राजस्थान

महाकाल मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा शुरू: सिरोही: महाकाल मंदिर में शिव परिवार की प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य आगाज, 51 कलशों के साथ निकली यात्रा और वराडा में उमड़ा आस्था का सैलाब

प्रदीप बीदावत · 22 अप्रैल 2026, 08:41 रात
सिरोही के गायत्री मंदिर परिसर में नवनिर्मित महाकाल मंदिर में तीन दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान की भव्य शुरुआत हुई है। 51 कलशों के साथ निकाली गई यात्रा और वराडा में हनुमान जी के मेले ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया है।

सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में इन दिनों भक्ति और आध्यात्म की अविरल धारा बह रही है। शहर के गायत्री मंदिर परिसर में नवनिर्मित महाकाल मंदिर में शिव परिवार की तीन दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य अनुष्ठान बुधवार से आरम्भ हो गया है।

इस पावन अवसर पर आयोजन समिति द्वारा आयोजित कलश यात्रा ने पूरे शहर को शिवमय कर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ इस धार्मिक उत्सव में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

नवनिर्मित मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और श्रीगणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक एकता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कलश यात्रा से हुआ अनुष्ठान का शुभारंभ

बुधवार सुबह चामुंडा माता मंदिर के प्रांगण में एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया गया। यहाँ माँ चामुंडा और भेरुजी महाराज की साक्षी में पवित्र कलशों का विधि-विधान से पूजन किया गया।

गायत्री परिवार की प्रधान ट्रस्टी रंजन देवी ने बताया कि इस अनुष्ठान को संपन्न कराने के लिए पुष्कर से विशेष रूप से विद्वान आचार्यों को आमंत्रित किया गया है। आचार्य सुरेश शर्मा, देवेंद्र साहू और पाली उपजोन प्रभारी हरिगोपाल सोनी ने पूजन संपन्न करवाया।

पूजन के पश्चात 51 कन्याओं और महिलाओं ने अपने सिर पर मंगल कलश धारण किए। इन कलशों में पवित्र जल भरा गया था, जो शुद्धता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है।

भक्ति गीतों से गूंजा शहर का कोना-कोना

कलश यात्रा जैसे ही चामुंडा माता मंदिर से रवाना हुई, ढोल-थाली और बैंड-बाजों की मधुर ध्वनियों ने वातावरण को गुंजायमान कर दिया। श्रद्धालु शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।

यात्रा में शामिल महिलाएं मधुर भजन और धार्मिक गीत गा रही थीं। कलश यात्रा बस स्टैंड रोड, सरजावाव और राजमाता धर्मशाला जैसे प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी।

रास्ते भर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने कलश यात्रा पर पुष्प वर्षा की। जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पानी और शरबत की व्यवस्था की गई थी।

कलश यात्रा का आध्यात्मिक महत्व

पुष्कर से आए आचार्य सुरेश शर्मा ने कलश यात्रा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है।

कलश यात्रा केवल एक जुलूस नहीं है, बल्कि यह देवी-देवताओं का आह्वान करने की एक प्रक्रिया है। यह आयोजन स्थल को दिव्य ऊर्जा से भर देता है और भक्तों के मन में अटूट श्रद्धा पैदा करता है।

जब यह यात्रा गायत्री मंदिर पहुँची, तो वहाँ कलशों की आरती उतारी गई। इसके बाद उन्हें मंदिर के निर्धारित स्थान पर स्थापित किया गया, जिससे प्राण-प्रतिष्ठा के मुख्य अनुष्ठान की नींव पड़ी।

विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन

प्राण-प्रतिष्ठा के पहले दिन केवल कलश यात्रा ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक क्रियाएं भी की गईं। रंजन देवी ने बताया कि दोपहर के समय प्रायश्चित कर्म और गायत्री स्तवन किया गया।

इसके साथ ही विद्वान पंडितों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ आरम्भ किया गया। मंदिर परिसर में परिजनों द्वारा अखंड महामृत्युंजय जाप भी शुरू किया गया है, जो निरंतर जारी रहेगा।

शाम के समय एक भव्य दीप यज्ञ का आयोजन हुआ। इसमें सैकड़ों महिलाओं ने दीप प्रज्वलित कर विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना की। दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर जगमगा उठा।

आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा

अनुष्ठान के दूसरे दिन यानी 23 अप्रैल को सुबह 9 बजे से नौ कुण्डीय यज्ञ का आरम्भ होगा। यह यज्ञ पर्यावरण शुद्धि और आध्यात्मिक चेतना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

दिन भर भगवान के अधिवास, षोडश उपचार और पंच स्नान जैसे अनुष्ठान चलेंगे। इसमें मूर्तियों को विभिन्न पवित्र द्रव्यों से स्नान कराया जाएगा और उन्हें संस्कारित किया जाएगा।

महामृत्युंजय जाप और गायत्री मंत्र जाप की पूर्णाहुति के साथ-साथ भगवान का विशेष अभिषेक भी किया जाएगा। भक्तों में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

वराडा में हनुमान जी के मेले की धूम

एक तरफ शहर में महाकाल मंदिर का उत्सव चल रहा है, तो दूसरी तरफ वराडा कस्बे में सिद्ध पीठ श्री हनुमानजी का वार्षिक मेला संपन्न हुआ। यहाँ भी आस्था का ज्वार देखने को मिला।

भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। पूरा वराडा क्षेत्र 'जय बजरंगबली' और 'पवनपुत्र हनुमान की जय' के नारों से गूंजता रहा।

मेला कमेटी के गिरधारी लाल पुरोहित ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत सुबह-सुबह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती के साथ हुई। भक्तों ने लंबी कतारों में लगकर दर्शन किए।

वैदिक मंत्रोच्चार और ध्वजारोहण

मंदिर के शिखर पर विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नवीन ध्वजा का आरोहण किया गया। यह ध्वजा विजय और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

हनुमानजी को विशेष रूप से फल और चुंदड़ी अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को बाल भोग लगाया गया। भोग लगने के तुरंत बाद विशाल प्रसादी का वितरण शुरू हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने भोजन ग्रहण किया।

सुबह के समय गांव के मुख्य मार्गों से एक आकर्षक शोभायात्रा भी निकाली गई। इसमें युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।

शोभायात्रा में बिखरे भक्ति के रंग

शोभायात्रा के दौरान बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर केसरिया साफा पहने युवाओं ने जमकर नृत्य किया। हवा में उड़ते गुलाल ने वातावरण को सतरंगी बना दिया।

भक्ति गीतों पर झूमते श्रद्धालुओं ने पूरे गांव में भ्रमण किया। यह शोभायात्रा जब मंदिर परिसर पहुँची, तो वहां का दृश्य अत्यंत मनमोहक था। हर कोई हनुमान जी की भक्ति में लीन नजर आया।

मेले में सजे हाट-बाजारों में भी काफी रौनक रही। यहाँ खिलौनों, मिठाइयों और घरेलू सामानों की दुकानों पर महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ उमड़ी।

गर्मी से बचाव के विशेष इंतजाम

चूंकि राजस्थान में इन दिनों पारा काफी ऊपर है, इसलिए मेला कमेटी और ग्रामीणों ने विशेष सतर्कता बरती। जगह-जगह ठंडे पेयजल की मशीनें लगाई गई थीं।

श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बड़े-बड़े पांडाल लगाए गए थे, जहाँ कूलर और पंखों की व्यवस्था की गई थी। स्थानीय व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और सेवा कार्यों में हाथ बंटाया।

दोपहर के समय आयोजित भजन संध्या में प्रसिद्ध कलाकारों ने हनुमान जी के भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की धुन पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नाचने लगे।

सामाजिक और राजनीतिक सहभागिता

इस भव्य मेले के मुख्य लाभार्थी वराडा निवासी राजपुरोहित गलबाजी और उनका परिवार रहा। मेला कमेटी ने लाभार्थी परिवार और अन्य सहयोगियों का साफा पहनाकर सम्मान किया।

मेले में राजनीति और समाज के विभिन्न गणमान्य लोगों ने भी शिरकत की। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने मंदिर में मत्था टेका और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।

उनके साथ जिला प्रमुख अर्जुन पुरोहित, भाजपा नेता छगन घांची, प्रधान हंसमुख मेघवाल, गोविंद पुरोहित और कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष शैतान सिंह भी मौजूद रहे। इन नेताओं ने आयोजन की सराहना की।

आस्था और एकता का संगम

सिरोही और वराडा के ये दोनों आयोजन इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय संस्कृति में मेलों और उत्सवों का क्या स्थान है। ये आयोजन लोगों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं।

महाकाल मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा जहाँ आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनी हुई है, वहीं वराडा का मेला सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा है।

आने वाले दो दिनों में महाकाल मंदिर में और भी भव्य कार्यक्रम होंगे, जिसमें पूरे जिले से हजारों श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद जताई जा रही है। आयोजन समिति ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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