भोपाल | मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस के भीतर दावेदारों के बीच खींचतान शुरू हो गई है। विधायकों की संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है।
सीटों का समीकरण और घमासान
मध्यप्रदेश में विधायकों की संख्या के आधार पर तीन में से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना तय माना जा रहा है। इसी एक सीट के लिए कांग्रेस के कई दिग्गज नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिससे पार्टी में अंदरूनी घमासान मच गया है।
दिग्विजय सिंह का बड़ा फैसला
राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे दोबारा राज्यसभा नहीं जाना चाहते। उनके इस फैसले ने नए चेहरों के लिए दिल्ली तक हलचल बढ़ा दी है।
मैदान में तीन बड़े दावेदार
दिग्विजय सिंह ने अपने करीबी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का नाम आगे बढ़ाया है। उनका तर्क है कि पार्टी को एक मजबूत ब्राह्मण चेहरे की जरूरत है। शर्मा को मौका देने से ब्राह्मण समाज में कांग्रेस की पैठ मजबूत हो सकती है और सहानुभूति मिल सकती है। दूसरी तरफ, दिल्ली दरबार यानी राहुल गांधी की पसंद के तौर पर मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। मीनाक्षी पहले भी सांसद रह चुकी हैं। वे राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा मानी जाती हैं और उनकी छवि काफी स्वच्छ और बौद्धिक नेता की है।
सज्जन सिंह का दलित कार्ड
इन दो नामों के अलावा पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी दलित कोटे से अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। हालांकि, उनके साथ विडंबना यह है कि दिल्ली में उनकी पैरवी करने वाला कोई बड़ा नेता फिलहाल सक्रिय नहीं है। फिर भी उन्हें उम्मीद है कि पार्टी दलित कार्ड खेल सकती है।
कब खाली हो रही हैं सीटें?
मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल 11 राज्यसभा सांसद हैं। इनमें भाजपा के जॉर्ज कुरियन, सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का कार्यकाल अगले साल जून में खत्म होगा। अब देखना यह है कि कांग्रेस आलाकमान किस नेता के नाम पर अंतिम मुहर लगाता है।