जयपुर | देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को आखिरकार पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया है। इस फैसले ने देशभर के लाखों छात्रों को झकझोर कर रख दिया है।
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने इस मामले में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में पता चला है कि यह पेपर लीक नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।
एसओजी के आईजी अजय पाल लांबा ने जानकारी दी है कि इस मामले में अब तक 150 से अधिक अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं। इन सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।
एसओजी की जांच में बड़े खुलासे
आईजी अजय पाल लांबा ने बताया कि अलवर, जयपुर, जयपुर ग्रामीण, झुंझुनूं और सीकर पुलिस के साथ एसओजी की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जांच का दायरा अब बढ़ता जा रहा है।
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि परीक्षा से पहले हरियाणा के एक व्यक्ति ने महाराष्ट्र से पेपर प्राप्त किया था। इसके बाद उसने इस पेपर को अन्य लोगों के साथ साझा किया।
जांच के अनुसार, यह पेपर लीक का नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें कई दलाल और कोचिंग संस्थानों के जुड़े होने की भी संभावना जताई गई है।
सीबीआई ने संभाली जांच की कमान
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। सीबीआई की टीम दिल्ली से राजस्थान पहुंच चुकी है और साक्ष्य जुटा रही है।
एसओजी ने अब तक दो दर्जन से अधिक संदिग्धों को सीबीआई के हवाले किया है। इनमें पेपर लीक गिरोह के मुख्य सरगना और कुछ अभ्यर्थी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
सीबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि पेपर मूल रूप से कहां से लीक हुआ था। क्या इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के किसी कर्मचारी की मिलीभगत थी?
सीकर बना पेपर लीक का मुख्य केंद्र
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि पेपर सबसे पहले राजस्थान के सीकर जिले में आउट हुआ था। सीकर को राजस्थान में कोचिंग का हब माना जाता है, जहां हजारों छात्र पढ़ते हैं।
एसओजी के मुताबिक, केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने इस पेपर को सीकर में अपने परिचितों को भेजा था। यहीं से यह पेपर तेजी से फैलना शुरू हुआ।
सीकर के एक पीजी संचालक ने इस सामग्री को वहां रहने वाले छात्रों तक पहुंचाया। धीरे-धीरे यह सामग्री कोचिंग नेटवर्क और व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से हजारों लोगों तक पहुंच गई।
'गेस पेपर' का रहस्य और सच्चाई
जांच एजेंसियों के रडार पर एक 'गेस पेपर' है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह एक हाथ से लिखा हुआ दस्तावेज था, जिसमें लगभग 410 सवाल शामिल थे।
हैरानी की बात यह है कि इन 410 सवालों में से लगभग 120 सवाल सीधे तौर पर NEET-UG 2026 के असली पेपर में आए थे। यह समानता देख अधिकारी भी दंग रह गए।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि यह गेस पेपर परीक्षा से काफी पहले छात्रों के बीच घूम रहा था। यह करीब 15 दिन पहले ही छात्रों तक पहुंच चुका था।
बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सवालों में समानता
जांच में पाया गया कि लीक हुए पेपर में केमिस्ट्री के 45 और बायोलॉजी के 90 प्रश्न उत्तर सहित उपलब्ध थे। इन सवालों के कारण परीक्षा की शुचिता पूरी तरह खत्म हो गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन समान सवालों की वजह से परीक्षा के कुल 720 अंकों में से लगभग 600 अंक प्रभावित हो सकते थे। इससे मेधावी छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया।
चैट रिकॉर्ड्स से पता चला है कि यह पेपर 'forwarded many times' टैग के साथ व्हाट्सएप पर वायरल था। तकनीकी टीम अब इन डिजिटल साक्ष्यों को डिकोड करने में जुटी है।
5 लाख से 30 हजार तक बिका पेपर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह गेस पेपर परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले बड़े स्तर पर फैल चुका था। शुरुआत में गिरोह ने इसे 5 लाख रुपये तक में बेचने की कोशिश की थी।
हालांकि, जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आया और पेपर अधिक लोगों तक पहुंचा, इसकी कीमत गिरती गई। परीक्षा के एक दिन पहले यह मात्र 30 हजार रुपये में बिक रहा था।
उत्तराखंड के देहरादून और राजस्थान के कई जिलों से हिरासत में लिए गए लोगों ने इस लेनदेन की पुष्टि की है। गिरोह ने मोटी रकम कमाने के लिए लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया।
"प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पेपर सबसे पहले सीकर में आउट हुआ था। इसके बाद इसे अन्य राज्यों में फैलाया गया। हम हर संदिग्ध पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं।" - अजय पाल लांबा, आईजी, एसओजी
छात्रों का दर्द और भविष्य की चिंता
नीट परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों में भारी आक्रोश और दुख देखा जा रहा है। कई छात्रों का कहना है कि उनकी सालों की मेहनत पर पानी फिर गया है और उनका मनोबल टूट गया है।
NEET-UG देशभर में एमबीबीएस और बीडीएस जैसे मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए एकमात्र जरिया है। इस साल 22.79 लाख छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया था, जो अब अधर में लटके हैं।
परीक्षा भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की गई थी। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा रद्द होना भारतीय शिक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा दाग है।
निष्कर्ष और आगे की राह
नीट 2026 का रद्द होना यह दर्शाता है कि पेपर लीक माफियाओं की जड़ें कितनी गहरी हैं। अब सबकी नजरें सीबीआई की जांच पर टिकी हैं ताकि असली दोषियों को सजा मिल सके।
यह घटनाक्रम न केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि भविष्य में ऐसी धांधली न हो। छात्रों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
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