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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान-साहिल के बयान: मेरठ सौरभ राजपूत हत्याकांड: कोर्ट में मुस्कान-साहिल से 32 सवाल, आरोपियों ने खुद को बताया निर्दोष, जानें पूरी कहानी

गणपत सिंह मांडोली · 22 अप्रैल 2026, 11:53 दोपहर
मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में नया मोड़ आया है। कोर्ट में मुस्कान और साहिल ने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस के दावों को खारिज कर दिया है।

मेरठ | उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में हुए चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड ने एक बार फिर कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपी मुस्कान और साहिल को जिला अदालत में पेश किया गया।

कोर्ट की कार्यवाही के दौरान दोनों आरोपियों के बयान दर्ज किए गए, जो इस केस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जिला जज अनुपम कुमार की अदालत में यह पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई।

इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और कोर्ट रूम का माहौल काफी गंभीर बना हुआ था। आरोपियों के चेहरे पर किसी तरह का पछतावा नहीं दिख रहा था।

धारा 313 के तहत हुई पूछताछ

कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, आरोपियों से धारा 313 के तहत पूछताछ की गई। इस धारा का मुख्य उद्देश्य आरोपी को अपने खिलाफ आए साक्ष्यों पर सफाई देने का मौका देना होता है।

न्यायाधीश ने मुस्कान और साहिल से बारी-बारी से सवाल पूछे। दोनों से कुल 32-32 सवाल किए गए, जिनका उन्होंने संक्षिप्त उत्तर दिया।

अदालत ने उनसे हर उस सबूत के बारे में पूछा जो पुलिस ने अपनी चार्जशीट में दाखिल किया है। करीब 46 मिनट तक यह सवाल-जवाब का सिलसिला चलता रहा।

साहिल का दिल्ली वाला दावा

आरोपी साहिल ने कोर्ट के सामने खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया। उसने पुलिस द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

साहिल ने एक नया दावा पेश करते हुए कहा कि जिस रात सौरभ की हत्या हुई, वह मेरठ में था ही नहीं। उसने अपनी लोकेशन दिल्ली में बताई।

साहिल का कहना है कि उसे इस मामले में साजिश के तहत फंसाया गया है। उसने कोर्ट से अपील की कि वह निर्दोष है और उसे न्याय चाहिए।

मुस्कान ने बताया प्रॉपर्टी विवाद

वहीं, दूसरी आरोपी मुस्कान ने भी खुद को इस हत्याकांड से अलग बताया। उसने कोर्ट में कहा कि उसका सौरभ की मौत से कोई लेना-देना नहीं है।

मुस्कान ने दलील दी कि यह पूरा मामला प्रॉपर्टी के विवाद से जुड़ा हुआ है। उसके अनुसार, कुछ लोग उसे झूठे केस में फंसाकर उसकी संपत्ति हड़पना चाहते हैं।

उसने पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाए और कहा कि उसे केवल शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। उसके बयान को कोर्ट ने रिकॉर्ड में ले लिया है।

शिमला और मसूरी ट्रिप का सच

पूछताछ के दौरान एक महत्वपूर्ण बिंदु उन यात्राओं का था जो आरोपियों ने साथ की थीं। पुलिस ने दावा किया था कि ये यात्राएं हत्या की साजिश का हिस्सा थीं।

हालांकि, मुस्कान और साहिल दोनों ने स्वीकार किया कि वे शिमला, मसूरी और कसौल घूमने गए थे। उन्होंने वहां होटल में रुकने की बात भी मानी।

लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक साधारण ट्रिप थी। उनके अनुसार, घूमने जाने का मतलब यह नहीं है कि उन्होंने किसी की हत्या की साजिश रची।

क्या था सौरभ राजपूत हत्याकांड?

सौरभ राजपूत की हत्या 4 मार्च की रात को की गई थी। यह घटना इतनी वीभत्स थी कि इसने पूरे मेरठ को झकझोर कर रख दिया था।

पुलिस के अनुसार, सौरभ को पहले खाने में नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया गया था। इसके बाद उस पर धारदार चाकू से कई वार किए गए।

आरोप यह भी है कि हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव के टुकड़े करने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने का दावा किया है।

पुलिस की चार्जशीट और सबूत

मेरठ पुलिस ने इस मामले में काफी विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और गवाहों के बयान शामिल हैं।

पुलिस का दावा है कि मुस्कान और साहिल के बीच करीबी संबंध थे और सौरभ इसमें बाधा बन रहा था। इसी वजह से उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई।

हालांकि, अब आरोपियों ने कोर्ट में इन सभी सबूतों को चुनौती दी है। साहिल की वकील रेखा जैन ने कहा कि उनके पास साहिल की बेगुनाही के पुख्ता सबूत हैं।

अगली सुनवाई की तारीख

कोर्ट ने दोनों आरोपियों के बयान दर्ज करने के बाद अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तारीख मुकर्रर की है। इस दिन बचाव पक्ष अपने गवाह पेश कर सकता है।

सुनवाई के बाद दोनों को वापस जिला जेल भेज दिया गया। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या साहिल अपनी दिल्ली वाली बात साबित कर पाएगा।

इस केस में न्याय की उम्मीद लगाए सौरभ के परिजन भी कोर्ट पहुंचे थे। उनका कहना है कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी जानकारों का मानना है कि धारा 313 के बयान ट्रायल का एक अहम हिस्सा होते हैं। हालांकि, ये बयान शपथ पर नहीं होते, लेकिन इनका प्रभाव पड़ता है।

अगर आरोपी अपनी बेगुनाही के सबूत पेश नहीं कर पाते, तो पुलिस की चार्जशीट और गवाहों के बयान भारी पड़ सकते हैं। मेरठ पुलिस इस केस को 'वॉटरटाइट' मान रही है।

शहर के लोग भी इस केस के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह मामला मेरठ के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक बन गया है।

समाज पर प्रभाव

इस तरह की घटनाओं ने समाज में असुरक्षा की भावना पैदा की है। विशेषकर युवाओं के बीच बढ़ते अपराध और रिश्तों में कड़वाहट चिंता का विषय है।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे इस मामले में जल्द से जल्द सजा दिलाने की कोशिश करेंगे। ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जा सके।

आने वाले दिनों में इस केस में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है। फिलहाल, 28 अप्रैल का दिन इस मुकदमे के लिए बेहद निर्णायक साबित होगा।

सौरभ के परिवार का दर्द

सौरभ के माता-पिता आज भी उस रात को याद कर सिहर उठते हैं। उनका इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, और वे केवल न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उनका कहना है कि आरोपियों का बार-बार बयान बदलना केवल समय खराब करने की एक चाल है।

मेरठ की जनता भी सोशल मीडिया के माध्यम से सौरभ के लिए न्याय की मांग कर रही है। यह मामला अब केवल एक अदालती कार्यवाही नहीं, बल्कि जनभावना बन चुका है।

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