जयपुर | राजस्थान की सुनहरी धरती अब केवल अपने धोरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी नई हरियाली के लिए भी पहचानी जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश एक अभूतपूर्व पर्यावरणीय क्रांति का गवाह बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ से प्रेरित होकर राजस्थान में ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान’ चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भावी पीढ़ी के लिए प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित करना है।
5 साल में 50 करोड़ पौधों का विशाल संकल्प
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पारिस्थितिकी को मजबूत करने के लिए आगामी 5 वर्षों में 50 करोड़ पौधारोपण का विशाल लक्ष्य रखा है। यह अभियान अब राज्य के कोने-कोने तक पहुंच चुका है। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2024 के मानसून में 7 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 7.22 करोड़ पौधे लगाए गए। वहीं, 2025 में 10 करोड़ के लक्ष्य को पार करते हुए 11.74 करोड़ पौधे रोपे गए।
नमो नर्सरी और चंदन के वनों की सौगात
राज्य सरकार हर जिला मुख्यालय पर ‘नमो नर्सरी’ स्थापित कर रही है। इसके साथ ही पंचायत समिति स्तर पर चरणबद्ध तरीके से ‘नमो वन’ विकसित किए जा रहे हैं ताकि स्थानीय जैव विविधता बनी रहे। एक विशेष पहल के तहत उदयपुर, सिरोही और बांसवाड़ा जैसे जिलों में चंदन के वन विकसित किए जा रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि प्रदेश की आर्थिक संपन्नता और पर्यटन में भी इजाफा होगा।
तकनीक और जनसहभागिता का अनूठा संगम
पौधों को केवल लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। इसके लिए राज्य सरकार ने जियो-टैगिंग की आधुनिक व्यवस्था की है, जिससे पौधों की ऑनलाइन निगरानी संभव है। इस महाअभियान में 'वन मित्र' और 'वृक्ष मित्र' अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। मानसून सीजन से पहले ही गड्ढे खोदने, फेंसिंग करने और नर्सरियों से पौधों के वितरण का काम सुचारू रूप से किया जाता है।
देश का पहला ऐतिहासिक 'हरित बजट'
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शिता का सबसे बड़ा प्रमाण वर्ष 2025-26 का 'हरित बजट' है। राजस्थान देश का ऐसा प्रमुख राज्य बना है, जहां पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। अब यह अभियान एक सरकारी योजना से बदलकर एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। आगामी मानसून सीजन के लिए भी 10 करोड़ पौधों का लक्ष्य तय किया गया है, जो राजस्थान को फिर से हरा-भरा बनाएगा।