कोटा | राजस्थान के कोटा शहर में सूर्यदेव के तीखे तेवरों ने पिछले आठ वर्षों का रिकॉर्ड पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। रविवार को यहां का अधिकतम तापमान 45.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, गर्मी की इस प्रचंडता के कारण कोटा अब ऑरेंज जोन से निकलकर 'रेड जोन' में प्रवेश कर चुका है। शहर में लू के थपेड़ों ने लोगों का घर से निकलना दूभर कर दिया है।
आठ साल का टूटा रिकॉर्ड और रात की तपिश
कोटा में अप्रैल के महीने में इतनी अधिक गर्मी पिछले आठ सालों में कभी नहीं देखी गई। इससे पहले 30 अप्रैल 2018 को अधिकतम तापमान 45.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो अब पीछे छूट गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस बार न केवल दिन, बल्कि रातें भी असामान्य रूप से गर्म हो रही हैं। न्यूनतम तापमान 31.0 डिग्री रहा, जो पिछले 10 साल का उच्चतम स्तर बताया जा रहा है। वर्ष 2016 में न्यूनतम तापमान 24.0 डिग्री सेल्सियस था, जिससे तुलना करने पर इस बार की गर्मी की गंभीरता का पता चलता है। रात के समय भी गर्म हवाएं लोगों का चैन छीन रही हैं।
सड़कों पर सन्नाटा और लू का रौद्र रूप
सोमवार सुबह हालांकि कुछ बादल छाए रहे, लेकिन सुबह 10 बजते ही सूरज ने अपनी तपिश दिखाना शुरू कर दिया। दोपहर होते-होते लू के थपेड़ों ने स्थिति को और भी अधिक गंभीर बना दिया। शहर की व्यस्त सड़कों पर दोपहर के समय सन्नाटा पसरा नजर आया। लोग अति आवश्यक कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं और चेहरे को कपड़े से ढककर बचाव कर रहे हैं। कूलर और पंखे भी इस भीषण गर्मी के आगे बेअसर साबित हो रहे हैं। घरों की छतों पर रखी पानी की टंकियों का पानी उबलने लगा है, जिससे दैनिक कार्यों के संपादन में भारी दिक्कत हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भागों में आगामी 1-2 दिनों तक भीषण हीटवेव और गर्म रातें रहने की प्रबल आशंका बनी हुई है।
राहत की उम्मीद और मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी दिनों में तापमान में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना भी विभाग ने जताई है। 28 से 30 अप्रैल के बीच पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मेघगर्जन और हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। इससे तापमान में मामूली गिरावट आने और राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है। फिलहाल, कोटावासियों को इस झुलसाने वाली गर्मी से तुरंत राहत मिलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। लोग ठंडे पेय पदार्थों और अन्य देशी उपायों के जरिए खुद को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं। निष्कर्ष के तौर पर, कोटा में मौसम का यह मिजाज जलवायु परिवर्तन और स्थानीय भौगोलिक कारकों का मिश्रण है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर में बाहर न निकलने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।
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