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गिर में शेरों का संरक्षण उत्सव: सासन गिर में 'लायन' स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम का उद्घाटन

मानवेन्द्र जैतावत · 14 मई 2026, 12:40 दोपहर
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने गिर में 'लायन' स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

सासन गिर | केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज गुजरात के सासन गिर में 'लायन' स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह आयोजन एक बड़ी वैश्विक पहल का हिस्सा है।

यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) शिखर सम्मेलन 2026 के लिए आयोजित होने वाले प्री-समिट कार्यक्रमों की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें वन्यजीव विशेषज्ञों ने भाग लिया।

इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल भी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार के अटूट प्रयासों और उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की।

अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस और भारत का नेतृत्व

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने घोषणा की कि भारत 1 और 2 जून 2026 को नई दिल्ली में पहले IBCA शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

यह शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया की सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों का संरक्षण करना और उनके आवासों को सुरक्षित बनाना है।

इन सात प्रजातियों में बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा शामिल हैं। IBCA इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक वैश्विक गठबंधन के रूप में कार्य कर रहा है।

शिखर सम्मेलन 2026: एक वैश्विक मंच

मंत्री ने बताया कि आगामी शिखर सम्मेलन का टैगलाइन 'सेव बिग कैट्स, सेव ह्यूमैनिटी, सेव इकोसिस्टम' रखा गया है। यह नारा पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन के लिए जंगली बिल्लियों के महत्व को दर्शाता है।

इस सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के 95 देशों के लगभग 400 प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसमें राष्ट्राध्यक्ष, नीति निर्माता, वैज्ञानिक और संरक्षण चिकित्सक एक मंच पर आकर रणनीति तैयार करेंगे।

IBCA का उद्देश्य वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है। यह गठबंधन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए एक सामूहिक और ठोस प्रयास का प्रतिनिधित्व करता है।

एशियाई शेरों का संरक्षण और 'प्रोजेक्ट लायन'

श्री भूपेंद्र यादव ने सासन गिर को भारत की समृद्ध जैव विविधता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि गिर का शेर केवल गुजरात की पहचान नहीं है।

शेर पूरे देश के गौरव, साहस और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है। केंद्र सरकार ने शेरों के संरक्षण के लिए 'प्रोजेक्ट लायन' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं, जो अब रंग ला रही हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में एशियाई शेरों की जनसंख्या गणना और जूनागढ़ में राष्ट्रीय वन्यजीव रेफरल केंद्र जैसे कदम उठाए गए हैं। ये प्रयास शेरों की सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

जनसंख्या में 32 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि

मंत्री ने गर्व के साथ जानकारी साझा की कि ग्रेटर गिर परिदृश्य में शेरों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में शेरों की अनुमानित संख्या बढ़कर 891 हो गई है।

यह संख्या 2020 की तुलना में 32 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाती है। प्रभावी संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों के कारण गिर के विभिन्न क्षेत्रों में शेरों के उप-समूह तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

एशियाई शेर को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। इसके अलावा, CITES के परिशिष्ट-I में भी इसे शामिल कर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा दी गई है।

सामुदायिक भागीदारी और पारिस्थितिक संतुलन

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री के 'वसुधैव कुटुंबकम' के दृष्टिकोण को याद किया। उन्होंने कहा कि इसी सोच ने IBCA जैसी प्रतिष्ठित पहल की नींव रखी है।

मुख्यमंत्री ने एशियाई शेरों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि शेर इस क्षेत्र की लोकप्रिय संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन चुके हैं, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

"गिर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे पारिस्थितिक दृष्टिकोण अपनाकर आर्थिक प्रगति और वन्यजीव संरक्षण एक साथ चल सकते हैं। हम शेरों के प्राकृतिक विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि गिर की सफलता का राज वहां के लोगों का प्रकृति के प्रति प्रेम है। सरकार और जनता के आपसी सहयोग ने ही आज शेरों को सुरक्षित आवास प्रदान किया है।

बरडा वन्यजीव अभयारण्य: शेरों का नया ठिकाना

शेरों की बढ़ती आबादी को देखते हुए, सरकार अब उनके प्राकृतिक फैलाव के लिए नए क्षेत्रों का विकास कर रही है। बरडा वन्यजीव अभयारण्य को शेरों के दूसरे घर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

यह कदम शेरों के बीच आनुवंशिक विविधता बनाए रखने और किसी संभावित महामारी के खतरे को कम करने के लिए उठाया गया है। बरडा में पारिस्थितिक सुधार के कार्य मिशन मोड में जारी हैं।

इसके अलावा, जूनागढ़ में स्थापित राष्ट्रीय वन्यजीव रेफरल केंद्र शेरों के स्वास्थ्य की निगरानी और उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान कर रहा है। यह स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि है।

वैश्विक सहयोग और भविष्य की राह

कार्यक्रम के दौरान गणमान्य व्यक्तियों ने 'लायन कंजर्वेशन ब्रोशर' भी लॉन्च किया। इसके साथ ही, बड़ी बिल्लियों के संरक्षण पर आधारित विस्तृत प्रस्तुतियां और शैक्षिक फिल्में भी दिखाई गईं।

कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने भी भाग लिया। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संरक्षण की भावना को जगाना और उन्हें प्रेरित करना था।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शेर एक शीर्ष शिकारी होने के नाते पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखते हैं। वे शाकाहारी जीवों की आबादी को नियंत्रित कर जैव विविधता और प्रजातियों के गतिशीलता को आकार देते हैं।

वैश्विक स्तर पर शेरों की आबादी में गिरावट देखी गई है, लेकिन भारत में उनकी बढ़ती संख्या एक उम्मीद की किरण है। भारत का सफल संरक्षण मॉडल अब दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है।

अंत में, श्री यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि IBCA शिखर सम्मेलन 2026 अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करेगा। यह बड़ी बिल्लियों और उनके आवासों के लिए एक मजबूत सामाजिक-पारिस्थितिक भविष्य सुनिश्चित करेगा।

यह आयोजन भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह न केवल अपनी सीमाओं के भीतर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी वन्यजीवों की रक्षा के लिए अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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