नई दिल्ली | घर में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करना केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वास्तु के नजरिए से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सही दिशा में रखी गई प्रतिमा आपके जीवन में सकारात्मकता लाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती की मूर्ति अगर सही स्थान पर हो, तो इससे बच्चों की पढ़ाई और बड़ों के करियर में शानदार प्रगति देखने को मिलती है।
मां सरस्वती मूर्ति वास्तु टिप्स: मां सरस्वती की मूर्ति रखने की सही दिशा: करियर और पढ़ाई में मिलेगी जबरदस्त सफलता, जानें वास्तु नियम
घर में मां सरस्वती की मूर्ति सही दिशा में रखने से ज्ञान और एकाग्रता बढ़ती है। वास्तु के अनुसार पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशाएं सबसे शुभ मानी जाती हैं जिससे करियर में उन्नति होती है।
HIGHLIGHTS
- पूर्व दिशा को मां सरस्वती की मूर्ति के लिए सबसे शुभ और ऊर्जावान माना गया है।
- उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में प्रतिमा रखने से नए अवसरों और समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
- कमल पर बैठी हुई मुद्रा वाली मूर्ति एकाग्रता और बुद्धिमत्ता का प्रतीक मानी जाती है।
- हाथों में वीणा और पुस्तक वाली प्रतिमा कला और शिक्षा में प्रगति के लिए उत्तम है।
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कौन सी दिशा है सबसे उत्तम?
वास्तु के अनुसार, मां सरस्वती की मूर्ति के लिए पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। यह उगते सूर्य की दिशा है, जो नई ऊर्जा और ज्ञान का संचार करती है। इस दिशा में मूर्ति रखने से घर के वातावरण में सकारात्मकता आती है। साथ ही, बौद्धिक कार्यों और पढ़ाई में छात्रों की एकाग्रता काफी हद तक बढ़ जाती है।
उत्तर-पूर्व और उत्तर दिशा के लाभ
ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को भी मूर्ति स्थापना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यहां मां सरस्वती का वास होने से घर में सुख-समृद्धि और ज्ञान का आगमन होता है। वहीं, उत्तर दिशा में मूर्ति रखने से घर का वातावरण शांत और संतुलित रहता है। यह दिशा करियर में सफलता पाने और नए अवसरों को खोजने में मददगार साबित होती है।
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कैसी होनी चाहिए मूर्ति की मुद्रा?
वास्तु के अनुसार, मां सरस्वती की वह मूर्ति सबसे शुभ होती है जिसमें वे कमल के फूल पर बैठी हुई मुद्रा में हों। यह स्वरूप शांति और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। मूर्ति के चेहरे पर प्रसन्नता का भाव होना अनिवार्य है। ऐसी प्रतिमा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करती है।
हाथों में क्या होना जरूरी है?
मां सरस्वती के हाथों में वीणा का होना रचनात्मकता और कला के प्रति प्रेम को दर्शाता है। यह संगीत और कला के क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए बहुत शुभ है। वहीं, दूसरे हाथों में पुस्तक या शास्त्र का होना शिक्षा के महत्व को बताता है। ऐसी मूर्ति स्थापित करने से घर के सदस्यों की बौद्धिक क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।
रखें इन बातों का खास ख्याल
वास्तु के अनुसार, कभी भी घर में मां सरस्वती की टूटी हुई या खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कार्यों में बाधाएं आती हैं। मूर्ति को हमेशा साफ-सुथरी जगह पर रखें। नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने से घर में विद्या का वास होता है और करियर में आने वाली अड़चनें दूर होने लगती हैं।
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