रेवदर | अर्बुदारण्य की पावन धरा पर स्थित श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की ओर से नंदगांव में आयोजित ‘श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव’ में धार्मिक आराधना और गोसेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। महोत्सव के दौरान नंदगांव में 4300 खेजड़ी पौधों का रोपण किया गया।
महोत्सव गोऋषि दत्त शरणानंदजी महाराज एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वतीजी महाराज के सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।
ऋषि चैतन्यजी महाराज के सानिध्य में पौधरोपण
श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के वरिष्ठ ट्रस्टी रणछोड़ पुरोहित ने बताया कि महोत्सव के दौरान ऋषि चैतन्यजी महाराज के सानिध्य में 4300 खेजड़ी पौधे लगाए गए।
पौधरोपण कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराना और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित एवं सुरक्षित पर्यावरण तैयार करने का संदेश देना रहा।
राजस्थान के जीवन में खेजड़ी का विशेष महत्व
राजस्थान की संस्कृति, ग्रामीण जीवन, कृषि और पर्यावरण में खेजड़ी के वृक्ष का विशेष महत्व है। मरुस्थलीय परिस्थितियों में भी जीवित रहने वाला खेजड़ी का वृक्ष मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पशुओं को चारा उपलब्ध कराने और पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आयोजकों ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में खेजड़ी पौधों का रोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक पर्यावरण चेतना को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
बिश्नोई समाज के सैकड़ों गोभक्तों ने लिया भाग
पौधरोपण कार्यक्रम में बिश्नोई समाज के सैकड़ों गोभक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समाज के पुरुषों और महिलाओं ने मिलकर निर्धारित स्थानों पर पौधे लगाए।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि महिलाओं और माताओं ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। प्रतिभागियों ने पौधे लगाने के साथ उनके संरक्षण, नियमित देखभाल और सिंचाई की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया।
गोसेवा और प्रकृति संरक्षण का साझा संदेश
आयोजकों ने कहा कि गोसेवा और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पशुधन, वनस्पति, जल, भूमि और मनुष्य के बीच संतुलन बनाए रखने से ही प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सकता है।
महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक साधना के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
गणमान्यजन और गोभक्त रहे उपस्थित
पौधरोपण कार्यक्रम में हरलालजी बिश्नोई, पुखराजजी बिश्नोई, कल्पेशजी भालनी और ओमप्रकाशजी करडा सहित बिश्नोई समाज के अनेक गणमान्यजन एवं गोभक्त उपस्थित रहे।
सभी ने सामूहिक रूप से पौधों के संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
4300 पौधों का संरक्षण भी बड़ी जिम्मेदारी
नंदगांव में 4300 खेजड़ी पौधों का रोपण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके साथ ही इन पौधों को जीवित रखने, नियमित पानी देने और पशुओं से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होगी।
महोत्सव के माध्यम से गोसेवा, आध्यात्मिक साधना और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़कर समाज को प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभाने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने पौधरोपण को हरित भविष्य के संकल्प की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।