जोधपुर | थार का मारवाड़ इलाका सदियों से पानी की हर बूंद के लिए संघर्ष करता आया है। लेकिन 2026 का मानसून इस क्षेत्र के लिए अब तक सबसे निराश करने वाला साबित हुआ है, जिससे जोधपुर, पाली, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे जिलों पर पानी का संकट गहरा गया है।
मारवाड़ में मौसम का मिजाज: सूखी धूप और बढ़ती गर्मी
जहां पूर्वी राजस्थान बारिश से सराबोर है, वहीं जोधपुर में मौसम बिल्कुल विपरीत है। गुरुवार को यहां आसमान साफ रहा और तेज धूप खिली रही, जिससे उमस और गर्मी दोनों सामान्य से ज्यादा महसूस हुई।
यहां अधिकतम तापमान सामान्य से 0.9 डिग्री बढ़कर 34.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.4 डिग्री बढ़कर 27.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मारवाड़-थार क्षेत्र की स्थिति और भी गंभीर है। राज्य के पांच सबसे गर्म जिलों में से चार इसी इलाके से हैं, जिनमें बीकानेर (38°C), श्रीगंगानगर (38°C), जैसलमेर (37.3°C), और चूरू (37°C) शामिल हैं। यह दिखाता है कि मानसून की मेहरबानी इस इलाके तक नहीं पहुंची है।
जवाई बांध: मारवाड़ की लाइफलाइन पर संकट
पाली जिले में स्थित जवाई बांध को मारवाड़ की लाइफलाइन कहा जाता है, लेकिन इस मानसून में इसके आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। बांध की कुल भराव क्षमता 18.67 मिलियन क्यूबिक मीटर है।
एक महीने में घटा जलस्तर
2 जुलाई 2026 को बांध में 9.64 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी था, जो क्षमता का 28.76% था। एक महीने बाद, 4 अगस्त 2026 को यह घटकर 9.13 मिलियन क्यूबिक मीटर, यानी सिर्फ 26.59% रह गया।
इसका मतलब है कि मानसून का नया पानी आने के बजाय, पहले से जमा पानी और कम हो गया। यह पाली और जोधपुर के बड़े हिस्से की जलापूर्ति के लिए एक गंभीर संकेत है।
बीसलपुर बांध: जयपुर जोन में भी चिंता
टोंक जिले में स्थित बीसलपुर बांध तकनीकी रूप से जयपुर जोन का हिस्सा है, लेकिन यह अजमेर होते हुए मारवाड़ के सीमावर्ती इलाकों तक पानी पहुंचाता है।
2 जुलाई को बांध में 313.57 मिलियन क्यूबिक मीटर (65.42%) पानी था, और 4 अगस्त को भी यह आंकड़ा जस का तस बना रहा। एक महीने में बांध में एक इंच भी नया पानी नहीं आया, जबकि पिछले साल इसी दौरान यह लबालब भरने की कगार पर था।
जोधपुर जोन: प्रदेश में सबसे खराब स्थिति
जल संसाधन विभाग के अनुसार, राजस्थान के छह बांध जोनों में सबसे बुरी हालत जोधपुर जोन की है। इस जोन में जवाई, जसवंत सागर, उम्मेद सागर जैसे कुल 117 बांध आते हैं।
पिछले साल की तुलना में यहां के बांधों में करीब 35% पानी कम हो गया है, जो राज्य के सभी जोनों में सबसे बड़ी गिरावट है। इसकी तुलना में जयपुर जोन में 29%, बांसवाड़ा में 30% और कोटा जोन में 13% की कमी है।
जल संकट का आम आदमी पर असर
मारवाड़ पहले से ही कम बारिश वाला और भूजल पर अत्यधिक निर्भर क्षेत्र है। जवाई जैसे बांध न केवल सिंचाई बल्कि पीने के पानी की भी रीढ़ हैं।
जब जवाई बांध 26% से नीचे है और जोन के 117 बांधों में 35% की गिरावट है, तो आने वाले महीनों में पानी की राशनिंग और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ना तय है।
जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने भी स्वीकार किया कि बारिश न होने से बांध खाली हैं, जिससे किसानों को पानी देना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि सरकार वाटर मैनेजमेंट के जरिए पानी देने की कोशिश करेगी।
आगे क्या: बारिश की उम्मीद लेकिन चिंता बरकरार
मौसम विभाग ने एक हल्की उम्मीद जगाई है। 9 अगस्त को पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर समेत मारवाड़ के लगभग सभी जिलों में अच्छी बारिश के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।
हालांकि, मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के अनुसार, अगस्त-सितंबर में भी राजस्थान में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। ऐसे में मारवाड़ के बांधों के लिए असली परीक्षा अभी बाकी है।
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