राजस्थान

कोटा: मासूम ने रुकवाया बाल विवाह: कोटा में नाबालिग ने हेल्पलाइन पर लगाई गुहार: 'अंकल, मेरा बाल विवाह रुकवाओ'; 21 साल से कम उम्र के दूल्हे की शादी भी प्रशासन ने रुकवाई

गणपत सिंह मांडोली · 21 अप्रैल 2026, 11:25 दोपहर
कोटा में एक 17 वर्षीय साहसी लड़की ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन कर अपनी शादी रुकवाई। प्रशासन ने एक अन्य मामले में 20 साल के दूल्हे का विवाह भी रुकवाया है।

कोटा | राजस्थान के कोटा जिले से एक दिल दहला देने वाला लेकिन साहस से भरा मामला सामने आया है। यहां एक 17 साल की नाबालिग लड़की ने अपनी हिम्मत के दम पर अपनी जिंदगी को बर्बाद होने से बचा लिया।

कोटा में एक नाबालिग लड़की ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन किया। उसने रोते हुए कहा, 'अंकल, मेरा बाल विवाह रुकवाओ।' लड़की ने बताया कि उसके माता-पिता उसकी मर्जी के खिलाफ शादी कर रहे हैं।

लड़की के माता-पिता 26 अप्रैल को उसकी शादी करवाने की पूरी तैयारी कर चुके थे। जब लड़की ने इस शादी का विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई। उसे डराया-धमकाया गया।

डर के कारण घर से भागी मासूम

शादी के डर और घर में हो रहे उत्पीड़न से तंग आकर लड़की अपने घर से निकल गई। उसे अपनी सुरक्षा का डर सता रहा था। वह सड़कों पर भटकने को मजबूर हो गई थी।

लड़की ने चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम को अपनी लोकेशन बताई। इसके बाद टीम तुरंत हरकत में आई। टीम ने लड़की की बताई जगह पर पहुंचकर उसे सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।

लड़की को काउंसलिंग के लिए ले जाया गया। फिलहाल उसे राजकीय बालिका गृह में अस्थाई आश्रय दिलवाया गया है। वहां उसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

हेल्पलाइन पर गूंजी दर्द भरी पुकार

बाल कल्याण समिति के सहायक निदेशक रामराज मीणा ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि 17 साल की इस लड़की ने आज सुबह ही हेल्पलाइन पर फोन किया था।

लड़की ने फोन पर अपनी आपबीती सुनाई। उसने कहा कि वह पढ़ना चाहती है लेकिन उसके घरवाले उसे शादी के बंधन में बांधना चाहते हैं। विरोध करने पर उसे शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी।

लड़की केवल 9वीं क्लास तक पढ़ी-लिखी है। उसने बताया कि परिवार ने 5 साल पहले ही उसकी पढ़ाई जबरदस्ती छुड़वा दी थी। वह आगे की शिक्षा जारी रखना चाहती थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी कहानी

लड़की के फोन कॉल के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई सक्रिय हो गई। बाल अधिकारिता विभाग और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम तुरंत रेस्क्यू के लिए तैयार हुई।

सृष्टि सेवा समिति की टीम भी इस अभियान में शामिल थी। जब टीम कार्रवाई के लिए निकल रही थी, तभी लड़की का दोबारा फोन आया। वह काफी डरी हुई लग रही थी।

लड़की ने बताया कि वह डर के मारे घर से भाग गई है। वह इस समय कोटा के डीसीएम रोड पर खड़ी है। टीम बिना समय गंवाए डीसीएम रोड के लिए रवाना हुई।

प्रशासन ने लिया संरक्षण में

टीम जब मौके पर पहुंची, तो लड़की वहां अकेली और सहमी हुई मिली। काउंसलर महिमा पांचाल और सुपरवाइजर बंटी सुमन ने उसे संभाला। केस वर्कर आकाश कुमार भी साथ थे।

सृष्टि सेवा समिति के जिला समन्वयक भूपेंद्र सिंह ने उसे सुरक्षित वाहन में बैठाया। लड़की को पहले सुरक्षित स्थान पर लाया गया और उसे पानी पिलाकर शांत किया गया।

लड़की से विस्तृत बातचीत के बाद उद्योग नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है।

बाल कल्याण समिति की कार्रवाई

लड़की को बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ के सामने पेश किया गया। समिति ने लड़की के बयानों को दर्ज किया और उसकी काउंसलिंग करवाई।

समिति ने पाया कि लड़की के घर का माहौल फिलहाल उसके रहने लायक नहीं है। इसलिए उसे अस्थाई रूप से राजकीय बालिका गृह भेज दिया गया है।

प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह एक गंभीर दंडनीय अपराध है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

कुन्हाड़ी में दूल्हे की शादी रुकी

कोटा में केवल लड़कियों का ही नहीं, बल्कि लड़कों का भी बाल विवाह होने का मामला सामने आया है। कुन्हाड़ी इलाके में प्रशासन ने एक दूल्हे की शादी रुकवाई।

चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना मिली थी कि एक सामुदायिक भवन में शादी होने वाली है। वहां दूल्हे की उम्र 21 साल से कम होने की खबर मिली थी।

सूचना मिलते ही बाल अधिकारिता विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जब टीम सामुदायिक भवन पहुंची, तो वहां दूल्हा नहीं मिला। इसके बाद टीम उसके घर की ओर रवाना हुई।

शिक्षा विभाग का बाबू था दूल्हा

दूल्हे के घर पर शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थी। मेहमान जुट चुके थे और मंगल गीत गाए जा रहे थे। टीम ने वहां पहुंचकर दूल्हे के उम्र संबंधी दस्तावेज मांगे।

जांच में पता चला कि दूल्हे की उम्र 21 साल पूरी नहीं हुई है। उसकी उम्र 20 वर्ष के आसपास पाई गई। चौंकाने वाली बात यह है कि युवक शिक्षा विभाग में बाबू के पद पर तैनात है।

पढ़ा-लिखा होने के बावजूद परिवार इस गैर-कानूनी काम को अंजाम दे रहा था। टीम ने परिजनों को सख्त चेतावनी दी और शादी को तुरंत रुकवा दिया।

बाल विवाह के खिलाफ कानून

भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू है। इसके तहत लड़की की उम्र 18 साल और लड़के की उम्र 21 साल होना अनिवार्य है।

इससे कम उम्र में विवाह करना या करवाना कानूनी रूप से अपराध है। इसमें शामिल माता-पिता, पंडित और मेहमानों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

अपराध सिद्ध होने पर 2 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। प्रशासन लगातार लोगों को इस बारे में जागरूक कर रहा है।

सामाजिक जागरूकता की जरूरत

कोटा के इन दोनों मामलों ने समाज की सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां बेटियां पढ़ना चाहती हैं, वहीं दूसरी तरफ समाज उन्हें बेड़ियों में जकड़ रहा है।

बाल विवाह न केवल बच्चे का बचपन छीनता है, बल्कि उसके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। कम उम्र में शादी से शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है।

प्रशासन ने अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले, तो तुरंत 1098 पर फोन करें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाता है।

प्रशासन की सख्त चेतावनी

कोटा प्रशासन ने सभी मैरिज गार्डन संचालकों और पंडितों को भी निर्देश दिए हैं। उन्हें शादी से पहले वर-वधु के आयु प्रमाण पत्र जांचने को कहा गया है।

यदि किसी समारोह स्थल पर बाल विवाह पाया जाता है, तो संचालक के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी। लाइसेंस रद्द करने तक की नौबत आ सकती है।

कोटा की इस 17 साल की लड़की ने जो हिम्मत दिखाई है, वह अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा है। शिक्षा ही वह हथियार है जो इन कुरीतियों को खत्म कर सकता है।

भविष्य की राह

लड़की अब सुरक्षित है और उसकी पढ़ाई फिर से शुरू करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वह अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है।

बाल कल्याण समिति उसकी नियमित मॉनिटरिंग करेगी। उसके माता-पिता को भी पाबंद किया गया है कि वे भविष्य में ऐसा कोई कदम न उठाएं।

राजस्थान में अक्षय तृतीया जैसे मौकों पर बड़े पैमाने पर बाल विवाह होते हैं। प्रशासन अभी से ही इन पर लगाम लगाने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है।

निष्कर्ष

बाल विवाह मुक्त समाज बनाने के लिए हम सबको आगे आना होगा। कोटा की इस घटना ने साबित कर दिया है कि जागरूकता से किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है।

हमें अपने आसपास के बच्चों के अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए। तभी हम एक स्वस्थ और शिक्षित राष्ट्र का निर्माण कर पाएंगे।

प्रशासन की मुस्तैदी और लड़की की बहादुरी ने आज दो जिंदगियों को गलत रास्ते पर जाने से रोक लिया है। यह जीत केवल उस लड़की की नहीं, बल्कि पूरे कानून की है।

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