राजनीति

संसद में BJP: संसद में NDA की ताकत बढ़ी, क्या अब संविधान संशोधन होगा?

बलजीत सिंह शेखावत · 02 जुलाई 2026, 12:12 दोपहर
TMC और शिवसेना में टूट से NDA को मिला फायदा, दो-तिहाई बहुमत के करीब, मानसून सत्र में बड़े बिल संभव।

नई दिल्ली | देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) न केवल देश में, बल्कि संसद में भी पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में आ गई है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्षेत्रीय दलों में बगावत और टूट ने संसद में भाजपा की राह आसान कर दी है।

संसद में बदला शक्ति का समीकरण

हालिया राजनीतिक घटनाओं ने संसद के अंकगणित को सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पक्ष में झुका दिया है। लोकसभा में भाजपा के पास वर्तमान में 240 निर्वाचित सांसद हैं, और सहयोगियों के साथ मिलकर एनडीए के पास 318 सीटों का बहुमत है, जो सामान्य कानून पारित करने के लिए पर्याप्त है।

हालांकि, बड़े संवैधानिक संशोधनों के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, और एनडीए अब उस लक्ष्य के करीब पहुंचता दिख रहा है।

तृणमूल और शिवसेना में बगावत का असर

विपक्षी खेमे में हुई बड़ी उथल-पुथल ने एनडीए को यह बढ़त दिलाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों का एक गुट अलग होकर एनडीए में शामिल हो गया, जिससे लोकसभा में टीएमसी की संख्या घटकर केवल 8 रह गई है।

इसी तरह, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में हुई टूट ने महाराष्ट्र की राजनीति को बदल दिया। शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने एनडीए का दामन थाम लिया है।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि प्रांतीय दलों में बगावत या उनके टूटने से संसद में भाजपा के लिए आसानी हो गई है।

इन विभाजनों से न केवल विपक्षी एकता कमजोर हुई है, बल्कि सत्ताधारी दल को महत्वपूर्ण विधायी समर्थन भी मिला है, जिससे वे अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं।

संवैधानिक संशोधनों की राह आसान?

संसद में अपनी बढ़ी हुई ताकत के साथ, एनडीए सरकार कुछ बड़े संवैधानिक संशोधन लाने की तैयारी में है। इसके लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। भाजपा गठबंधन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

यह बहुमत सरकार को उन कानूनों को पारित करने की शक्ति देगा जो देश की सामाजिक और राजनीतिक संरचना पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।

मानसून सत्र में पेश हो सकते हैं अहम विधेयक

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार 17 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में 130वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। इस विधेयक में गंभीर अपराधों के लिए 30 दिनों तक हिरासत में रहने वाले मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान शामिल है।

इसके अलावा, सरकार लंबे समय से लंबित परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने और महिला आरक्षण कानून को लागू करने का एक और प्रयास कर सकती है। ये विधेयक देश के चुनावी और प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।

इन développements से स्पष्ट है कि आने वाला मानसून सत्र काफी हंगामेदार और महत्वपूर्ण होने वाला है। एनडीए की बढ़ी हुई ताकत और विपक्ष की कमजोर स्थिति के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपने विधायी एजेंडे को किस हद तक आगे बढ़ा पाती है।

*Edit with Google AI Studio

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)