जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी सेंध का मामला सामने आया है। लश्कर-ए-तैयबा के कुख्यात आतंकी उमर हारिस उर्फ 'खरगोश' ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया।
यह खुलासा होने के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। आतंकी ने जयपुर और हरियाणा की मतदाता सूचियों में भी फर्जी नामों से जगह बना ली थी। अब ड्राइविंग लाइसेंस मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
फर्जी पहचान से बना ड्राइविंग लाइसेंस
जांच में पाया गया कि आतंकी उमर हारिस ने साल 2024 में जगतपुरा एआरटीओ कार्यालय से लाइसेंस बनवाया था। उसने इसके लिए 'सज्जाद अहमद' नाम के फर्जी पहचान पत्र का सहारा लिया था।
चौंकाने वाली बात यह है कि उसने परिवहन विभाग के सामने ड्राइविंग ट्रायल भी दिया था। इसके लिए उन्हीं फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी का उपयोग किया गया, जिनसे उसने मतदाता सूची में नाम जुड़वाया था।
एटीएस की कार्रवाई और लाइसेंस रद्द
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला परिवहन अधिकारी जगतपुरा ने आधिकारिक आदेश जारी किया है। एटीएस जयपुर से 11 मई 2026 को मिले गोपनीय इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
"एटीएस की रिपोर्ट में इस व्यक्ति को 'संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी' माना गया है, जिसके बाद सज्जाद अहमद के नाम पर जारी लाइसेंस को तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।"
विभाग अब उन फाइलों की दोबारा जांच कर रहा है जिनके जरिए यह लाइसेंस जारी हुआ था। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया में कुछ स्थानीय दलालों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है।
27 साल पुराना इतिहास दोहराया गया
जयपुर परिवहन विभाग में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। विभाग के सूत्रों के अनुसार, करीब 27 साल पहले भी एक आतंकी 'इमरान' फर्जी लाइसेंस बनवाने में सफल रहा था।
उस समय भी आतंकी ने दलालों और मोटर ड्राइविंग स्कूलों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। हालांकि, बाद में मामला खुलने पर विभाग ने उस लाइसेंस को भी निरस्त कर दिया था।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
गांधीनगर थाना पुलिस ने उस समय एक मोटर ड्राइविंग स्कूल संचालक और कुछ दलालों को गिरफ्तार किया था। लेकिन मुख्य आरोपी आतंकी पुलिस की गिरफ्त से बाहर ही रहा और अब तक फरार है।
वर्तमान मामले ने एक बार फिर सरकारी विभागों की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना गहन जांच के संवेदनशील दस्तावेज जारी होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
आतंकी 'खरगोश' के इस कारनामे ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अब सभी आरटीओ कार्यालयों को बाहरी राज्यों और संदिग्ध दस्तावेजों के सत्यापन के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी चूक न हो।
परिवहन विभाग अब अपने डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाल रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी अन्य संदिग्ध ने तो लाइसेंस नहीं बनवाया है। इस घटना ने पूरे राजस्थान में प्रशासनिक सतर्कता की पोल खोल दी है।
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