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मेरठ सौरभ हत्याकांड: मेरठ सौरभ हत्याकांड: दोषी मुस्कान और साहिल की सजा पर फैसला आज

thinQ360 · 14 अक्टूबर 2026, 11:48 दोपहर
मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत दोषी मुस्कान और साहिल शुक्ला की सजा सुनाएगी। परिवार ने दोनों दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की है।

मेरठ | मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार को अदालत दोषी मुस्कान और साहिल शुक्ला की सजा पर फैसला सुनाएगी। दोनों दोषी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होंगे।

सजा पर अदालत का अंतिम निर्णय

जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में दोनों दोषियों की पेशी होगी। सजा का फैसला सुनाने से पहले कोर्ट दोनों को अपना पक्ष रखने का मौका देगी।

जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के अनुसार, अभियोजन पक्ष पर्याप्त सबूतों के आधार पर दोनों दोषियों को फांसी देने की मांग करेगा।

परिजनों की फांसी की मांग

सौरभ की मां और भाई ने दोनों दोषियों के लिए फांसी की सजा मांगी है। मां ने कहा कि अगर हत्यारों को फांसी नहीं हुई तो वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगी।

मां ने कहा कि न्याय की लड़ाई का अंत तभी होगा जब दोनों को फांसी होगी और तभी बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

सौरभ राजपूत ने 2016 में मुस्कान से प्रेम विवाह किया था। 2019 में विवाद के बाद दोनों अलग हुए और उसी साल बेटी पीहू का जन्म हुआ।

परिवार के समझौते के बाद वे साथ रहने लगे और सौरभ लंदन चला गया। इस बीच मुस्कान की सहपाठी साहिल शुक्ला से नजदीकियां बढ़ीं।

हत्या का खुलासा और पुलिस कार्रवाई

हत्या के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए। मुस्कान सोशल मीडिया पर लगातार फोटो डालती रही ताकि किसी को शक न हो।

दोनों 17 मार्च को लौटे और 18 मार्च को सौरभ के भाई राहुल के पहुंचने पर बदबू आने से घटना का खुलासा हुआ।

पुलिस ने 19 मार्च को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। मामले में करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी।

22 गवाहों के बयान और कोर्ट की टिप्पणी

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। चाकू, उस्तरा, सीमेंट, बालू और ड्रम की खरीद के साक्ष्य मिले।

"ऐसे अपराधों से समाज में डर और असुरक्षा पैदा होती है। इसका असर लोगों की सोच पर पड़ता है। अपराध बढ़ना चिंता की बात है। न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी लोगों में सुरक्षा का भरोसा बनाए रखना है। कोर्ट को अपराध और आरोपी को सजा देने के साथ आरोपी के अधिकारों और समाज के हितों का भी ध्यान रखना होता है।"

इस मामले का ट्रायल पूर्व जिला जज रजत जैन के कार्यकाल में शुरू हुआ था, जिसके बाद संजीव कुमार और अब अरविंद कुमार मिश्रा फैसला सुना रहे हैं।

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