बेलफास्ट |
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य कृष्णमाचारी श्रीकांत ने युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में तिलक की धीमी बल्लेबाजी को भारत की एक रन से हार का मुख्य जिम्मेदार ठहराया है। श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर आरोप लगाया कि तिलक देश के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए खेल रहे थे।
'देश के लिए नहीं, अपने लिए खेल रहे थे'
श्रीकांत ने तिलक वर्मा की पारी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनका रवैया बेहद स्वार्थी था। वह सिर्फ अपने व्यक्तिगत स्कोर पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे, न कि टीम की जरूरत पर।
ज्ञात हो कि इस महत्वपूर्ण मुकाबले में तिलक ने 46 गेंदों का सामना करते हुए धीमी गति से 55 रन बनाए थे। उनकी इस पारी के बावजूद टीम इंडिया को करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा, जिससे भारत 0-2 से सीरीज भी हार गया।
श्रीकांत ने स्पष्ट कहा, "आप इस तरह से नहीं खेल सकते। तिलक वर्मा सिर्फ अपने लिए खेल रहे थे, चुपके से एक और दो रन बना रहे थे और अक्षर भी वैसा ही कुछ कर रहे थे।"
बीच के ओवरों में बल्लेबाजी पर उठाए सवाल
पूर्व कप्तान ने भारतीय टीम की मध्यक्रम की बल्लेबाजी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मैच के दौरान एक ऐसा दौर भी आया जब बीच के 45 गेंदों में एक भी बाउंड्री नहीं लगी।
उन्होंने कहा, "आप ऐसे टी20 मैच कैसे जीत सकते हैं? यह बेहद शर्मनाक है कि आयरलैंड जैसी टीम की गेंदबाजी ने इस मजबूत भारतीय बैटिंग लाइनअप को पूरी तरह से रोक दिया।"
श्रीकांत ने शिवम दुबे और अक्षर पटेल के खराब स्ट्राइक रेट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर आप बीच के फेज में फेल हुए तो आप खत्म हो जाओगे। इंडिया बीच के फेज में ही गेम हार गया।
'हीरो बनने का प्रयास कर रहे थे तिलक'
श्रीकांत ने तिलक वर्मा की मानसिकता पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार, तिलक मैच को आखिरी ओवर तक ले जाकर हीरो बनना चाहते थे, जो कि एक गलत रणनीति थी।
"उसने आखिर में जीतने और अपनी जर्सी के साथ जश्न मनाने के बारे में सोचा। लेकिन, ऐसे लक्ष्य को एक ओवर शेष रहते हासिल करना होता है, आप इसे आखिर तक नहीं ले जाते।"
उन्होंने आईपीएल का उदाहरण देते हुए लखनऊ के विकेट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां भी कई शीर्ष भारतीय बल्लेबाज रन बनाने में संघर्ष करते हैं, जहां गेंद स्विंग और सीम होती है।
आक्रामक रवैये की थी जरूरत
अंत में, श्रीकांत ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि भारतीय टीम को बीच के ओवरों में रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रवैया अपनाना चाहिए था।
उनके अनुसार, मैच को अंत तक ले जाने की रणनीति इस मुकाबले में पूरी तरह से गलत साबित हुई। इस कड़ी आलोचना ने युवा तिलक वर्मा के प्रदर्शन और टीम इंडिया की मध्यक्रम की रणनीति पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है, जिस पर टीम प्रबंधन को ध्यान देना होगा।
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