कोटा | राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षा जगत में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को समाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया है।
कोटा के सियाम ऑडिटोरियम में आयोजित 'शिक्षा संवाद' कार्यक्रम में उन्होंने अपनी बात रखी। इस दौरान कोटा और बूंदी जिलों के 627 प्रधानाचार्य और शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल वेतनभोगी कर्मचारी नहीं हैं। वे समाज को दिशा देने वाले और व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले शिल्पी हैं।
शिक्षक ही बनाते हैं श्रेष्ठ नागरिक
दिलावर ने जोर देकर कहा कि दुनिया के सबसे अच्छे राजनेता और उद्योगपति शिक्षकों की देन हैं। विधिवेत्ता और वैज्ञानिक भी एक शिक्षक की देखरेख में ही तैयार होते हैं।
किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसके शिक्षक का स्थान सबसे ऊंचा और सम्माननीय होता है। यह शिक्षकों का दायित्व है कि वे इस सम्मान की गरिमा बनाए रखें।
मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि सरकारी विद्यालय सर्वश्रेष्ठ बनें। शिक्षक के पद की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर ले जाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
आदर्श जीवन जीने की सलाह
शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को सार्वजनिक जीवन में नैतिकता के मापदंड अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि शिक्षक का जीवन विद्यार्थियों के लिए एक खुली किताब की तरह होता है।
दूसरे लोग हमेशा शिक्षकों से सीखते हैं और उनका अनुसरण करते हैं। ऐसे में शिक्षकों को अपने व्यवहार में सादगी और आदर्शों को शामिल करना चाहिए।
प्रधानाचार्य को विद्यालय का मुखिया बताते हुए उन्होंने समय की पाबंदी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुखिया का आचरण ही पूरे स्कूल के माहौल को तय करता है।
पूर्व छात्रों को स्कूलों से जोड़ें
दिलावर ने स्कूलों के विकास के लिए एक अनूठा सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हर स्कूल को अपने पूर्व छात्रों यानी एलुमनाई की एक विस्तृत सूची तैयार करनी चाहिए।
इन पूर्व छात्रों को 'एलुमनाई मीट' के जरिए स्कूल में वापस बुलाया जाना चाहिए। इनमें से कई छात्र आज बड़े पदों पर आसीन होंगे और सफल व्यवसायी बन चुके होंगे।
मंत्री का विश्वास है कि जब ये सफल लोग अपने पुराने स्कूल आएंगे, तो वे भावुक होंगे। वे स्कूल के भवन, स्मार्ट क्लास और फर्नीचर के लिए जरूर सहयोग करेंगे।
नशामुक्ति के लिए कड़े कदम
शिक्षा मंत्री ने स्कूलों को पूरी तरह नशामुक्ति केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिए कि स्कूलों के आसपास गुटखा और बीड़ी की बिक्री न हो।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार की जाए जो शराब या तंबाकू का सेवन करते हैं। शिक्षकों को समाज के लिए उदाहरण पेश करना होगा।
नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए उन्होंने प्रधानाचार्यों को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। विद्यालय परिसर में स्वच्छता और सात्विकता का माहौल होना अनिवार्य है।
बच्चों के नामों पर विशेष ध्यान
एक बहुत ही मानवीय पहलू पर बात करते हुए दिलावर ने बच्चों के नामों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चों के नाम सुनने में अच्छे नहीं लगते हैं।
ऐसे नामों की वजह से भविष्य में बच्चों को शर्मिंदगी महसूस हो सकती है। प्रवेश के समय प्रधानाचार्य अभिभावकों को समझाएं कि वे बच्चे का कोई सार्थक और अच्छा नाम रखें।
राजस्थान सरकार जल्द ही 3 हजार अच्छे नामों की एक सूची स्कूलों को भेजेगी। अभिभावक इस सूची में से अपनी पसंद का नाम चुन सकेंगे जो बच्चे के व्यक्तित्व को निखारे।
नाम बदलने की प्रक्रिया में सहयोग
यदि कोई छात्र बाद में अपना नाम बदलना चाहता है, तो स्कूल प्रशासन को उसका सहयोग करना चाहिए। दस्तावेजों में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि नाम का प्रभाव व्यक्ति के आत्मविश्वास पर पड़ता है। इसलिए इस विषय को गंभीरता से लेने की जरूरत है ताकि किसी बच्चे का मजाक न बने।
प्रार्थना सभा को बनाएं रोचक
शिक्षा मंत्री ने स्कूलों की प्रार्थना सभाओं को केवल रस्म अदायगी न बनाने की सलाह दी। इसे ज्ञानवर्धक और रोचक बनाने के लिए नवाचार करने के निर्देश दिए गए।
इटावा ब्लॉक के प्रधानाचार्य बाबूलाल मीणा ने इस दौरान अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने ढोल बजाकर और पीले चावल बांटकर बच्चों का नामांकन बढ़ाया।
इस नवाचार की मंत्री ने जमकर सराहना की। इस प्रयास से उनके स्कूल में 80 से अधिक नए बच्चों का दाखिला हुआ है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
एआई (AI) आधारित अध्यापन की शुरुआत
कार्यक्रम में तकनीक के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। कोटा के भूगोल व्याख्याता गजेंद्र गौतम ने एआई आधारित चार ऐप विकसित किए हैं, जो बच्चों को पढ़ाते हैं।
इन ऐप्स में चैटबॉट की मदद से एआई शिक्षक भूगोल के कठिन विषयों को समझाते हैं। मंत्री ने गजेंद्र गौतम को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया और उनकी प्रतिभा को सराहा।
उन्होंने निर्देश दिए कि विभागीय कार्यशालाओं में गजेंद्र गौतम का डेमो कराया जाए। इससे अन्य शिक्षकों को भी तकनीक के इस्तेमाल की प्रेरणा मिलेगी।
शारीरिक शिक्षकों के लिए नए नियम
खेलों को बढ़ावा देने के लिए मंत्री ने पीटीआई (PTI) के कार्यों में बदलाव की बात कही। उन्होंने कहा कि पीटीआई को भी अब हर दिन खेल के कालांश लेने होंगे।
अक्सर देखा जाता है कि खेल की गतिविधियां सप्ताह में एक-दो बार ही होती हैं। अब इसे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाएगा ताकि बच्चों का शारीरिक विकास हो सके।
सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों के खेल मैदानों से अतिक्रमण हटाएं। जहां मैदान नहीं हैं, वहां नई भूमि आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
शिक्षकों की ड्यूटी और बीएलओ कार्य
बीएलओ ड्यूटी को लेकर भी मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि बीएलओ के रूप में कार्यरत शिक्षकों को स्कूल के आसपास ही नियुक्त किया जाना चाहिए।
इससे वे कम से कम आधे दिन स्कूल में अध्यापन कार्य कर सकेंगे। सिफारिश के आधार पर सुविधाजनक जगहों पर लगने की प्रवृत्ति पर अब रोक लगाई जाएगी।
कलेक्ट्रेट और उपखंड कार्यालयों में लगे शिक्षकों को वापस मूल स्कूलों में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा के अधिकार का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दानदाताओं का सम्मान
कार्यक्रम में दानदाताओं को भी प्रोत्साहित किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी रामचरण मीणा को उनके परिवार द्वारा भूमि दान करने के लिए सम्मानित किया गया।
उनके परिवार ने मुंगेना स्कूल के लिए सवा दो बीघा जमीन और आर्थिक सहयोग दिया है। मंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरणों से समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए।
मानवीय मूल्यों की शिक्षा
विशिष्ट अतिथि एच. डी. चारण ने मानवीय मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती शिक्षा के दौरान ही बच्चों को नैतिक रूप से मजबूत बनाना जरूरी है।
शिक्षकों को पहले स्वयं इन मूल्यों को समझना होगा। तभी वे आने वाली पीढ़ियों को संस्कारित कर पाएंगे। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन
मंत्री के ओएसडी सतीश गुप्ता ने बताया कि राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। इस बार सत्र शुरू होते ही किताबें बच्चों तक पहुंच गई हैं।
पिछले सत्र में 50,000 शिक्षकों के प्रमोशन किए गए थे। इस सत्र में भी डीपीसी (DPC) की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी ताकि शिक्षकों का मनोबल बढ़े।
राजस्थान को शिक्षा के शिखर पर ले जाने के लिए 'संवाद, समाधान और परिवर्तन' का यह सिलसिला जारी रहेगा। कोटा का यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।