रेवदर | अर्बुदारण्य की पवित्र भूमि पर स्थित नंदगांव इन दिनों सनातन आस्था का महातीर्थ बना हुआ है। यहां श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की प्रेरणा से आयोजित श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास महोत्सव में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इस महोत्सव में देशभर से श्रद्धालु पहुंचकर वैदिक अनुष्ठानों और धर्मप्रवचनों का लाभ उठा रहे हैं।
नंदगांव बना सनातन आस्था का महातीर्थ
महोत्सव के दौरान धर्माचार्य मंडपम् में आयोजित दैनिक धर्मसभा में द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने गोसेवा, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
घास-फूस की झोपड़ी से 64 गोसेवा प्रकल्पों तक
जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने पथमेड़ा महाराजश्री के अथक प्रयासों को याद करते हुए कहा कि श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की शुरुआत एक साधारण घास-फूस की झोपड़ी से हुई थी।
उन्होंने बताया कि आज यही स्थान 64 विशाल गोसेवा प्रकल्पों के रूप में विकसित होकर सनातन संस्कृति और गोसेवा की एक महान प्रेरणा बन चुका है।
शंकराचार्य जी ने कहा, "जहां गोमाता की पूजा और सेवा होती है, वहां ईश्वर की विशेष कृपा बनी रहती है। गोसेवा करने से यज्ञ करने के समान पुण्य तथा तीर्थयात्रा के बराबर फल प्राप्त होता है।"
उन्होंने आगे कहा कि प्रतिदिन गोमाता का स्मरण, सेवा और श्रद्धापूर्वक स्पर्श करने से जीवन कल्याणमय और मंगलमय बनता है।
स्वच्छता से अधिक जरूरी है आंतरिक पवित्रता
अपने प्रवचन में, शंकराचार्य जी ने स्वच्छता और पवित्रता के बीच के सूक्ष्म अंतर को भी स्पष्ट किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाहरी स्वच्छता के साथ-साथ मन, बुद्धि और आत्मा की पवित्रता भी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने समझाया कि सनातन धर्म में पवित्रता को एक विशेष स्थान दिया गया है, जो केवल शारीरिक सफाई तक सीमित नहीं है।
एक सरल उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बाथरूम कितना भी स्वच्छ और आधुनिक क्यों न हो, वहां बैठकर भोजन नहीं किया जा सकता। इसके विपरीत, जंगल में किसी वृक्ष के नीचे श्रद्धा और सहजता के साथ भोजन किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वच्छता और पवित्रता दो अलग-अलग विषय हैं।
सुबह वैदिक पूजन, दिनभर कथा और धर्मप्रवचन
महोत्सव में आध्यात्मिक कार्यक्रमों की धूम मची हुई है। प्रतिदिन प्रातः 7 से 9 बजे तक भगवान श्री हरिहर का वैदिक पूजन एवं अभिषेक किया जा रहा है।
इस पूजन में मुख्य यजमान के रूप में श्री देवजी पुरोहित कैलाश नगर, श्री भरतसिंह जी बसंत सपत्नीक, और श्री रघुनाथसिंह जी अध्यक्ष पथमेड़ा सहित अनेक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया।
यह वैदिक पूजन पं. महावीर जी पारीक के आचार्यत्व में सम्पन्न हो रहा है, जिसमें सुनील जी, घनश्याम जी और राधेश्याम जी भी सहयोग कर रहे हैं।
जगद्गुरु शंकराचार्य का पावन चातुर्मास
महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद जी महाराज का पावन चातुर्मास है। वे प्रतिदिन सुबह 11 से दोपहर 12:30 बजे तक धर्म, वेदांत और सनातन संस्कृति पर अपने प्रवचनों से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
इसके अलावा, दोपहर 1:30 से शाम 4:30 बजे तक पूज्य गोवत्स दिव्यांशु जी महाराज द्वारा ‘नानी बाई का मायरा’ कथा का भक्तिमय वाचन किया जा रहा है, जो 10 अगस्त तक चलेगा।
देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु
श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास महोत्सव में राजस्थान के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में गोभक्त और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पूरा परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति और धार्मिक आयोजनों से गुंजायमान है, जिससे एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण हुआ है।
धर्मसभा में ऋषिचैतन्यजी महाराज, कथा मनोरथी घेवरचंदजी, सुरेशजी, भभूताराम पुरोहित, कैलाश सांथू, मिश्रीमल, बलवंतराज, चम्पालाल मोदी, सीईओ आलोक सिंहल, हरिभगवान बंग, सांवलाराम, बिहारीलाल बसंत, और प्रवीण राजपुरोहित सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजकों ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से महोत्सव में भाग लेने का आह्वान किया है।
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