जालोर | जालोर के नंदीश्वरदीप जैन तीर्थ परिसर में रविवार को एक ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। यहाँ 'लोकतंत्र सेनानी-स्वर्ण जयंती सम्मेलन' का भव्य आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में उन वीरों को याद किया गया, जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा की। राज्य के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
आपातकाल के काले दिनों की याद
मंत्री कुमावत ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1975 में देश पर थोपा गया आपातकाल एक कठिन परीक्षा थी। उस समय देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचलने का प्रयास हुआ।
उन्होंने बताया कि कैसे नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। प्रेस की आजादी छीन ली गई थी, लेकिन सेनानियों ने हार नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा।
कुमावत ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों की बदौलत ही आज हम स्वतंत्र हवा में सांस ले रहे हैं। उनका बलिदान और साहस देश के इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
सरकार दे रही है सम्मान निधि
राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है। राजस्थान लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि अधिनियम के तहत उन्हें उचित सम्मान दिया जा रहा है।
वर्तमान में लोकतंत्र सेनानियों को 20 हजार रुपये की मासिक पेंशन दी जा रही है। इसके साथ ही, उन्हें हर महीने 4 हजार रुपये की चिकित्सा सहायता भी मिलती है।
मंत्री ने विश्वास दिलाया कि सरकार लोकतंत्र के इन प्रहरियों के कल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहेगी। उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
जोगेश्वर गर्ग ने साझा किए अनुभव
राजस्थान विधानसभा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने भी आपातकाल के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने उस दौर को लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक 'यज्ञ' करार दिया।
गर्ग ने बताया कि जेल की सलाखों के पीछे रहकर भी सेनानियों का हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा के लिए हर तरह की प्रताड़ना को सहा।
सांसदों और विधायकों ने दी श्रद्धांजलि
राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत और जालोर सांसद लुम्बाराम चौधरी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रता पर प्रकाश डाला।
आहोर विधायक छगन सिंह राजपुरोहित और जयपुर के सिविल लाइन्स विधायक गोपाल शर्मा ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि आपातकाल ने हमें लोकतंत्र की कीमत समझाई है।
सम्मान समारोह और उपस्थिति
वरिष्ठ अधिवक्ता और लोकतंत्र सेनानी मधुसूदन व्यास ने संघर्ष की कहानियाँ सुनाईं। उन्होंने बताया कि कैसे एकजुट होकर लोकतंत्र को बचाने के प्रयास किए गए थे।
कार्यक्रम के अंत में लोकतंत्र सेनानियों और उनके आश्रितों को सम्मानित किया गया। उन्हें शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न प्रदान कर उनका आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर कैलाश सोनी, बंशीसिंह चौहान, गेनाराम मेघवाल और हरिशंकर राजपुरोहित मौजूद रहे। साथ ही भगाराम सुथार, सूरजप्रकाश व्यास और श्रीमती मिश्री बाई भी उपस्थित थीं।
रवि सोलंकी, दीपसिंह धनानी, महेन्द्र मुणोत और सुरेश सोलंकी सहित कई गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। सभी ने लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प दोहराया।