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क्रिकेट

मुकुल चौधरी का 'हेलीकॉप्टर' शॉट: केकेआर के जबड़े से जीत छीनने वाले मुकुल चौधरी की कहानी: पिता का सपना और धोनी जैसा 'हेलीकॉप्टर' शॉट, ऐसे पलटी किस्मत

बलजीत सिंह शेखावत

लखनऊ सुपर जायंट्स के युवा बल्लेबाज मुकुल चौधरी ने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ महज 27 गेंदों में 54 रनों की तूफानी पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई। उनके शानदार प्रदर्शन और संघर्ष की कहानी अब सोशल मीडिया पर छाई हुई है।

HIGHLIGHTS

  • मुकुल चौधरी ने 182 रनों का पीछा करते हुए 27 गेंदों में 54 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली।
  • 21 वर्षीय खिलाड़ी ने अपनी पारी के दौरान एमएस धोनी की याद दिलाने वाला 'हेलीकॉप्टर शॉट' लगाया।
  • मुकुल के पिता का सपना उनकी शादी से पहले ही अपने बेटे को क्रिकेटर बनाने का था।
  • झुंझुनू से जयपुर और फिर गुड़गांव तक का सफर मुकुल के कड़े संघर्ष को दर्शाता है।
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जयपुर | लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के युवा सितारे मुकुल चौधरी ने गुरुवार रात आईपीएल के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के जबड़े से जीत छीन ली।

21 साल के इस प्रतिभावान खिलाड़ी ने 182 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए महज 27 गेंदों पर ताबड़तोड़ 54 रनों की पारी खेली। उन्होंने अकेले दम पर लखनऊ को जीत की दहलीज के पार पहुँचाया।

मुकुल उस समय बल्लेबाजी के लिए उतरे जब मैच पूरी तरह से केकेआर के नियंत्रण में लग रहा था। 15वें ओवर में सातवें नंबर पर आकर उन्होंने जिस तरह का साहस दिखाया, उसने सभी को हैरान कर दिया।

https://x.com/IPL/status/2042309728831971782?s=20

 

धोनी जैसा 'हेलीकॉप्टर' शॉट

मुकुल की पारी में कई शानदार शॉट्स देखने को मिले, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके 'हेलीकॉप्टर शॉट' की हो रही है। इस शॉट ने दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी की यादें ताजा कर दीं।

मैदान के हर कोने में पूरी ताकत और सटीकता के साथ शॉट लगाते हुए मुकुल ने फैंस और कमेंटेटर्स को रोमांचित कर दिया। उनके अटूट आत्मविश्वास ने अंततः लखनऊ की जीत सुनिश्चित कर दी।

पिता के पुराने सपने से शुरू हुआ सफर

'प्लेयर ऑफ द मैच' चुने जाने के बाद मुकुल ने भावुक होकर अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि यह सफर उनके पिता के एक बहुत पुराने सपने की उपज है।

मुकुल ने साझा किया कि उनके पिता की शादी से पहले ही यह ख्वाहिश थी कि उनका बेटा बड़ा होकर क्रिकेटर बने। शुरुआत में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी।

झुंझुनू से जयपुर और गुड़गांव तक की राह

मुकुल ने महज 12-13 साल की उम्र में बल्ला थामा था। उनके गृह नगर झुंझुनू में क्रिकेट की बेहतर सुविधाएं न होने के कारण उन्हें जयपुर का रुख करना पड़ा।

टी20 क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए उन्होंने खुद को इस फॉर्मेट के लिए तैयार किया। इसके लिए उन्होंने गुड़गांव में भी कई महीनों तक रहकर कड़ी ट्रेनिंग ली और पसीना बहाया।

यूपी के खिलाफ वो ऐतिहासिक मैच

मुकुल के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट उत्तर प्रदेश के खिलाफ खेला गया अंडर-19 मैच था। उस कम स्कोर वाले मैच में मुकुल ने दबाव में शानदार बल्लेबाजी की थी।

तभी उनके पिता को पक्का यकीन हुआ था कि उनका बेटा भविष्य में क्रिकेट की दुनिया में कुछ बड़ा करने का हुनर रखता है। वही विश्वास आज मुकुल के खेल में साफ झलकता है।

दबाव को बनाया सफलता का अवसर

केकेआर के खिलाफ अपनी रणनीति पर बात करते हुए मुकुल ने कहा कि वह दबाव को एक तनाव के बजाय अवसर के तौर पर देखते हैं। उनकी योजना अंत तक टिके रहने की थी।

उन्हें खुद पर पूरा भरोसा था कि अगर वह आखिरी ओवर तक मैदान पर डटे रहे, तो टीम को जिता देंगे। वह बस गेंदबाज की गलती और अपने 'जोन' में आने वाली गेंद का इंतजार कर रहे थे।

मुकुल ने अंत में कहा कि भगवान ने उन्हें यह सुनहरा मौका दिया है और वह अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग करना चाहते हैं। उनकी यह साहसिक पारी क्रिकेट इतिहास में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

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