राजस्थान

जयपुर में लगा राष्ट्रीय मसाला मेला: जयपुर में राष्ट्रीय सहकार मसाला मेला 2024 शुरू: शुद्ध मसालों की खुशबू से महका जवाहर कला केंद्र, जानें क्या है खास

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 18 अप्रैल 2026, 09:32 सुबह
जयपुर के जवाहर कला केंद्र में राष्ट्रीय सहकार मसाला मेला 2024 का भव्य आगाज़ हो गया है। 26 अप्रेल तक चलने वाले इस मेले में देशभर की सहकारी संस्थाएं शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण मसालों के साथ हिस्सा ले रही हैं।

जयपुर | गुलाबी नगरी जयपुर के निवासियों के लिए खुशियों और स्वाद की सौगात लेकर 'राष्ट्रीय सहकार मसाला मेला 2024' शुरू हो चुका है। जयपुर के जवाहर कला केंद्र का दक्षिण परिसर इन दिनों मसालों की भीनी-भीनी खुशबू से महक रहा है। सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दक ने शुक्रवार को इस मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर शासन सचिव डॉ. समित शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहे। मंत्री दक ने कहा कि यह मेला सहकारी संस्थाओं को एक मजबूत मंच प्रदान करता है। इससे किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलता है और बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है। यह आयोजन 'एक सबके लिए, सब एक के लिए' के मंत्र को हकीकत में बदल रहा है।

विकसित भारत और सहकारिता की भूमिका

मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के सपने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को पाने में सहकारी आंदोलन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। संभाग स्तर पर मेलों की सफलता के बाद अब इन्हें जिला स्तर पर भी आयोजित किया जाएगा। सहकारिता मंत्री ने बताया कि जयपुरवासियों के बीच यह मेला अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। यहां मिलने वाले उत्पादों की शुद्धता पर लोगों को अटूट भरोसा है। यही कारण है कि मेले के प्रति जयपुरवासियों का रिस्पॉन्स हमेशा बेहतरीन रहता है।

शुद्धता का भरोसा और मिलावट से मुक्ति

आज के समय में मिलावट एक बड़ी समस्या बन चुकी है, जिससे आम जनता परेशान है। ऐसे में यह मेला जयपुरवासियों को शुद्ध मसाले और खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने का काम करता है। यहां मिलने वाले उत्पाद सीधे सहकारी समितियों द्वारा तैयार किए जाते हैं।

देशभर के मसालों का अनूठा संगम

इस मेले में केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों की झलक देखने को मिलेगी। केरल की काली मिर्च, तमिलनाडु की हल्दी और कश्मीर की केसर यहां के मुख्य आकर्षण हैं। पंजाब के चावल और मध्य प्रदेश का सिहोरी गेहूं भी ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। राजस्थान के विभिन्न जिलों के प्रसिद्ध उत्पाद भी यहां एक ही छत के नीचे मिल रहे हैं। मथानिया की लाल मिर्च, नागौर की कसूरी मेथी और जालोर का ईसबगोल काफी पसंद किया जा रहा है। साथ ही, प्रतापगढ़ की हींग और चित्तौड़गढ़ की अजवाइन की भी भारी मांग है। बारां का धनिया और सोजत की मेहंदी अपनी खुशबू से लोगों को आकर्षित कर रही है। डूंगरपुर का आम पापड़ और बीकानेर के पापड़ बच्चों और बड़ों की पहली पसंद बने हुए हैं। राजसमंद का शर्बत और नाथद्वारा की ठण्डाई गर्मी के मौसम में राहत का अहसास करा रहे हैं।

स्वाद के साथ मनोरंजन का तड़का

मेले में खरीदारी के साथ-साथ मनोरंजन का भी पूरा ख्याल रखा गया है। हर दिन अलग-अलग संभागों के लोक कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इससे आगंतुकों को राजस्थान की समृद्ध लोक कला को करीब से देखने का मौका मिलेगा। इतना ही नहीं, ग्राहकों के लिए प्रतिदिन लकी ड्रॉ निकालने की व्यवस्था की गई है। मेले के अंतिम दिन एक मेगा बम्पर ड्रॉ निकाला जाएगा, जिसमें आकर्षक इनाम दिए जाएंगे। यह पहल उपभोक्ताओं के उत्साह को और अधिक बढ़ाने का काम करती है।

मेले का इतिहास और आयोजन का समय

बता दें कि सहकारिता विभाग और कॉनफेड द्वारा साल 2003 से इस मेले का आयोजन किया जा रहा है। पिछले दो दशकों में यह आयोजन जयपुर की पहचान बन चुका है। इस वर्ष मेले में लगभग 150 स्टॉल्स लगाई गई हैं, जो विविधता को दर्शाती हैं। यह मेला 17 अप्रेल से शुरू होकर 26 अप्रेल तक चलेगा। उद्घाटन समारोह में राजफेड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी और कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे। अगर आप भी शुद्ध मसालों के शौकीन हैं, तो जवाहर कला केंद्र जरूर आएं।

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