसरी लाइन हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करने में सहायक सिद्ध होगी।

"किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना से रेल सेवाओं की समयबद्धता और परिचालन की सामर्थ्य में सुधार होगा। अतिरिक्त लाइन से सवारी और मालगाड़ियों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित होगी।" - अश्विनी वैष्णव

मंत्री ने आगे कहा कि यह विस्तार न केवल रेलवे की दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास और व्यापारिक संपर्क को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।

भीड़भाड़ से मिलेगी राहत और बढ़ेगी रफ्तार

वर्तमान में किउल और झाझा के बीच मौजूद दोहरी लाइन अपनी अधिकतम क्षमता से अधिक पर काम कर रही है। आने वाले समय में इस मार्ग पर यातायात की मांग और अधिक बढ़ने की संभावना है।

इस दबाव को कम करने के लिए 54 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन का निर्माण अत्यंत आवश्यक हो गया था। इस परियोजना के पूरा होने से रेल मार्ग पर भीड़ कम होगी और ट्रेनों की गति में भी सुधार होगा।

पटना और कोलकाता के बीच मजबूत होगा संपर्क

यह रेल खंड पटना और कोलकाता के बीच संपर्क को और अधिक सुदृढ़ करेगा। इसके साथ ही, उत्तरी और पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के बीच कच्चे माल और तैयार उत्पादों की ढुलाई आसान हो जाएगी।

यह मार्ग विशेष रूप से कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों को रक्सौल और नेपाल से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहाँ से बाढ़ एसटीपीपी और बीरगंज आईसीडी जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए भारी माल ढुलाई होती है।

दीर्घकालिक बुनियादी ढांचागत विकास

बढ़ती मांग को देखते हुए, यह परियोजना यात्रियों और माल ढुलाई दोनों के लिए दीर्घकालिक समाधान पेश करती है। बेहतर संपर्क से पूर्वी भारत के आर्थिक केंद्रों के बीच सामग्रियों की आवाजाही की क्षमता बढ़ेगी।

रेल परिवहन की विश्वसनीयता बढ़ने से स्थानीय उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह परियोजना न केवल रेलवे के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगी।

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