राजनीति

इस्तीफा देकर BJP के टिकट पर लड़ें चुनाव: TMC में बगावत पर महुआ मोइत्रा का बड़ा हमला

बलजीत सिंह शेखावत · 12 जून 2026, 02:39 दोपहर

नई दिल्ली: Mahua Moitra ने पार्टी के बागी सांसदों पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि संविधान और दल-बदल कानून के तहत अलग संसदीय गुट बनाने की कोई व्यवस्था अब मौजूद नहीं है और ऐसा दावा करने वाले सांसद संवैधानिक प्रावधानों को गलत तरीके से समझ रहे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में महुआ मोइत्रा ने कहा कि यदि बागी सांसद वास्तव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहिए।

91वें संविधान संशोधन का दिया हवाला

महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में कहा कि वर्ष 2003 में हुए 91वें संविधान संशोधन के बाद राजनीतिक दलों के भीतर “स्प्लिट” यानी अलग गुट बनाने का प्रावधान समाप्त कर दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सांसदों की संख्या अधिक होने से किसी समूह को अलग पहचान नहीं मिल जाती।

उनके अनुसार, संविधान के तहत केवल उस स्थिति में राहत मिल सकती है जब किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय का निर्णय लें। ऐसे में अलग संसदीय समूह की मान्यता का नहीं, बल्कि विलय का प्रावधान लागू होता है।

अलग गुट की मांग पर बढ़ा विवाद

यह बयान ऐसे समय आया है जब TMC के 19 बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था और स्वतंत्र पहचान की मांग उठाई है। इस मांग के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक तनाव और तेज हो गया है।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि भले ही बागी खेमे को पार्टी के दो-तिहाई सांसदों का समर्थन मिल जाए, तब भी उन्हें अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता नहीं मिल सकती। संविधान उन्हें केवल किसी अन्य दल में विलय का विकल्प प्रदान करता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया उल्लेख

अपने बयान में महुआ मोइत्रा ने वर्ष 2023 में आए सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले Subhash Desai vs Principal Secretary to the Governor of Maharashtra Judgment का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि दल-बदल कानून के तहत अलग गुट बनाने की व्यवस्था समाप्त हो चुकी है।

उनका दावा है कि मौजूदा संवैधानिक ढांचे और दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत किसी राजनीतिक दल के भीतर अलग संसदीय गुट की मान्यता का कोई प्रावधान नहीं है।

TMC में बढ़ रहा आंतरिक तनाव

तृणमूल कांग्रेस के भीतर हाल के दिनों में असंतोष के संकेत लगातार सामने आ रहे हैं। दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय से पोस्टर हटाए जाने की घटना और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी है।

इस बीच, राज्यसभा सांसद Sushmita Dev, Sukhendu Sekhar Ray और Prakash Chik Baraik के इस्तीफों ने भी पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

राजनीतिक असर पर नजर

बागी सांसदों की मांग और महुआ मोइत्रा के तीखे बयान के बाद TMC के भीतर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है और बागी खेमे का अगला कदम क्या होता है, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजर बनी हुई है।

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