क्राइम

मुंबई गार्ड्स पर चाकू से हमला: मुंबई में गार्ड्स पर जिहादी हमला: धर्म पूछकर चाकू घोंपा

प्रदीप बीदावत · 28 अप्रैल 2026, 03:47 दोपहर
मीरा रोड में गार्ड्स पर हमला, आरोपी ने धर्म पूछकर चाकू से गोदा और कलमा पढ़ने का दबाव बनाया।

मुंबई | मुंबई के मीरा रोड इलाके में सोमवार की सुबह एक ऐसी खौफनाक वारदात हुई जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नया नगर इलाके में एक युवक ने ड्यूटी पर तैनात दो सुरक्षा गार्डों पर चाकू से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।

मीरा रोड में तड़के हुई वारदात की पूरी कहानी

यह घटना सोमवार तड़के करीब 4 बजे की है जब पूरा शहर गहरी नींद में सोया हुआ था और गार्ड अपनी ड्यूटी कर रहे थे। आरोपी की पहचान 31 वर्षीय जैब जुबेर अंसारी के रूप में हुई है, जो मीरा रोड की स्मिता रीजेंसी बिल्डिंग में रहता था। पुलिस के अनुसार, जैब पहले इलाके की एक निर्माणाधीन इमारत के पास पहुंचा जहां राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो रमेश सेन तैनात थे। उसने पहले वहां पहुंचकर मस्जिद का रास्ता पूछा और फिर कुछ देर बाद अचानक वापस लौटकर गार्ड्स पर हमला बोल दिया।

धर्म पूछकर किया हमला और कलमा पढ़ने का दबाव

आरोपी ने सबसे पहले गार्ड राजकुमार मिश्रा से उनका धर्म पूछा और जैसे ही उसे पता चला, उसने चाकू निकाल लिया। उसने बिना किसी उकसावे के गार्ड पर हमला कर दिया और फिर केबिन के अंदर मौजूद दूसरे गार्ड की तरफ बढ़ा। दूसरे गार्ड सुब्रतो सेन से उसने जबरन कलमा पढ़ने को कहा और जब उन्होंने मना किया तो उन पर भी वार कर दिया। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से उसे तुरंत ट्रैक कर लिया।

कौन है जैब जुबेर अंसारी? आरोपी का बैकग्राउंड

जांच में पता चला है कि जैब जुबेर अंसारी कोई मामूली अपराधी नहीं बल्कि एक उच्च शिक्षित और पढ़ा-लिखा व्यक्ति है। वह एक साइंस ग्रेजुएट है और साल 2000 से 2020 तक अपने माता-पिता के साथ अमेरिका में रह चुका है। अमेरिका में नौकरी न मिलने और कुछ निजी कारणों की वजह से वह 2020 में वापस भारत लौट आया था। वह पिछले दो सालों से मीरा रोड में अकेला रह रहा था और छात्रों को ऑनलाइन केमिस्ट्री की कोचिंग देता था।

अकेलेपन और इंटरनेट ने बनाया कट्टरपंथी

जांच एजेंसियों का मानना है कि जैब का अकेलापन और इंटरनेट पर कट्टरपंथी सामग्री देखना उसके इस कदम की वजह बना। उसकी पत्नी अफगानी मूल की है, जो उसे छोड़कर वापस अमेरिका चली गई है, जिससे वह काफी तनाव में रहता था। इसी दौरान वह सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा के संपर्क में आया और खुद को रेडिकलाइज कर लिया। एटीएस के सूत्रों का कहना है कि उसने किसी बाहरी संगठन के सीधे संपर्क के बिना ही खुद को कट्टरपंथी बना लिया था।

घर से मिले ISIS से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज

जब महाराष्ट्र एटीएस ने आरोपी के घर की तलाशी ली, तो वहां से कई चौंकाने वाले हाथ से लिखे नोट्स बरामद हुए। इन नोट्स में आरोपी ने वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) में शामिल होने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की थी। उसने अपने नोट्स में लिखा था कि गार्ड्स पर यह हमला किसी बड़े मिशन की शुरुआत और संगठन में शामिल होने का पहला कदम है। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन और लैपटॉप को जब्त कर लिया है ताकि उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स की गहराई से जांच की जा सके।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच से स्पष्ट होता है कि आरोपी जिहाद के नाम पर हिंदुओं को निशाना बनाना चाहता था।

यह मामला पूरी तरह से आत्म-उग्रवादीकरण (Self-Radicalization) का है, जहां आरोपी ने इंटरनेट के जरिए खुद को कट्टरपंथी बनाया।

फडणवीस ने आश्वासन दिया कि महाराष्ट्र पुलिस और एटीएस इस मामले की तह तक जाकर पूरी साजिश का पर्दाफाश करेंगे।

सुरक्षा गार्डों की हालत और अस्पताल का अपडेट

हमले में घायल हुए दोनों गार्डों, राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो सेन को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के अनुसार, उनके शरीर पर चाकू के गहरे घाव हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उनकी हालत अब स्थिर है। पुलिस ने गार्ड्स के बयान दर्ज कर लिए हैं, जिन्होंने आरोपी की उस डरावनी हरकत का पूरा विवरण जांच अधिकारियों को दिया है। गार्ड्स ने बताया कि आरोपी की आंखों में अजीब सा जुनून था और वह लगातार धार्मिक नारे लगा रहा था।

जांच में जुटी एटीएस और एनआईए की टीमें

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र एटीएस के साथ-साथ एनआईए (NIA) भी इस जांच पर पैनी नजर बनाए हुए है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या जैब किसी स्लीपर सेल या किसी हैंडलर के संपर्क में तो नहीं था। उसके बैंक खातों की भी जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध फंडिंग का पता लगाया जा सके। फिलहाल आरोपी 4 मई तक पुलिस हिरासत में है और उससे लगातार कड़ी पूछताछ की जा रही है।

लोन-वुल्फ अटैक का बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना 'लोन-वुल्फ अटैक' की श्रेणी में आती है, जहां एक व्यक्ति अकेले ही हमला करता है। ऐसे हमलों को रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती होती है क्योंकि इसमें कोई बड़ा नेटवर्क शामिल नहीं होता। मीरा रोड की इस घटना ने स्थानीय निवासियों में भी डर का माहौल पैदा कर दिया है, खासकर सुरक्षाकर्मियों के बीच। प्रशासन ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और लोगों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील की है।

समाज और सुरक्षा पर इस घटना का प्रभाव

यह घटना दिखाती है कि कैसे शिक्षित युवा भी इंटरनेट के जरिए गलत रास्ते पर भटक रहे हैं और कट्टरपंथ का शिकार हो रहे हैं। सुरक्षा गार्ड्स जो हमारी रक्षा के लिए तैनात होते हैं, वे अब इस तरह की नफरत भरी मानसिकता का शिकार बन रहे हैं। इस मामले ने धार्मिक सहिष्णुता और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर एक नई बहस छेड़ दी है जिसे गंभीरता से लेना जरूरी है। आने वाले दिनों में जांच से और भी कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है जो इस साजिश की पूरी परतें खोल देंगे।

निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई

मुंबई के मीरा रोड में हुई यह चाकूबाजी केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि कट्टरपंथ की गहरी जड़ों का संकेत है। आरोपी की गिरफ्तारी और एटीएस की सक्रियता से एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया गया है, लेकिन सतर्कता अभी भी जरूरी है। प्रशासन को अब इस तरह के सेल्फ-रैडिकलाइजेशन को रोकने के लिए सामाजिक और डिजिटल स्तर पर कड़े कदम उठाने होंगे।

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